कांवड़ रोके,हरिद्वार सीमा से लौटाये पांच हजार से ज्यादा वाहन

उत्तराखंड › कड़ी सुरक्षा के बीच सावन माह की शुरुआत, हरकी पैड़ी और हरिद्वार की सीमाओं पर भारी पुलिस बल रहा तैनात
कड़ी सुरक्षा के बीच सावन माह की शुरुआत, हरकी पैड़ी और हरिद्वार की सीमाओं पर भारी पुलिस बल रहा तैनात हरिद्वार :सोमवार को कड़ी सुरक्षा के बीच सावन माह की शुरुआत हो गई। कांवड़िये हरिद्वार न पहुंच सके इसके लिए पुलिस ने भी अपनी कमर कस ली है।
हरिद्वार की सीमा पर पीएसी और सिविल पुलिस के अलावा थाने और कोतवाली की फोर्स को तैनात कर दिया है। उधर हरकी पैड़ी तक बैरिकेट्स लगाने के साथ ही पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है।
सोमवार से सावन माह की विधिवत शुरुआत हो चुकी है। हरिद्वार में इस माह करोड़ों कांवड़िये मां गंगा में स्नान कर अपनी कांवड़ उठाते थे।
कोरोना महामारी के कारण इस बार सरकार ने कांवड़ मेले को रद किया है। शिवभक्त इस बार मेले में हरिद्वार नहीं आ पाएंगे। इस लिहाज से कोई बाहरी व्यक्ति जिले की सीमा में प्रवेश न कर पाए पुलिस को सीमा को सील करना पड़ा है।
सोमवार को काफी संख्या में लोग हरिद्वार की सीमा पर पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उनको वापस लौटा दिया। एसपी सिटी कमलेश उपाध्याय ने बताया कि किसी भी कांवड़िये को हरिद्वार नहीं आने दिया जाएगा। सीमा पर सख्ती के अलावा हरकी पैड़ी पर अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है।
कांवड़ यात्रा 2020: यूपी-उत्तराखंड बॉर्डर एरिया सील, करीब पांच हजार वाहनों को लौटाया
बॉर्डर पर पुलिस
इस बार सावन माह में नहीं होंगे नीलकंठ के दर्शन
पैम्फ्लेट लेकर दिल्ली, पंजाब, हरियाणा रवाना हुए पुलिस कर्मी
कोरोना के चलते इस साल उत्तर भारत की सबसे बड़ी आध्यात्मिक कांवड़ यात्रा स्थगित कर दी गई है। रविवार को गुरु पूर्णिमा के दिन भी पुलिस ने उत्तराखंड और यूपी की सीमाओं पर सख्ती का रिहर्सल किया। हरिद्वार आने वाले हजारों लोगों को राज्य में प्रवेश नहीं करने दिया गया। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर हरिद्वार रुड़की और ऋषिकेश में अपने गुरुजनों की पूजा कर उनसे आशीर्वाद लेने आए करीब पांच हजार वाहनों को पुलिस ने बॉर्डर से ही लौटा दिया।
रविवार को गुरु पूर्णिमा का पर्व होने के चलते सुबह से ही रुड़की, हरिद्वार और ऋषिकेश आदि स्थानों पर स्थित आश्रमों और अखाड़ों में जाने वालों की भारी भीड़ बॉर्डर पर उमड़ने लगी थी।
गुरु पूर्णिमा पर हर साल देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालुओं का हरिद्वार आवागमन होता है जो गंगा स्नान करने के साथ ही विभिन्न आश्रमों में पहुंचकर अपने गुरु की पूजा करने के साथ ही उनसे आशीर्वाद भी प्राप्त करते हैं, लेकिन इस बार लॉकडाउन के चलते पुलिस ने सुबह से ही सख्ती कर दी थी।
पुलिस प्रशासन ने उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बॉर्डर आज से ही पीएसी के हवाले कर दिए हैं। भगवानपुर में मंडावर और मंगलौर में नारसन और लक्सर में पुरकाजी और बालावाली का बॉर्डर सील कर दिया गया है। सभी रास्तों पर पुलिस तैनात कर दी गई है।

साथ ही अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है। एसपी देहात एसके सिंह ने बताया कि सभी को सख्त हिदायत दी गई है कि किसी भी सूरत में कोई भी कांवड़िया उत्तराखंड में प्रवेश न करने पाए।
हरकी पैड़ी पर कांवड़ियों की एंट्री बैन
हरकी पैड़ी पर कांवड़ियों की एंट्री रोकने के लिए हरिद्वार कोतवाली पुलिस ने कमर कस ली है। हरकी पैड़ी के संपर्क मार्गों पर बैरिकेडिंग करते हुए चाक चौबंद इंतजाम किए गए हैं। हालांकि अस्थि विसर्जन के लिए आ रहे यात्रियों को रोका नहीं जाएगा। सोमवार से कांवड़ यात्रा शुरू होने जा रही है। कांवड़ियों को रोकने के लिए जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों पर विशेष इंतजाम किए गए हैं, लेकिन फिर भी यदि कोई आंख बचाकर यहां आ पहुंचता है तो उसे कांवड़ ही नहीं उठाने दी जाएगी।
हरकी पैड़ी पहुंचकर ही कांवड़िए कांवड़ उठाते हैं। इस बार कांवड़ बाजार भी नहीं सज रहा है। कोतवाली प्रभारी अमरजीत सिंह ने बताया कि पोस्ट ऑफिस तिराहा, भीमगोडा चेकपोस्ट, संजय पुल, शिवपुल, हाथी पुल व विष्णु घाट पुल पर पुलिस की तैनाती कर दी गई है। बाकायदा बैरीकेटिंग लगा दिए गए हैं। किसी को भी हरकी पैड़ी नहीं पहुंचने दिया जाएगा। जो व्यक्ति अस्थि विसर्जन करने आ रहे हैं, उन्हें जाने दिया जाएगा।
कांवड़ यात्रा 2020: चप्पे-चप्पे पर पुलिस, फिर भी चकमा देकर संपर्क मार्गों से उत्तराखंड पहुंच गए सैकड़ों लोग, तस्वीरें…
उत्तराखंड-यूपी बॉर्डर पर सख्ती के बीच बाहरी प्रदेशों से बिना अनुमति के आने वालों ने संपर्क मार्गों के सहारे पुलिस के दावों में सेंध लगा दी है। सोमवार को सैकड़ों लोग इन संपर्क मार्गों से होकर उत्तराखंड की सीमा में दाखिल होकर सीधे भगवानपुर पहुंच गए।
क्षेत्र में दो दर्जन से भी ज्यादा संपर्क मार्ग हैं, जो खेतों और गांवों के बीच से होते हुए उत्तराखंड को उत्तर प्रदेश से जोड़ते हैं। कांवड़ यात्रा पर प्रतिबंध लगने के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन ने बॉर्डर के साथ ही संपर्क मार्गों पर पुलिस तैनात करने का दावा किया था, जो सोमवार को फेल साबित हुआ। बॉर्डर पर सख्त चेकिंग देख सैकड़ों लोग अपने वाहनों से बड़कलां, हसनपुर, झबरेड़ा, तेज्जूपुर, फकरेड़ी और क्वांटम कॉलेज होकर पुलिस से नजर बचाकर सीधे भगवानपुर पहुंचने में सफल रहे।
ऐसे में संपर्क मार्गों, जंगल के चोर रास्तों पर चेकिंग के पुलिस के दावे पर सवाल उठ रहे हैं। आशंका यह भी जताई जा रही है कि कांवड़िए भी इन्हीं रास्तों से होकर आसानी से हरिद्वार पहुंच सकते हैं। उधर, एसपी देहात एसके सिंह भी मानते हैं सोमवार को पहला दिन था, इसलिए हो सकता है कि कहीं व्यवस्था में चूक रह गई हो। उनका कहना है कि मंगलवार को संपर्क मार्गों पर पुलिस तैनात कर बाहरी लोगों को हर हाल में प्रदेश की सीमा में दाखिल होने से रोका जाएगा।
कांवड़ यात्रा के मद्देनजर सप्तऋषि सीमा पर भी चौकसी बढ़ा दी गई है। देहरादून से होकर कांवड़िए यहां न पहुंच जाए, इसलिए यह व्यवस्था की गई है। नगर पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय ने बिलकुल भी लापरवाही न बरतने की सख्त हिदायत अधीनस्थों को दी है। जिले के अधिकांश बॉर्डर देहात क्षेत्र में है।
श्यामपुर क्षेत्र में चिड़ियापुर एवं लाहडपुर सीमावर्ती क्षेत्र हैं, लिहाजा वहां पहले से पुलिस फोर्स की पर्याप्त तैनाती की गई है, लेकिन देहरादून होते हुए कांवड़िए यहां न पहुंच जाएं, इसे लेकर भी हरिद्वार पुलिस सतर्क है। नगर पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय ने इस बिंदु को देखते हुए सप्तऋषि चौकी पुलिस को पूरी तरह से अलर्ट रहने के निर्देश दिए है।
कहा है कि दून से आ रहे हर चौपहिया वाहन को चेक कर लिया जाए। वाहन चालक से यह भी जान लिया जाए कि वह कहां से आ रहा है और कहां जा रहा है। उन्होंने बताया कि सप्तऋषि चौक पर चौकसी बढ़ा दी गई है। श्यामपुर पुलिस को भी सतर्क रहने को कहा गया है।
पैम्फ्लेट लेकर दिल्ली, पंजाब, हरियाणा रवाना हुए पुलिस कर्मी
कांवड़िए हरिद्वार ना आ सकें इसके लिए पुलिस प्रशासन बहुचक्रीय रणनीति बना रहा है। पुलिस प्रशासन की कई टीमें ऐसे पैम्फ्लेट लेकर यूपी, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा, राजस्थान आदिराज्यों में भेजे गए हैं। इन पैम्फ्लेट पर लिखा गया है कि कोरोना के संक्रमण के चलते ज्यादा भीड़ एकत्र होने पर संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है, इसलिए कांवड़ियों का प्रवेश प्रतिबंधित किया गया है।

सीमावर्ती गांव के लोगों से भी मांगा जा रहा सहयोग
उत्तराखंड के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सीमावर्ती गांव के लोगों से भी कांवड़ यात्रा को लेकर सहयोग मांगा है। लक्सर के एसडीएम पूरन सिंह राणा, भगवानपुर के एसडीएम संतोष कुमार पांडे के अनुसार दोनों तरफ से लोगों से संपर्क साधकर कांवड़ियों की रोकथाम के लिए सहयोग मांगा जा रहा है। सीओ मंगलौर अभय प्रताप सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती थानों की पुलिस से भी संपर्क करके कांवड़ियों को रोकने के लिए कहा गया है।
इस बार सावन माह में नहीं होंगे नीलकंठ के दर्शन
कोविड19 की गंभीरता को देखते हुए इस वर्ष सावन माह में मणिकूट पर्वत में स्थित विश्वप्रसिद्ध नीलकंठ मंदिर श्रद्धालुओं के लिए नहीं खोला जाएगा। वहीं ऋषिकेश और आसपास क्षेत्रों के शिवालयों में स्थानीय लोग जलाभिषेक कर सकेंगे।

आज इस वर्ष के सावन माह का पहला सोमवार है। आज के दिन प्रतिवर्ष सावन माह में लाखों की संख्या में शिवभक्त नीलकंठ मंदिर में जलाभिषेक करने के लिए पहुंचते हैं। ऋषिकेश समेत रामझूला और लक्ष्मणझूला क्षेत्र कांवड़ियों से भरा रहता है। मंदिर के मुख्य पुजारी शिवानंद गिरी महाराज ने बताया कि समिति ने कोरोना महामारी को देखते हुए मंदिर को न खोलने का निर्णय लिया है।

वीरभद्र और सोमेश्वर मंदिर में होंगे दर्शन
स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए वीरभद्र और सोमेश्वर मंदिर जलाभिषेक किया जा सकेगा। इस दौरान श्रद्धालुओं को सोशल डिस्टेंसिंग पालकर करना होगा। वहीं, चंद्रेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं का प्रवेश नहीं हो पाएगा। खासकर सोमवार के दिनों में मंदिर समिति के सदस्य ही मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे। मंदिर के महंत अखिलेश भारती ने बताया कि कोविड19 की गंभीरता को देखते हुए मंदिर को आमजन के प्रवेश के लिए बंद रखा गया है।

प्रशासन की ओर से जारी नियमों के अनुसार ही मंदिरों में श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे। मंदिर में दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को सोशल डिस्टेंसिंग आदि नियमों का पालन करना अति आवश्यक है।
वरुण चौधरी, एसडीएम ऋषिकेश

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