अब भी फंसा है सरकार गठन का पेंच, बन रही हैं ये पांच संभावनाएं

महाराष्ट्र में भाजपा -शिवसेना में खींचतान जारी
बीजेपी-शिवसेना (Shiv Sena) में जारी खींचतान के बीच महाराष्ट्र (Maharashtra) के मौजूदा राजनीतिक हालात में नई सरकार के गठन को लेकर पांच संभावनाएं बन रही हैं. आइए जानते हैं क्या है ये संभावनाएं:-
मुंबई. महाराष्ट्र में सत्ता हासिल करने के लिए भाजपा , शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के बीच जंग जारी है. एक तरफ शिवसेना (Shiv Sena) 50-50 फॉर्मूले पर अड़ी हुई है. दूसरी ओर बीजेपी किसी भी हाल में मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं छोड़ना चाहती. उधर, कांग्रेस भी विधायक जुटाने में लगी है, जबकि एनसीपी ने साफ कहा है कि अगर शिवसेना भाजपा से गठबंधन खत्म कर दे, तो दूसरे राजनीतिक विकल्पों पर विचार किया जा सकता है. इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल है कि सरकार कैसे बनेगी?
दरअसल, महाराष्ट्र के मौजूदा राजनीतिक हालात में नई सरकार के गठन को लेकर 5 संभावनाएं बन रही हैं. आइए जानते हैं क्या है ये 5 संभावनाएं:-

संभावना नंबर 1:-
>> पहली स्थिति में भाजपा के देवेंद्र फडणवीस पहले ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री हो सकते हैं. हालांकि, 50-50 फॉर्मूले में शिवसेना से कोई नेता अगले ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद पर काबिज हो सकता है.
>>इस फॉर्मूले में उप मुख्यमंत्री का पद भी शिवसेना के पास जा सकता है. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे उप मुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं.
>> नई सरकार में शिवसेना के 18 मंत्री हो सकते हैं. इनमें से 9 को कैबिनेट में जगह मिल सकती है.
>>इसके अलावा शिवसेना ये भी चाहती है कि राज्य में 40 फीसदी मंत्री शिवसेना का हो और दिल्ली में भी मोदी सरकार में शिवसेना के मंत्रियों की संख्या बढाई जाए. ऐसा भाजपा चाहती है.

संभावना नंबर 2 :-
>>दूसरी स्थिति में भाजपा को बड़ा भाई मानते हुए शिवसेना को कई त्याग कर सकती है. ऐसे में फडणवीस पूरे पांच साल के लिए मुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं. ऐसा होने की स्थिति में उप मुख्यमंत्री का पद शिवसेना को मिल सकता है.
>>इस त्याग के रिटर्न गिफ्ट के तौर पर भाजपा बड़ा दिल दिखाते हुए म्युनिसिपल कॉरपोरेशन और बीएमसी चुनावों में शिवसेना को आगे कर सकती है. यानी भाजपा बीएमसी चुनाव नहीं लड़ने का फैसला कर सकती है.

संभावना नंबर 3 :-
>>तीसरी संभावना हॉर्स ट्रेडिंग की बन रही है. अगर शिवसेना से कोई बात नहीं बनी, तो सबसे ज्यादा सीटें जीतने के कारण भाजपा अकेले अपने दम पर सरकार बनाने के लिए आगे आ सकती है. बाद में वह फ्लोर टेस्ट देकर बहुमत साबित कर सकती है.
>>ऐसे में जरूरी है कि निर्दलीय विधायक भाजपा के साथ आ जाए. या फिर शिवसेना के बागी और असंतुष्ट विधायक भाजपा का दामन थाम ले. इसके पहले कर्नाटक में भाजपा की तरफ से हॉर्स ट्रेडिंग की कोशिश हो चुकी है.
>>इस केस में भी देवेंद्र फडणवीस पूरे पांच साल के लिए मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं. ऐसे में उप मुख्यमंत्री के पद की जरूरत भी नहीं होगी.

संभावना नंबर 4 :-
>>चौथी और आखिरी संभावना शिवसेना कांग्रेस-एनसीपी के बाहरी समर्थन से सरकार बनाने की बन सकती है. तीनों को मिलाकर 154 सीटें होती हैं जो बहुमत से 9 ज्यादा है. इस केस में सुभाष देसाई या एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री हो सकते हैं.
>>अगर शिवसेना कांग्रेस-एनसीपी के समर्थन से सरकार बनाती है, तो ऐसी स्थिति में राज्य में दो उप मुख्यमंत्री होंगे.
>>आदित्य ठाकरे का उप मुख्यमंत्री बनना तय है, जबकि एनसीपी से अजीत पवार या जयंत पाटिल को उप मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. वहीं, एनसीपी को कई विभाग दिए जा सकते हैं.

संभावना नंबर 5 :-
>>पांचवां विकल्प है भाजपा और एनसीपी मिलकर सरकार बना लें. दोनों को मिलाकर 159 सीटें होती हैं जो बहुमत से 14 सीटें अधिक है.
>> असल में एनसीपी और भाजपा का नजदीक आना कोई बड़ी बात नहीं हो सकती है. कई बार दोनों के बीच रणनितिक साझेदारी हो चुकी है.


संजय राउत के साथ शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे
भाजपा को दिया 48 घंटे का वक्त
सरकार के गठन पर भाजपा और शिवसेना के बीच महाराष्ट्र की राजनीति में अगले 48 घंटे बेहद अहम रहने वाले हैं. ख़बर है कि भाजपा की ओर से बातचीत की पहल बंद होने के बाद शिवसेना ने 48 घंटे और इंतज़ार करने का फैसला किया है. जिसके बाद महाराष्ट्र में सरकार के गठन पर शिवसेना प्लान B पर काम शुरू कर सकती है. जिसके तहत शिवसेना और एनसीपीमिलकर सरकार बना सकते हैं, जबकि कांग्रेस इस सरकार को बाहर से समर्थन दे सकती है. ऐसे में माना जा रहा है कि शिवसेना की ओर से जल्द ही कोई बड़ा ऐलान हो सकता है.
विधानसभा में किसको कितनी सीटें?
महाराष्ट्र की 288 सीटों वाले विधानसभा में भाजपा को 105, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54, कांग्रेस को 44 और अन्य को 29 सीटें मिली हैं. सरकार बनाने के लिए बहुमत का आकंड़ा 146 है. इस तरह से भाजपा-शिवसेना गठबंधन के पास बहुमत के आंकड़े हैं, लेकिन मुख्यमंत्री पद और 50-50 फॉर्मूले पर बात नहीं बन पाने के कारण अभी तक नई सरकार का गठन नहीं हो पाया है.

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