आपदा में अवसर: दादी की मामी शीला कौल के लावारिस पड़े बंगले में शिफ्ट होंगी प्रियंका

लखनऊ में अब इस बंगले को अपना आशियाना बनाएंगी प्रियंका गांधी, सजाने-संवारने का काम शुरू, तस्वीरें
कांग्रेस महासचिव और पार्टी की उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा का स्थायी पता अब 23/2 गोखले मार्ग, लखनऊ होगा। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय शीला कौल की इस कोठी को नए सिरे से सजाया-संवारा जा रहा है। कांग्रेसियों का कहना है कि यह प्रियंका से दिल्ली का सरकारी आवास खाली कराने का नोटिस देने वाली भाजपा सरकार को उचित जवाब भी है। हालांकि, लखनऊ आने पर प्रियंका पहले भी इस आवास का ठहरने के लिए इस्तेमाल करती रही हैं।

कांग्रेस हाईकमान का मानना है कि प्रियंका की राजनीति में बढ़ती सक्रियता से केंद्र सरकार ने उनसे दिल्ली का सरकारी आवास खाली करने का नोटिस दिलवाया है। स्थानीय कांग्रेसियों की मानें तो अब प्रियंका अपना ज्यादातर समय लखनऊ में बिताएंगी। पार्टी को मजबूत करने के लिए ऐसा जरूरी माना जा रहा है। इस कोठी को नए सिरे से प्रियंका के लिए ठीक किया जा रहा है।
इंदिरा गांधी की मामी के घर में शिफ्ट होंगी प्रियंका,लखनऊ के इस घर में जनवरी से चल रहा मरम्मत का काम पूरा
पूर्व केंद्रीय मंत्री शीला कौल का लखनऊ के हजरत गंज में बंगला है। प्रियंका के रहने के लिए इसी बंगले की मरम्मत की गई है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री शीला कौल का लखनऊ के हजरत गंज में बंगला है। प्रियंका के रहने के लिए इसी बंगले की मरम्मत की गई है।
लखनऊ के हजरतगंज में शीला कौल का बंगला है, प्रियंका अपने पिछले दौरों पर इसी घर में रुकी थीं।
अब उत्तर प्रदेश में अपना राजनीतिक बेस कैंप बनाएंगी प्रियंका ।उनके करीबी सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है। प्रियंका जल्द ही लखनऊ के हजरतगंज में गोखले मार्ग स्थित घर में रहने आएंगी। यह घर इंदिरा गांधी की मामी शीला कौल का है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री शीला कौल प्रसिद्ध वनस्पति वैज्ञानिक प्रोफेसर कैलाश नाथ कौल की पत्नी थीं। सालों से गोखले मार्ग पर स्थित कौल का बंगला बंद पड़ा है। हालांकि, अभी यह जानकारी नहीं दी गई है कि प्रियंका लखनऊ कब शिफ्ट होंगी। लोकसभा चुनाव के दौरान प्रियंका को पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी दी गई तो प्रियंका अपने पिछले तीन लखनऊ दौरों पर इसी घर में रुकी थीं।
इस घर में महात्मा गांधी भी कई बार आए थे।

एक महीने में खाली करना है दिल्ली का घर

दिल्ली के लुटियन जोन स्थित लोदी एस्टेट के सरकारी बंगले को वापस लेने का पत्र केंद्र सरकार ने प्रियंका गांधी को भेजा है। केंद्र सरकार का कहना है कि एसपीजी सिक्योरिटी मिलने की वजह से ही उनको यह बंगला अलॉट किया गया था, लेकिन अब एसपीजी सुरक्षा वापस ले ली गई है। लिहाजा, उनको यह बंगला एक महीने के भीतर खाली करना होगा। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद प्रियंका को यह बंगला अलाॅट किया गया था।कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी विधानसभा चुनाव के बाद से ही यूपी में काफी सक्रिय हैं।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हैं प्रियंका
कोरोना संकट की शुरुआत होने के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी अपने पत्रों, ट्वीट और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए योगी सरकार के सामने सवाल उठाए थे। 1000 बसों के विवाद में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू को जेल भेजने के बाद से प्रियंका यूपी की राजनीति में और सक्रिय हो गईं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पहले भी कर चुके हैं मांग
पार्टी के वरिष्ठ नेता पहले भी प्रियंका को उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने का समर्थन कर चुके हैं। अजय कुमार लल्लू ने कहा कि हर कांग्रेसी का यही मानना है कि प्रियंका को लखनऊ आकर मोर्चा संभालना चाहिए, हालांकि आखिरी फैसला उन्हें ही लेना है। एक और वरिष्ठ कांग्रेस लीडर पीएल पुनिया ने भी प्रियंका के इस फैसले का समर्थन किया है।

कुछ कांग्रेसियों का यह भी कहना है कि लोकसभा चुनाव के वक्त ही प्रियंका ने यह निर्णय ले लिया गया था कि ज्यादा वक्त लखनऊ और उत्तर प्रदेश को देना है। इसलिए इसे प्रियंका को दिल्ली में सरकारी आवास खाली करने के नोटिस से जोड़कर देखना उचित नहीं है

एमएलसी दीपक की देख-रेख में हो रहा काम
प्रियंका के लिए इस कोठी को ठीक करने और सजाने-संवारने की जिम्मेदारी कांग्रेस के विधान परिषद दल के नेता दीपक सिंह को दी गई है। वे यहां लगातार मौजूद रहकर काम करवा रहे हैं। हालांकि इस बाबत कुछ पूछने पर वे चुप हो जाते हैं। दीपक ने इतना जरूर कहा कि दिल्ली में प्रियंका गांधी को मकान खाली करना है। इसलिए अब उनका स्थायी पता लखनऊ की यही कोठी होगी।

राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रही कोठी
शीला कौल देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के साले प्रोफेसर कैलाशनाथ कौल की पत्नी थीं। कांग्रेस सरकार में उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं थीं। कई मायनों में उनकी यह कोठी काफी ऐतिहासिक है।


यहां प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी रुके हैं। उन्होंने यहां 1936 में वट वृक्ष भी लगाया। यह कोठी आजादी के आंदोलन के समय भी राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रही है। यही वजह है कि प्रियंका के सक्रिय राजनीति में आने के बाद इस कोठी को उनके लिए उपयुक्त माना गया।

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