बिग बाजार, फ़ूड बाजार का अधिग्रहण, रिटेल बिजनेस में भी रिलायंस बेताज बादशाह

बिग बाजार, फूड बाजार पर अब रिलायंस का कब्जा, 24713 करोड़ में डील फाइनल
इस डील के बाद फ्यूचर ग्रुप की रीटेल और होलसेल बिजनस रिलायंस रीटेल ऐंड फैशन लाइफस्टाइल लिमिटेड (RRFLL) के अंतर्गत आ जाएगी। RRFLL रिलायंस रीटेल वेंचर्स लिमिटेड (RRVL) की पूर्ण रूप से मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी कंपनी है।

नई दिल्ली: रिलायंस इंडस्ट्रीज की सब्सिडियरी कंपनी रिलायंस रीटेल वेंचर्स लिमिटेड (RRVL) ने प्रेस रिलीज जारी कर कहा कि वह फ्यूचर ग्रुप की रीटेल ऐंड होलसेल बिजनस और लॉजिस्टिक्स ऐंड वेयरहाउसिंग बिजनस का अधिग्रहण करने जा रही है। इस डील के साथ ही बिग बाजार, फूड बाजार, ई-जोन और अन्य रीटेल बिजनस रिलायंस की हो गई। यह डील 24713 करोड़ में फाइनल हुई है। इस डील के बाद भारत के रीटेल बिजनस में रिलायंस बेताज बादशाह बन गई है।

फ्यूचर ग्रुप के रीटेल बिजनस में बिग बाजार, फूड बाजार, सेंट्रल, ब्रैंड फैक्ट्री और होम टाउन शामिल है। रिलायंस का रीटेल बिजनस Reliance Retail के नाम से है।
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इस डील के बाद फ्यूचर ग्रुप की रीटेल और होलसेल बिजनस रिलायंस रीटेल ऐंड फैशन लाइफस्टाइल लिमिटेड (RRFLL) के अंतर्गत आ जाएगी। RRFLL रिलायंस रीटेल वेंचर्स लिमिटेड (RRVL) की पूर्ण रूप से मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी कंपनी है। वहीं फ्यूचर ग्रुप के लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग बिजनस पर रिलायंस रीटेल वेंचर्स लिमिटेड (RRVL)का कब्जा होगा।
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रिलायंस रीटेल ऐंड फैशन लाइफस्टाइल लिमिटेड (RRFLL) मर्जर के बाद बड़े पैमाने पर फ्यूचर एंटरप्राइजेज लिमिटेड में निवेश भी करेगी। वह 1200 करोड़ प्रेफरेंशियल इश्यू के जरिए निवेश करेगी और फ्यूचर एंटरप्राइजेज लिमिटेड में 6.09 फीसदी हिस्सेदारी खरीदेगी। इसके अलावा वह 400 करोड़ इक्विटी वारंट के रूप में निवेश करेगी। कुल मिलाकर RRFLL के पास 7.05 फीसदी हिस्सेदारी होगी।
ईशा अंबानी ने क्या कहा?
रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड की निदेशक ईशा अंबानी ने कहा: ” फ्यूचर ग्रुप के प्रसिद्ध ब्रांडों के साथ-साथ उसके व्यावसायिक ईको सिस्टम को संरक्षित करने में हमें प्रसन्नता होगी। भारत में आधुनिक रिटेल के विकास में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हमे आशा है कि छोटे व्यापारियों, किराना स्टोर्स और बड़े उपभोक्ता ब्रांडों की सहभागिता के दम पर रिटेल सेक्टर में विकास की गति बनी रहेगी, हम देश भर में अपने उपभोक्ताओं को बेहतर मूल्य प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
12 करोड़ किसानों को रिलायंस रीटेल से जोड़ने का लक्ष्य
रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी ने रिटेल बिजनेस में 3 करोड़ किराना मालिकों और 12 करोड़ किसानों को जोड़ने का लक्ष्य रखा था। फ्यूचर समूह के खुदरा व्यापार, थोक और सप्लाई चेन व्यवसाय के अधिग्रहण से रिलायंस अपनी स्थिती मजबूत कर रहा है।
किशोर बियानी को मुकेश अंबानी के हाथों क्यों बेचना पड़े बिग बाजार और फूड बाजार जैसे बिजनस?
पिछले पांच सालों में भारत का रीटेल बिजनस जिस तरह शिफ्ट किया है उससे कंपनी को काफी नुकसान हुआ है। 2018 में वालमार्ट ने 16 अरब डॉलर में फ्लिपकार्ट को खरीद लिया। इसके बाद भारत में बहुत तेजी से ऑनलाइन रीटेल बिजनस ग्रो किया।
फ्यूचर ग्रुप के रीटेल बिजनस पर कब्जा कर मुकेश अंबानी भारत के रीटेल किंग बन गए हैं। इसके साथ ही किशोर बियानी जो फ्यूचर ग्रुप के मालिक हैं, उनके ऊपर भारी-भरकम कर्ज का बोझ भी दूर हो गया। मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड ने फ्यूचर ग्रुप का रीटेल, होलसेल लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउस बिजनस 24 हजार 7 सौ 13 करोड़ में खरीद लिया है।
रीटेल बिजनस के फादर कहे जाते हैं बियानी
किशोर बियानी को भारत के ऑर्गनाइज्ड रीटेल बिजनस का फादर कहा जाता है। Erstwhile Manz Wear के नाम से उन्होंने 1987 में रीटेल बिजनस की शुरुआत की थी। बाद में उन्होंने 1997 में पेंटालून के साथ कारोबार को आगे बढ़ाया। उन्होंने पेंटालून के फ्रैंचाइजी मॉडल को काफी तेजी से बढ़ाया और देखते-देखते पूरे भारत में इसके स्टोर खुल गए। कम प्राइस की मदद से उन्होंने कस्टमर्स को लुभाया और यह काफी सफल भी रहा।
2001 में पहला बिग बाजार स्टोर

2001 में भारत में पहला बिग बाजार स्टोर खोला गया था। 2008 की आर्थिक मंदी के बाद कंपनी के कारोबार पर काफी बुरा असर हुआ। धीरे-धीरे कर्ज का बोझ बढ़ता गया। मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2019 को फ्यूचर ग्रुप पर कुल कर्ज 10951 करोड़ था। 30 सितंबर 2019 को यह बढ़कर 12778 करोड़ पर पहुंच गया।
2012 में पेंटालून में विनिवेश किया
2012 में कर्ज के बोझ को कम करने के लिए उन्होंने पेंटालून को बिरला ग्रुप को बेच दिया। यह डील 1600 करोड़ में हुई थी और उस समय ग्रुप पर कुल 7850 करोड़ का कर्ज था। उसके बाद लगातार कंपनी पर कर्ज का बोझ बढ़ता गया हालांकि रीटेल बिजनस को बढ़ाने के लिए किशोर बियानी ने कई कंपनियों को खरीदा और रीटेल स्टोर की संख्या में तेजी से इजाफा किया।
भारत में रीटेल बिजनस बदल चुका है
पिछले पांच सालों में भारत का रीटेल बिजनस जिस तरह शिफ्ट किया है उससे कंपनी को काफी नुकसान हुआ है। 2014 में ऐमजॉन ने कहा कि वह भारत में 2 अरब डॉलर निवेश करेगा। 2018 में वालमार्ट ने 16 अरब डॉलर में फ्लिपकार्ट को खरीद लिया। इसके बाद भारत में बहुत तेजी से ऑनलाइन रीटेल बिजनस ग्रो किया।

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