नये दिशानिर्देशों में उत्तराखंड में जोन सिस्टम खत्म, दूसरे राज्य से आने वालों को सिर्फ पंजीकरण जरूरी

प्रदेश सरकार ने नई गाइडलाइन जारी कर दी है. उत्तराखंड में 9 जून से अन्य राज्यों से आवाजाही को सुगम बनाया गया है. जोन सिस्टम खत्म कर दिए गए है.
देहरादून: प्रदेश सरकार ने राज्य में 9 जून से नई गाइडलाइन जारी कर दी है.इसमें राज्य से बाहर के लिए गतिविधि शुरू हो गई हैं. जिलों में जोन व्यवस्था खत्म कर दी गया है. साथ ही कोविड-19 के खतरे के मद्देनजर प्रदेश में 55 कंटेनमेंट एरिया बनाए गए हैं.
उत्तराखंड सरकार की अनलॉक-1 के अंतर्गत नई गाइडलाइन के मुताबिक,अब दूसरे राज्यों से उत्तराखंड आने वालों को पास की जरूरत नहीं होगी.उन्हें केवल खुद का रजिस्ट्रेशन प्रदेश सरकार के वेब पोर्टल पर कराना होगा.सरकार ने मुंबई और दिल्ली के सभी जिलों के अलावा अन्य राज्यों के 29 ऐसे जिलों की सूची जारी की है,जिन्हें संक्रमण के लिहाज से संवेदनशील माना गया है.यहां से आने वालों को 7 दिन संस्थागत और 14 दिन होम क्वारंटाइन में रहना अनिवार्य होगा.राज्य के अंदर जिलों में जाने के लिए किसी भी पास या परमिशन की जरूरत नहीं है.लेकिन सभी को वेब पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा.साथ ही उन्हें क्वारंटाइन होने की जरूरत नहीं.सरकार ने आर्मी और अर्धसैनिक बलों के कर्मचारियों के लिए क्वारंटाइन के नियम भी बनाए हैं.जिसमें आर्मी,नेवी और एयरफोर्स अपने कर्मचारियों और उनके परिजनों को 7 दिन के लिए संस्थागत क्वारंटाइन करने की व्यवस्था करेगी.उसके बाद 14 दिन उन्हें उनके घरों में होम क्वारंटाइन किया जाएगा.अनलॉक-1 में केंद्र सरकार के निर्देश पर अब राज्य सरकार भी लॉकडाउन में लगातार छूट प्रदान कर रही है.उत्तराखंड सरकार ने अनलॉक-1 में जिलों को जोन से बाहर कर दिया है.अब कोई भी जिला रेड,ऑरेंज या ग्रीन जोन में नहीं है.अब एक जिले से दूसरे जिले में आने-जाने के लिए पास की व्यवस्था को भी सरकार ने समाप्त कर दिया है.अब केवल रजिस्ट्रेशन करना जरूरी होगा.अब प्रदेश में 55 कंटेनमेंट जोन हो गए हैं.नैनीताल जिला जो रेड जोन में था,उसे रेड जोन से हटा दिया गया है.
उत्तराखंड आने-जाने के लिए अब जरूरी नहीं होगा पास
उत्तराखंड सरकार बाहर से आने वालों के लिए अब पास व्यवस्था खत्म करने जा रही है। एहतियात के तौर पर अब इनका सिर्फ रिकॉर्ड ही रखा जाएगा, ताकि कोरोना का पॉजिटिव केस पाए जाने पर ट्रैसिंग में आसानी रहे।
सचिवालय मीडिया सेंटर में पत्रकारों के सवालों के जवाब में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अभी देश के 75 शहरों से उत्तराखंड आने वालों को सात दिन संस्थागत व 14 दिन होम क्वारंटाइन अनिवार्य है। वहीं अन्य शहरों से आने वालों को 14 दिन होम क्वारंटाइन रहना होगा। कहा कि धीरे-धीरे 75 शहरों की संख्या में भी कमी आएगी, अफसर लगातार इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जल्द ही पास व्यवस्था को खत्म करने के आदेश किए जाएंगे। राज्य के भीतर सरकार पहले ही पास व्यवस्था को खत्म कर चुकी है। सिर्फ ऑनलाइन आवेदन ही पास के रूप में मान्य है।

टूरिस्टों के लिए खोले गए होटल
एक सवाल के जबाव में मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य में होटल,लॉज और होम स्टे टूरिस्टों के लिए खोले गए हैं। लॉकडाउन के दौरान राज्य सरकार को अन्य प्रांतों से ऐसी जानकारी मिली कि घनी आबादी में रहने वाले लोग कुछ वक्त को उत्तराखंड आना चाहते हैं। लिहाजा सरकार ने सोच-समझकर ही यह फैसला लिया कि जो टूरिस्ट आएंगे वे होटलों व होम स्टे में कम से कम सात दिन तक रहेंगे। पर्यटन व सार्वजनिक स्थलों पर उनकी आवाजाही नहीं होगी।
मॉल व धार्मिक स्थलों में कड़ाई से नियम लागू होंगे
मुख्य सचिव उत्पल ने बताया कि शॉपिंग मॉल,होटल,धार्मिक स्थल खुलने के बाद इनमें गाइड लाइन का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। सभी जिलाधिकारियों को इस बाबत आदेश दे दिए गए हैं। इन स्थानों पर फिजीकल डिस्टेंसिंग,सफाई, सेनेटाइजेशन और मॉस्क की अनिवार्यता रहेगी। अगर कोई इसका पालन नहीं करता तो फिर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
नैनीताल के होटल खुलने को लेकर संशय बरकरार, राज्य सरकार की एडवायजरी से सहमत नही होटल कारोबारी
गाइडलाइंस से नैनीताल के होटल व्यवसायी सहमत नहीं
रोना संक्रमण का भय और राज्य सरकार की जारी एडवाइजरी से नैनीताल के होटल खुलने को संशय बना हुआ है। जारी गाईड लाइन में नैनीताल आने वाले सैलानियों के लिए बनाए नियम बनाये गए हैं,उनसे होटल कारोबारी सहमत नही हैं। इसके अलावा क्वारन्टीन के लिए प्रशासन द्वारा लिए होटलों को भी अभी तक रिलीज नही किया गया है। जिस कारण लगता है कि आने वाले कुछ दिन यंहा के होटल शायद न खुल पाएं। इधर ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन के करीब 20 दिन शेष रह गए है। इस बीच नगर में सैलानियों की आमद नही हुई तो पर्यटक विहीन नैनीताल इतिहास में दर्ज हो जाएगा।
15 हजार नए जॉब कार्ड
मुख्य सचिव ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान राज्य में मनरेगा में 3,07,451 श्रमिकों को रोजगार मिला है। मनरेगा में 21,816 काम चल रहे हैं। 15,000 प्रवासियों ने भी जॉब कार्ड बनाएं हैं। इनमें 11,000 को रोजगार मिल चुका है। मुख्यसचिव ने बताया कि लॉकडाउन के उल्लंघन में प्रदेशभर में अब तक 29,737 लोगों की गिरफ्तारी हुई जबकि 7,977 वाहनों को सीज किया गया। जुर्माना के एवज में तीन करोड़ 35 लाख रुपये वसूला जा चुका है।

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