बड़ा फैसला: सोनिया,राहुल और प्रियंका से एसपीजी सुरक्षा वापस

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को बड़ा फैसला लेते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की एसपीजी (स्पेशल प्रोटेक्शन फोर्स) सुरक्षा हटाने का फैसला लिया है। इन तीनों की एसपीजी सुरक्षा को चरणों में हटाया जाएगा। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद पूरे गांधी परिवार को एसपीजी सुरक्षा कवर देने का फैसला किया गया था। भारत में सुरक्षा की श्रेणी खतरे के स्तर के साथ एक स्टेटस सिंबल भी माना जाता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) की सिफारिश पर हर साल विशिष्ट लोगों की सुरक्षा की समीक्षा करता है। खतरे के स्तर को देखते हुए विशिष्ट और अति विशिष्ट लोगों को विभिन्न स्तर की सुरक्षा दी जाती है।
जानकारी के मुताबिक गृह मंत्रालय की सुरक्षा समीक्षा कमेटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया है। कमेटी की सिफारिश के अनुसार अब गांधी परिवार के सदस्य को एसपीजी के बजाय सीआरपीएफ की जेड प्लस सुरक्षा प्रदान की जाएगी। गृह मंत्रालय की बैठक में गांधी परिवार की सुरक्षा की समीक्षा की गई और पाया गया कि उन्हें बहुत ज्यादा खतरा नहीं है। इस वजह से उनके सुरक्षा इंतजामों को बदलने का फैसला किया गया।
किसी भी व्यक्ति के सामने संभावित खतरे को देखते हुए यह सुरक्षा दी जाती है। सूत्रों के अनुसार उच्च स्तरीय बैठक में यह फैसला लिया गया कि फिलहाल गांधी परिवार को कोई खतरा नहीं है और ऐसे में जेड प्लस की सुरक्षा पर्याप्त होगी। मालूम हो कि गृह मंत्रालय समय-समय पर सुरक्षा कवर को लेकर समीक्षा करता रहता है।
एसपीजी सुरक्षा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गांधी परिवार को एसपीजी की सुरक्षा प्राप्त है। यह सुरक्षा का सबसे ऊंचा स्तर होता है। इसमें तैनात कमांडो के पास अत्याधुनिक हथियार और संचार उपकरण होते हैं।
एसपीजी सुरक्षा अब सिर्फ प्रधानमंत्री के पास :
गांधी परिवार की एसपीजी सुरक्षा हटाने के फैसले के बाद अब सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास ही एसपीजी सुरक्षा रहेगी। वर्तमान में भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गांधी परिवार को ही एसपीजी की सुरक्षा प्राप्त थी।
जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा
स्पेशल प्रोटक्शन ग्रुप की सुरक्षा के बाद जेड प्लस भारत की सर्वोच्च सुरक्षा श्रेणी है। इस श्रेणी में संबंधित विशिष्ट व्यक्ति की सुरक्षा में 36 जवान लगे होते हैं। इसमें 10 से ज्यादा एनएसजी कमांडो के साथ दिल्ली पुलिस, आईटीबीपी या सीआरपीएफ के कमांडो और राज्य के पुलिसकर्मी शामिल होते हैं।
मनमोहन की सुरक्षा भी हटाई जा चुकी
इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सुरक्षा से भी एसपीजी कवर हटाकर सीआरपीएफ की जेडप्लस श्रेणी की सुरक्षा दी गई थी।
कांग्रेस ने किया विरोध
कांग्रेस ने केंद्र सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने एक टीवी चैनल से बात करते हुए कहा कि यह निर्णय राजनीतिक बदले की भावना से लिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है।
पिछले कई दौरों का हवाला
सूत्रों के अनुसार बैठक में एसपीजी अधिकारियों की कई रिपोर्ट को पेश किया गया। इन रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि गांधी परिवार से कई बार कहने के बावजूद वे विदेश दौरों पर अपने साथ एसपीजी सुरक्षा नहीं ले गए। इसका मतलब कि उन्हें एसपीजी सुरक्षा की जरूरत नहीं है।
एसपीजी सुरक्षा और जेड प्लस सुरक्षा में क्या है अंतर
ह सुरक्षा का सबसे ऊंचा स्तर है। इस सुरक्षा में तैनात कमांडों के पास आधुनिक हथियार व उपकरण होते हैं। एसपीजी के बाद जेड प्लस भारत की सर्वोच्च सुरक्षा श्रेणी है। व्यक्ति की सुरक्षा में 36 जवान लगे होते हैं। इसमें 10 से ज्यादा एनएसजी कमांडो के साथ दिल्ली पुलिस, आईटीबीपी या सीआरपीएफ के कमांडो और राज्य के पुलिसकर्मी शामिल होते हैं।
कब हुआ एसपीजी का गठन
एसपीजी (विशेष सुरक्षा दल) का गठन 2 जून, 1988 में भारत की संसद के एक अधिनियम द्वारा बनाया गया था। इसका मुख्यालय दिल्ली में है। एसपीजी के लिए जवानों का चयन पुलिस, अर्धसैनिक बल से किया जाता है। यह गृह मंत्रालय के अधीन होती है।

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