विराट व्यक्तित्व की धनी हैं शिक्षा जगत को समर्पित प्रेमलता आर्य

शिक्षा जगत के लिए प्रेरणा स्रोत है विराट व्यक्तित्व की धनी प्रेमलता आर्य
शिक्षक दिवस के अवसर पर जब कभी भी शिक्षा के क्षेत्र में आदर्श स्थापित करने वाले टीचर्स का जिक्र आता है तो एक नाम स्वत: ही सामने आ जाता है वह नाम है राजकीय बालिका इंटर कॉलेज दौलिया हल्दूचौड़ की सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य प्रेमलता आर्य का ।  गत वर्ष सेवानिवृत हुई प्रधानाचार्य प्रेमलता आर्य का 36 वर्ष का कार्यकाल उपलब्धियों से भरा है । शिक्षा के क्षेत्र में उनके  किए गए उत्कृष्ट कार्यों की एक लंबी श्रृंखला है । इसकेे  अलावा  बच्चों के लिए उनका प्रोत्साहन भी किसी उदाहरण से कम नहीं है। सरकारी स्कू्ल में नौकरी करने के बावजूद शिक्षा की बेहतर व्यवस्था के लिए अपने खुद के स्तर से भी कई सराहनीय कार्य किए । अनुशासन प्रिय प्रेमलता आर्य दरियादिल इंसान के रूप में जानी जाती है। जहांं कहीं भी उन्होंने देखा कि गरीब व मेधावी बच्चे साधनों से वंचित हैं तो उन्होंने अपने स्तर से उन्हें हर संभव सुविधा साधन उपलब्ध कराएं। प्रेमलता आर्य ने 2013 में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज दौलिया में ज्वाइनिंग ली। एक प्रिंसिपल के रूप में उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती विद्यालय का शैक्षिक माहौल अच्छा बनाना  था। वहीं विद्यालय में पठन-पाठन से संबंधित व्यवस्थाओं को दुरुस्त भी करना था। जब उन्होंने देखा कि विद्यालय के बच्चे बैठने तक के लिए फर्नीचर के लिए तरस रहे हैं, जमीन पर बैठकर ही उनको पढ़ाई करनी होती है तो उन्होंने खुद के प्रयासों से तथा टाटा मोटर्स  से बातचीत कर विद्यालय के लिए फर्नीचर की व्यवस्था की। उसके बाद उन्होंने विद्यालय के कई कमरों को स्मार्ट क्लासरूम के रूप में विकसित किया। शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय प्रयास करने वाली प्रेम लता उत्तराखंड के ख्याति प्राप्त शैलेश मटियानी राजकीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे भारत स्वच्छता अभियान में पूरे देश में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज दौलिया को स्वच्छता के क्षेत्र में 12 वां स्थान प्राप्त हुआ। जो इस क्षेत्र की ही नहीं बल्कि राज्य के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने उन्हें दिल्ली में भारत सरकार द्वारा प्रदत्त पुरस्कार प्रदान किया। उत्तराखंड से पुरस्कार प्राप्त करने वाली वे एकमात्र शिक्षिका थी। विद्यालय के शैक्षणिक माहौल को बेहतर करने के अलावा उन्होंने विद्यालय की सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया और बच्चों के अंदर रचनात्मक कार्य करने का मार्ग प्रशस्त किया।वे एक शिक्षक होने के साथ-साथ एक मंझी हुई कलाकार भी  रही है तथा कत्थक नृत्य में उन्हें महारत हासिल है। उन्होंने अपनी इस कला का लाभ विद्यालय के बच्चों को भी दिया और सांस्कृतिक गतिविधियों में विद्यालय के बच्चों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। राजकीय विद्यालय होने के बावजूद उनके अपने खुद के प्रयासों से 5 वर्ष तक लगातार सांस्कृतिक महोत्सव संपन्न कराया।उन्होंने विद्यालय के लिए एक बैंड धुन की टीम का भी गठन किया और बैंड प्रतियोगिता में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज दौलिया ने देहरादून में जाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। टाटा मोटर्स के अलावा उन्होंने ओएनजीसी से भी बात कर विद्यालय के लिए फर्नीचर की व्यवस्था का आग्रह किया। ओएनजीसी ने उनके आग्रह पर पांच लाख ५६ हजार की धनराशि स्वीकृत कराई। लगातार बच्चों से काउंसलिंग करना उनकी प्रतिभा को तराशना और उन्हें उचित मार्गदर्शन देना उनके कार्यकाल का अभिन्न हिस्सा रहा। निर्धन बच्चों के पठन-पाठन में किसी प्रकार की कोई दिक्कत न हो इसको लेकर भी उन्होंने स्वयं के प्रयासों से हर संभव मदद की। रिटायरमेंट के बाद भी उनके अंदर समाज के लिए कुछ कर गुजरने की भावना कूट-कूट कर भरी  है। 24 मार्च से देश में लॉकडाउन लागू होने के बाद जरूरतमंदों को तमाम प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ऐसे में दरिया दिल की धनी प्रेमलता के मन में सेवा भाव करने की भावना पैदा हुई  और उन्होंने लाल कुआं में नेहा रोटी बैंक के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें ₹5000 की धन राशि प्रदान की। इसके अलावा तमाम सामाजिक सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यों को बढ़ावा देने के लिए भी अपने स्तर से हरसंभव मदद करती रहती हैं। शैलेश मटियानी राजकीय पुरस्कार के अलावा भारत स्वच्छता अभियान राष्ट्रीय पुरस्कार तथा शिक्षा के क्षेत्र में ही एक अन्य राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कर चुकी प्रेमलता को स्थानीय स्तर भी तमाम सम्मान से सम्मानित किया गया है। पूर्व मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल पूर्व शिक्षा मंत्री, विधायक नवीन दुम्का तथा मानव उत्थान सेवा समिति द्वारा प्रेम लता आर्य को उनके उत्कृष्ट कार्यो के लिए सम्मानित किया जा चुका है। उनकी प्रेम रूपी लताओं का सानिध्य पा चुके कई बच्चे आज अपनी जिंदगी के बेहतर मुकाम को हासिल कर चुके हैं। प्रेमलता आर्य का कहना है कि अपने कर्तव्यों का अपने दायित्वों का अपनी जिम्मेदारियों का पूरी ईमानदारी एवं निष्ठा के साथ पालन करना ही सच्ची सेवा है और जब इंसान को भगवान ने सक्षम बनाया है तो इंसान का भी फर्ज बनता है कि वह जरूरतमंद लोगों की सेवा करें क्योंकि परोपकार से बड़ा कोई धर्म नहीं है। उन्होंने जेईई मेंस तथा नीट की परीक्षा की तैयारी कर रहे अथवा परीक्षा दे रहे विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य की कामना की है ।

  • साथ ही उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की है कि वैश्विक महामारी कोरोना का संक्रमण शीघ्र समाप्त हो। सभी स्वस्थ रहें सभी निरोगी रहें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *