इतिहासकार विलियम डेलरिम्‍पल अमित शाह के इतिहास दोबारा लिखने से सहमत

लेखक विलियम का कहना है कि ईस्‍ट इंडिया कंपनी ब्रिटेन से थी, लेकिन यह ब्रिटिश तो कतई नहीं थी. ब्रिटेन की सरकार ने पहले बंगाल और फिर पूरे भारत पर शासन नहीं किया. भारत पर एक कंपनी ने शासन किया.
लेखक व इतिहासकार विलियम डेलरिम्‍पल (William Dalrymple) ने ईस्‍ट इंडिया कंपनी (East India Company) के इतिहास की पड़ताल करने वाली अपनी नई किताब ‘The Anarchy’ पर Exclusive बातचीत की. किताब में बताया गया है कि ईस्‍ट इंडिया कंपनी (East India Company) की स्‍थापना के समय पूरी दुनिया की जीडीपी (GDP) में ब्रिटेन (Britain) का योगदान महज तीन फीसदी था, जबकि मुगल शासन (Mughal Empire) की हिस्‍सेदारी 37 फीसदी थी. दूसरे शब्‍दों में कहा जाए तो दुनिया की औद्योगिक ताकत (Industrial Power) के एक तिहाई पर भारत का कब्‍जा था.
कोलकाता. इतिहासकार और लेखक (Historian and Author) विलियम डेलरिम्‍पल (William Dalrymple) ने अपनी नई किताब ‘द अनार्की’ (The Anarchy) में दुनिया की पहली बहुराष्‍ट्रीय कंपनी ‘ईस्‍ट इंडिया कंपनी’ (East India Company) के उभार के बारे में लिखा है. भारत में मुगल शासन (Mughal Empire) के आखिरी दौर में हुई सियासी उठापटक के बाद आई ब्रिटिश कंपनी पर लिखी गई 576 पन्‍नों की उनकी किताब पहले ही बेस्‍टसेलर (Bestseller) हो चुकी है. इस किताब की लाखों प्रतियां बिक चुकी हैं. टाटा स्‍टील कोलकाता लिटरेरी मीट में अपनी किताब को लॉन्‍च करने के लिए कोलकाता पहुंचे विलियम ने बात करते हुए कहा कि मैंने इस किताब के बेस्‍टसेलर होने के बारे में कभी नहीं सोचा था. इस किताब को छह साल पहले मैंने बिना किसी योजना के शुरू कर दिया था.
दुनिया की जीडीपी में भारत का योगदान 37 फीसदी था
‘द अनार्की’ ब्रिटेन से कारोबार करने आई एक कंपनी के मुगल शासकों से सत्‍ता छीन लेने की कहानी है. विलियम का कहना है कि ईस्‍ट इंडिया कंपनी ब्रिटेन से थी, लेकिन यह ब्रिटिश तो कतई नहीं थी. ब्रिटेन की सरकार ने पहले बंगाल (Bengal) और फिर पूरे भारत पर शासन नहीं किया. भारत पर एक कंपनी ने शासन किया. इस कंपनी की स्‍थापना के समय पूरी दुनिया की जीडीपी (GDP) में ब्रिटेन का योगदान महज तीन फीसदी था, जबकि मुगल शासन की हिस्‍सेदारी 37 फीसदी थी. दूसरे शब्‍दों में कहा जाए तो दुनिया की औद्योगिक ताकत (Industrial Power) के एक तिहाई पर भारत का कब्‍जा था. मुगल शासन के दौरान 1756 से 1803 के बीच महज 50 साल में भारत ने औद्योगिक उत्‍पादन के मामले में चीन को पीछे छोड़ दिया था.
साहूकार जगत सेठ के हाथों की कठपुतली था मीर जाफर
ब्रिटिश कंपनी के बंगाल में बैठे 2,000 से कम गोरों ने मारवाड़ी और हिंदू बैंकरों की मदद से 2,00,000 भारतीयों सिपाहियों को भारत पर शासन करने के लिए प्रशिक्षित किया. बंगाल के मुर्शिदाबाद में लोगों को सूद पर पैसे देने वाला एक साहूकार जगत सेठ इस पूरी कहानी का एक अहम किरदार है. विलियम कहते हैं कि भारत में आज भी मीर जाफर को गद्दार कहा जाता है, लेकिन वह जगत सेठ के हाथों की कठपुतली भर था. विलियम से पूछा गया कि क्‍या वह गृह मंत्री अमित शाह के भारत का इतिहास फिर से लिखने के विचार से सहमत हैं तो उन्‍होंने कहा कि अमूमन मैं उनसे सहमत नहीं होता हूं.
विलियम ने कहा कि इतिहास को फिर से लिखे जाने के अमित शाह के विचार से मैं सहमत हूं. मेरा मानना है कि हर पीढ़ी को अपने नजरिये से इतिहास को लिखना ही चाहिए. मेरी किताब में एक जगह बताया गया है कि एक समय ऐसा आया जब ईस्‍ट इंडिया कंपनी दिवालिया होने की कगार पर थी. करीब 30 बैंक की हालत खराब हो गई थी. कंपनी को बेलआउट पैकेज मिल गया. लिहाजा, इस पर किसी ने टिप्‍पणी नहीं की, जबकि उस पीढ़ी ने उससे पहले कभी ऐसा होते हुए नहीं देखा था. ये काफी हद तक 2008-09 के आर्थिक संकट जैसा था. आज हम उसके बारे में पढ़कर सावधान रह सकते हैं. ईस्‍ट इंडिया कंपनी को उबारना ठीक वैसा ही था, जैसे आज सरकार किसी कंपनी को डूबने से बचाने के लिए बेलआउट पैकेज देती है.

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