तो गैरजिम्मेदाराना पत्रकारिता से हुआ नेपाल में भारतीय मीडिया ब्लाक

भारत-नेपाल तनाव: भारतीय मीडिया की जिस रिपोर्ट पर ग़ुस्से में है नेपाल
नई दिल्ली 11 जुलाई .भारतीय मीडिया को लेकर नेपाल में भारी ग़ुस्सा है. नेपाल में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को लेकर नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर जारी उठा-पटक में भारतीय मीडिया ख़ूब दिलचस्पी ले रहा है. लेकिन भारतीय मीडिया में पूरे विषय को जिस तरह से कवर किया गया है उसे लेकर नेपाल की सरकार से लेकर विपक्ष तक में नाराज़गी है.

भारत के एक हिन्दी न्यूज़ चैनल पर नेपाल में चीन की राजदूत होउ यांकी और पीएम केपी शर्मा ओली को लेकर एक स्टोरी चलाई गई. नेपाल की सरकार का कहना है कि एक विदेशी राजनयिक और प्रधानमंत्री ओली के बारे में सनसनीखेज़ दावे किए गए, जिनका हक़ीक़त से कोई संबंध नहीं है.

गुरुवार को इससे ख़फ़ा होकर नेपाल सरकार के प्रवक्ता युबराज खाटीवाड़ा ने घोषणा की कि कुछ भारतीय मीडिया ने बेबुनियाद और शर्मनाक आरोप पीएम ओली पर लगाए हैं.

उन्होंने कहा कि गुरुवार शाम भारतीय मीडिया में पीएम ओली को लेकर जिस तरह की स्टोरी दिखाई गई उसे लेकर सरकार क़ानूनी और राजनीतिक कार्रवाई करेगी.

उन्होंने कहा, ”सरकार के पास पूरा अधिकार है कि वो उन भारतीय मीडिया के ख़िलाफ़ कार्रवाई करे जो नेपाल की छवि, राष्ट्रीय संप्रभुता और नेपालियों की मर्यादा को चोट पहुंचाने में लगे हैं. हमने ऐसे प्रसारण को रोकने के लिए कहा है.”

नेपाल के प्रमुख अख़बार काठमांडू पोस्ट ने लिखा है, ”भारतीय न्यूज़ चैनल ज़ी न्यूज़ ने नेपाल के पीएम और चीन की राजदूत होउ यांकी के संबंधों को लेकर सनसनीखेज़ दावे किए हैं जिनका सच्चाई से कोई संबंध नहीं है. इस रिपोर्ट में बिना कोई सच्चाई के 15 मिनट का प्रसारण किया गया है.”

इसे लेकर सत्ताधारी पार्टी, पीएम ओली के सलाहकार और फ़ेडरेशन ऑफ़ नेपाली जर्नलिस्ट ने भी चिंता ज़ाहिर की. नेपाल की सरकार ने कहा कि नई दिल्ली में नेपाली दूतावास ने भारत के प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में इस तरह के बेबुनियाद कवरेज को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है.

नेपाली मीडिया के अनुसार, नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञावली ने कहा कि दिल्ली स्थित नेपाली दूतावास ने भारतीय विदेश मंत्रालय से इसे लेकर संपर्क किया है.


नेपाल में चीनी राजदूत होउ यांकी
नई दिल्ली में नेपाल के राजदूत नीलांबर आचार्य ने काठमांडू पोस्ट से पूरे मामले पर कहा कि भारत के कुछ मीडिया घराने नेपाल-भारत संबंध को पटरी से उतारने के लिए अडिग हैं. आचार्य ने कहा कि इस तरह की रिपोर्ट दुखद और आपत्तिजनक है.
प्रधानमंत्री ओली के प्रेस सलाहकार सूर्य थापा ने कहा कि इस मामले को लेकर पीएम ने ख़ुद ही नोटिस लिया है.
थापा ने कहा कि केबल ऑपरेटर्स भारतीय न्यूज़ चैनल के प्रसारण को देश के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी समझते हुए बंद कर देंगे. नेपाल टीवी असोसिएशन ने इस बात की पुष्टि की है कि कुछ भारतीय न्यूज़ चैनलों पर पाबंदी लगाई गई है.
नेपाल के नेशनल ब्रॉडकास्टिंग रूल्स 1995 के अनुच्छेद 9 के अनुसार सरकार वैसे प्रसारणों पर पाबंदी लगा सकती है जिससे नेपाल की सुरक्षा,शांति,मर्यादा और नैतिकता पर चोट पहुंचती है.भारत और नेपाल के बीच संबंध हाल के दिनों में ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर हैं.
नेपाल ने 20 मई को अपना नया नक्शा जारी किया था जिसमें लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को अपना इलाक़ा दिखाया था. ये तीनों इलाक़े अभी भारत में हैं लेकिन नेपाल दावा करता है कि ये उसका इलाक़ा है. गुरुवार को भारतीय न्यूज़ चैनल टीवी-9 भारतवर्ष ने नेपाल के पूर्व उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री उपेंद्र यादव का इंटरव्यू किया था.
इस इंटरव्यू में एंकर ने पूछा कि प्रधानमंत्री ओली पर ‘हनी ट्रैप’ में जाने के आरोप लग रहे हैं क्या आप इससे सहमत हैं?
इस पर उपेंद्र यादव ने कहा कि इससे इनकार नहीं किया जा सकता है और इसे देखने की ज़रूरत है. हालांकि बाद में उपेंद्र यादव ने नेपाली मीडिया से कहा कि उनके शब्दों के साथ छेड़छाड़ की गई है.
उपेंद्र यादव ने कहा, ”उन्होंने मेरा आधे घंटे का इंटरव्यू किया लेकिन दिखाया केवल सात मिनट. इन्होंने सिलेक्टिव तरीक़े से दिखाया है. मैंने हनी ट्रैप की बात नहीं कही है. बिना किसी जाँच के हम ऐसी बात कैसे कर सकते हैं?”
हालांकि नेपाल में इस बात को लेकर भी सवाल उठ रहे थे कि नेपाल की घरेलू राजनीति में चीन की राजदूत इतनी दिलचस्पी क्यों ले रही हैं?
नेपाली मीडिया के अनुसार उपेंद्र यादव का यह इंटरव्यू तब आया जब नेपाल में चीन की राजदूत के साथ सत्ताधारी पार्टी के कई नेताओं और प्रधानमंत्री ओली के साथ बैठकें चल रही थीं.
नेपाल में बुधवार को चीनी राजदूत के ख़िलाफ़ दूतावास के सामने विरोध भी हुआ था.
चीनी राजदूत होउ यांकी की नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड, पीएम ओली, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के सीनियर नेता माधव कुमार नेपाल और झाला नाख खनाल के साथ बैठक हुई थी.
भारतीय मीडिया ने इन मुलाक़ातों को ख़ूब तवज्जो दी और कहा कि नेपाल की राजनीति में चीनी दख़ल बढ़ता जा रहा है और चीन की राजदूत संकट में घिरे ओली को बचाने की कोशिश कर रही हैं. इससे पहले ओली यह आरोप लगा चुके हैं कि नई दिल्ली और नेपाल स्थित भारतीय दूतावास में उन्हें पीएम के पद से हटाने की साज़िश रची जा रही है.

पूरे मामले पर काठमांडू पोस्ट ने एक कड़ी टिप्पणी लिखी है.

अख़बार ने लिखा है, ”नेपाल ने जब से अपना राजनीतिक नक़्शा अपडेट किया है तब से भारतीय मीडिया में प्रधानमंत्री ओली और चीन के संबंधों को लेकर नई-नई कहानियां गढ़ी जा रही हैं. हर दिन भारतीय मीडिया में नया-नया प्रॉपेगैंडा सामने आता है. दिल्ली और मुंबई में बैठे पत्रकार हर दिन ओली के इस्तीफ़े की तारीख़ और समय बताते हैं. कुछ लोग तो इस्तीफ़े की माँग भी करने लगते हैं. ओली भारतीय मीडिया के लिए टीआरपी बटोरने का ज़रिया बन गए हैं.”
नेपाल के लेखक कनक मणि दीक्षित ने पूरे विवाद पर ट्वीट कर कहा है, ”भारत के कुछ मीडिया घराने डिप्लोमैसी को पटरी से उतार रहे हैं और मनगढ़ंत कहानियां चला रहे हैं.”

वहीं नेपाल के पूर्व उप-प्रधानमंत्री कमल थापा ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया के एक कार्टून को ट्वीट करते हुए लिखा है, ”प्रधानमंत्री ओली से कई मुद्दों पर गंभीर मतभेद हैं. इन मतभेदों में विदेशी संबंध भी शामिल हैं जिसे वो चला रहे हैं. लेकिन पीएम के ख़िलाफ़ भारतीय मीडिया में बदनाम किए जाने वाली रिपोर्ट स्वीकार्य नहीं है. यह नेपाल-भारत संबंधों के लिए भी अच्छा नहीं है.

नेपाली प्रधानमंत्री और भारत के प्रधानमंत्री

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