अनामिका शुक्ला, अनामिका सिंह,प्रिया अंततः निकली सुप्रिया जाटव,अब तलाश रैकेट की

फर्जी शिक्षिका मामलाः वो कौन है अनामिका शुक्ला या अनामिका सिंह या प्रिया जाटव या फिर सुप्रिया जाटव
फर्जी शिक्षिका मामलाः कई ऐसे रहस्य हैं, जो फ़िलहाल इस मामले में खुलने बाक़ी है. पुलिस इन सभी अनसुलझे पहलुओं पर काम कर रही है.
लखनऊः यूपी में करीब 2 दर्जन स्कूलों में एक ही शिक्षिका के पढ़ाने के मामले में नया मोड़ आया है. साथ ही यह मामला लगातार उलझता जा रहा है. अनामिका शुक्ला, अनामिका सिंह और प्रिया जाटव के बाद अब सुप्रिया जाटव की कहानी ने सबको उलझा कर रख दिया है.
कस्तूरबा स्कूल में अनामिका शुक्ला के कांड के खुलासे के बाद एक शिक्षिका गिरफ्तार की गई है. इस महिला की गिरफ़्तारी यूपी के कासगंज ज़िले से हुई. इसके बाद पकड़ी गई कथित शिक्षिका ने अपना नाम अनामिका सिंह बताया. थोड़ी कड़ाई के बाद उसने अपना नाम प्रिया जाटव बताया और अंत में पता चला कि वो न तो अनामिका शुक्ला है, न अनामिका सिंह और न प्रिया जाटव.
तो फिर कौन है पकड़ी गई महिला?
असल में पुलिस की गिरफ्त में आई महिला का नाम सुप्रिया जाटव है. 6 जून को कासगंज से गिरफ्तार हुई फर्जी शिक्षिका अनामिका शुक्ला का असली नाम सुप्रिया जाटव है. इस बात का खुलासा सुप्रिया के पिता महिपाल जाटव ने किया है. मूलरूप से उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जनपद के कायमगंज की रहने वाली सुप्रिया जाटव ने कायमगंज के शकुंतला देवी कॉलेज से स्नातक किया और स्नातक के दौरान ही अनामिका शुक्ला और सुप्रिया की मुलाकात मैनपुरी के रहने वाले एक नीतू नामक युवक से हुई. इस युवक ने ही अनामिका शुक्ला और सुप्रिया को बेसिक शिक्षा विभाग में नौकरी दिला दी. सुप्रिया जाटव के पिता के मुताबिक सुप्रिया जाटव ने उन्हें 50000 अपनी तनख्वाह में से दिए हैं.
पूरा मामला क्या है?
इस मामले को आसानी से समझना हो तो इस तरह समझिए कि अनामिका शुक्ला नाम की महिला के अंक बहुत अच्छे आये थे.चूंकि कस्तूरबा स्कूल में नियुक्ति मेरिट के आधार पर होती है.ऐसे में अनामिका शुक्ला के सर्टिफिकेट पर अलग अलग स्कूलों में आवेदन देकर अलग अलग लोगों ने दावेदारी की.
असली अनामिका शुक्ला की जगह आवेदन करने वाले ने अपनी तस्वीर लगाई और नौकरी पा ली. उसी नौकरी के आधार पर अनामिका शुक्ला के नाम से अकांउट खुल गया. इस तरह अनामिका शुक्ला के नाम पर अलग-अलग कस्तूरबा स्कूल में अलग-अलग लोग नौकरी करने लगे. हाल ही में कस्तूरबा स्कूल प्रबंधन की तरफ से अपने शिक्षकों का एक डेटा बैंक तैयार किया जा रहा था. जब एक ही नाम से कई स्कूलों में शिक्षिका होने की बात पता चली तब शक के आधार पर कासगंज से पहली गिरफ़्तारी की गई. शुरुआत में पकड़ी गई महिला ने अपना नाम अनामिका शुक्ला बताया लेकिन मामला उलझता देख उसने अपना नाम अनामिका सिंह बताना शुरू कर दिया. फिर पुलिस ने सख़्ती दिखाई तो उसने अपना नाम प्रिया जाटव बता दिया. अंत में ख़ुलासा ये हुए कि पकड़ी गई महिला की सही पहचान सुप्रिया जाटव है. इसकी पुष्टि आरोपित के पिता ने की .

आरोपित सुप्रिया ने 2 लोगों का नाम लिया
आरोपित सुप्रिया ने मैनपुरी के किसी राज और अमरकांत नाम के युवकों के बारे में ज़िक्र किया है. उसके आरोप के मुताबिक़ इन दोनों ने नौकरी दिलवाने में उसकी मदद की थी. इस मामले में आगरा से एसटीएफ ने आकर सोरों थाना में मामले से जुड़े दस्तावेजो की पड़ताल की है.सुप्रिया को वर्तमान में कासगंज जेल की महिला बैरक में रखा गया है. इस मामले में जांच जारी है.
पुलिस भी फ़िलहाल मामला ठीक से समझने की कोशिश में लगी है. अगर अलग अलग स्कूलों में अलग अलग लोगों के काम करने की थ्योरी अगर सही है तो ज़ाहिर है इस भर्ती प्रक्रिया में कोई बड़ा रैकेट काम कर रहा है जो पैसे लेकर दूसरों के सर्टिफिकेट पर नौकरी दिलाता है. साथ ही ऐसे फर्ज़ी लोगों की भी पहचान कर उन्हें गिरफ़्तार करना पुलिस का अगला टास्क होगा जो पैसे देकर दूसरों के सर्टिफिकेट पर नौकरी कर रहे हैं. ऐसे में कई ऐसे रहस्य हैं, जो फ़िलहाल इस मामले में खुलने बाक़ी है. पुलिस इन सभी अनसुलझे पहलुओं पर काम कर रही है.
बीए की थी डिग्री, लेकिन नाम बदलकर पढ़ा रही थी साइंस
उप्र में अनामिका शुक्ला के शैक्षणिक दस्तावेजों से अलग-अलग जिलों में नौकरी कर रही सभी युवतियां तो अभी तक सामने नहीं आई हैं,लेकिन इस पूरे मामले में धांधली की कई कथाएं जरूर सामने आ रही हैं। कासगंज में गिरफ्तार प्रिया जाटव के मामले में नया खुलासा यह हुआ है कि उसने बीए किया था और साइंस के बच्चों को वह पढ़ा रही थी।
प्रिया जाटव कायमगंज के रजपालपुर गांव की रहने वाली है। रविवार को रजपालपुर में उसके पिता महीपाल ने कहा कि उनकी छोटी बेटी सुप्रिया ने ग्राम भटासा के रामदर्शनी राजकीय कालेज से इंटर और कायमगंज के शकुंतला देवी कालेज से बीए किया है। बीएससी या बीएड की पढ़ाई नहीं की है। मैनपुरी निवासी अध्यापक नीतू ने नौकरी लगवाने के नाम पर उससे डेढ़ लाख रुपये लिए थे। उसी ने सुप्रिया की कासगंज में नौकरी लगवाई। नीतू उनके घर आया था।
उसने एडवांस में पचास हजार रुपये नौकरी लगवाने के लिए थे। बाकी एक लाख रुपये की रकम वह सुप्रिया का वेतन मिलने पर लेता रहा। करीब एक साल से उनकी पुत्री कासगंज में रहकर नौकरी कर रही थी। लॉकडाउन की वजह से गांव आ गई थी। जब उसको नीतू की धोखेबाजी का पता लगा तो शनिवार को अपने भाई संघरत्न के साथ इस्तीफा देने वह कासगंज गई थी,जहां उसे पकड़ लिया गया। महीपाल ने बताया कि नीतू खुद को कंपिल क्षेत्र के एक प्राइमरी स्कूल का अध्यापक बताता था। सुप्रिया की मां मीरा देवी ने इस मामले में कहा कि वह तो ठगी की शिकार हुई है। देर शाम पुलिस ने सुप्रिया के घर छापा भी मारा और कुछ दस्तावेज ले गई।
आगरा में एसटीएफ सूत्रों का कहना है कि कासगंज में गिरफ्तार युवती प्रिया जिसका असली नाम सुप्रिया है ने नौकरी लगवाने वाले युवक को चेक से रिश्वत की रकम दी थी। पहले युवक ने चेक से 50 हजार रुपये निकाले थे। इसके बाद एक लाख रुपये और निकाले। इस बीच इस घोटाले की अलग-अलग जिलों में जांच जारी है। कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय बिजौली में नौकरी पाने वाली अनामिका शुक्ला का पता तो फर्जी निकला ही,फोटो भी काफी धुंधली है। उसके सभी दस्तावेज जांच के लिए अवध यूनिवर्सिंटी के वीसी को भेजे गए हैं। साथ ही पुलिस को भी सौंपे गए हैं। जबकि कासगंज में अनामिका के दस्तावेज में बीए की डिग्री रघुकुल विद्यापीठ गोंडा से और बीएड की डिग्री आदर्श कन्या महाविद्यालय अंबेडकर नगर से हासिल पाई गई है। कासगंज में गिरफ्तार की गई महिला की फोटो से बिजौली में रही अनामिका की फोटो चेक की गई। दोनों अलग-अलग पाई गई हैं। हालांकि,विभाग के पास मौजूद फोटो काफी धुंधली और पुरानी है। बिजौली के केजीबीवी को खुलवाकर वहां का सीसी टीवी फुटेज खंगाले जाएंगे।
सहारनपुर में कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में नियुक्ति के समय ही उसके ऊपर संदेह पैदा हो गया था। दो बार में हुई इस भर्ती में अनामिका ने दोनों बार आवेदन किया था और दोनों ही बार अपने पिता का नाम अलग-अलग बताया था। कागजातों में दर्ज उसका पता भी पत्राचार के पते से अलग था। नौकरी को नियुक्ति पत्र उसके घर मैनपुरी में भेजा गया था। उसी समय गांव वालों ने साफ कर दिया था कि इस नाम-पते का कोई व्यक्ति इस गांव में नहीं रहता है लेकिन शिक्षा विभाग के संबंधित अफसरों ने इसकी अनदेखी की।
बागपत के बीएसए राजीव रंजन कुमार मिश्र ने बड़ौत कोतवाली में अनामिका शुक्ला (पुत्री सुभाषचंद शुक्ला), अध्यापिका कस्तूरबा विद्यालय बड़ौत (मूल निवासी हसनपुर भोगांव,जनपद मैनपुरी) के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में बताया कि जनवरी-2020 के वेतन को अनामिका शुक्ला ने वाट्सएप से अपना बैंक खाता डिटेल विद्यालय लेखाकार सोनिया रानी को उपलब्ध करवाया था। मानदेय हस्तांतरित करते समय त्रुटिवश खाता नंबर गलत हो गया था। इससे अनामिका का 22,810 रुपये का वेतन उसके खाते में नहीं जा सका। उसके बाद में सोनिया रानी ने अनामिका शुक्ला द्वारा गी गई बैंक पासबुक की प्रविष्टि देखी तो 18 फरवरी-2020 को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय से 22,000 रुपये की धनराशि क्रेडिट पाई गई। शक होने पर राज्य परियोजना कार्यालय लखनऊ को इस मामले की जानकारी दी गई। उसके बाद अनामिका को बुलाने के लिए कई फोन किए गए लेकिन उसने कॉल रिसीव नहीं किया। 13 मार्च को ही उसने डीसी बालिका शिक्षा को वाट्सएप पर ही अपना त्यागपत्र भेज दिया।
बागपत की तहसील बड़ौत स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में नियुक्त अनामिका प्रकरण के पीछे एक शिक्षा माफिया,गुरुजी का नाम सामने आ रहा है। अनामिका शिक्षा माफिया को गुरुजी नाम से ही पुकारती थी । अनामिका अक्सर मोबाइल पर गुरुजी से बात करती रहती थी। गुरुजी ने विद्यालय में लखनऊ सचिवालय तक अपनी पहुंच होने की बात उसको बताई थी।

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