रेत अवैध खनन मामले में सीबीआई के उप्र-उत्तराखंड में 11 जगहों पर छापेमारी

सीबीआई ने छापेमारी की
सहारनपुर में रेत खनन के अवैध पट्टे आवंटित किए जाने के मामले में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की 11 जगहों पर सीबीआई छापेमारी कर रही है। सहारनपुर में पट्टों के आवंटन के मामले में नई प्राथमिकी दर्ज की है, जिसके बाद यह छापेमारी हो रही है।
सीबीआई की टीम ने रेत खनन के पट्टों के आवंटन में कथित अनियमितताओं के मामले में सहारनपुर, देहरादून और लखनऊ समेत करीब 11 जगहों पर छापेमारी की कार्रवाई की है। रेत अवैध खनन मामले में दिल्ली से सीबीआई की टीम आज देहरादून पहुंची। अवैध खनन को लेकर दून में दो जगह छापेमारी की।
सहारनपुर में सीबीआई की टीम ने पूर्व बसपा एमएलसी व खनन माफिया इकबाल के आवास पर सीबीआई ने छापेमारी की है। इसके अलावा उनके मिर्जापुर स्थित आवास पर सीबीआई की टीम मौजूद है। मिर्जापुर आवास पर सीबीआई टीम की दो गाड़ी पहुंची हैं। वहीं, लखनऊ और उत्तराखंड के देहरादून में भी छापेमारी हुई। सहारनपुर में करीब नौ बजे पूर्व एमएलसी व खनन कारोबारी हाजी इकबाल के मिर्जापुर स्थित आवास पर छापा मारा। यहां से अधिकारी इकबाल के एक बेटे को साथ लेकर गांव में ही स्थित दूसरे मकान पर पहुंचे। अधिकारियों की एक टीम इकबाल के मुंशी नसीम के आवास पर भी जांच पड़ताल कर रही है। बताया जा रहा है कि छापा खनन को लेकर मारा गया है। तीनों टीमें अभी जांच कर रही हैं। बाहर पुलिस तैनात है।
बताया जा रहा है कि मिर्जापुर आवास पर पूर्व एमएलसी इकबाल से पूछताछ की जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार ग्लोकल यूनिवर्सिटी के लिए मनमाने ढंग से सभी मानकों को ताक पर रखकर जबरन जमीन खरीदने और खनन को लेकर छापेमारी की गई है। पूर्व एमएलसी के सहारनपुर में होने की पुष्टि के बाद ही छापा मारा गया। इस दौरान टीम ने हाजी इकबाल के भाई एमएलसी महमूद अली के घर पर जांच की। जानकारी मिल रही है कि सीबीआई टीम इकबाल के आवास से मिले दस्तावेजों को लेकर वापस लौट गई है।
Central Bureau of Investigation (CBI) is conducting searches at 11 locations including Saharanpur, Dehradun and Lucknow in a case related to alleged irregularities in the allocation of sand mining leases at Saharanpur, Uttar Pradesh. pic.twitter.com/8hfRHe3GaL
— ANI (@ANI) October 1, 2019
इससे पहले हुई कार्रवाई
मुखौटा कंपनियां बनाकर चीनी मिलें खरीदने के मामले में सीबीआई ने मिर्जापुर स्थित बसपा के पूर्व एमएलसी हाजी मो. इकबाल, उनकी एक कंपनी के निदेशक सौरभ मुकुंद और मुनीम नसीम के मकान पर छापा मारा था। उस दौरान सीबीआई की टीम ने आठ घंटे तक सौरभ मुकुंद एवं नसीम के आवासों पर छानबीन की थी।
अभिलेख खंगाले और कई अभिलेख कब्जे में लिए थे। लखनऊ से सीबीआई की टीम इंस्पेक्टर रमाकांत तिवारी के नेतृत्व में पुलिस लाइन पहुंची थी। वहां से पुलिस को साथ लेकर गोपनीय ढंग से शहर के साउथ सिटी स्थित सौरभ मुकुंद के आवास पर छापा मारा था, जबकि एक टीम मिर्जापुर स्थित पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल के घर पहुंची थी। वहां पर हाजी इकबाल का मुनीम नसीम ही मिला था। उसके घर से बैंक एवं संपत्ति संबंधी दस्तावेज भी मिले।
दो सालों से खंगाले जा रहे तार
सीबीआइ करीब दो सालों से खनन घोटाले की परतें खंगाल रही है। सीबीआइ ने पूर्व में हाई कोर्ट के आदेश पर हमीरपुर, शामली, फतेहपुर, देवरिया, सिद्धार्थनगर व अन्य जिलों में वर्ष 2012 से 2016 के बीच हुए खनन में धांधली की शिकायतों पर मार्च 2017 में सात प्रारंभिक जांच (पीई) दर्ज की थीं। आरोप था कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के प्रतिबंध के बावजूद हमीरपुर समेत कई स्थानों पर धड़ल्ले से खनन कराया गया। सीबीआइ दिल्ली ने प्रारंभिक जांच के बाद हमीरपुर में हुई धांधली के मामले में आरोपित तत्कालीन डीएम हमीरपुर बी.चंद्रकला अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया था, जिसके बाद सीबीआइ ने सहारनपुर, फतेहपुर व देवरिया समेत चार जिलों में अवैध खनन के मामलों में अलग-अलग केस दर्ज किये थे।
नियम ताख पर रखकर दिये गए थे पट्टे
सीबीआइ दो साल से खनन घोटाले की जांच कर रही थी। सूत्रों का कहना है कि जांच में सामने आया कि हमीरपुर व अन्य जिलों में तत्कालीन जिलाधिकारियों व अन्य अफसरों ने खनन के पट्टे नियमों की अनदेखी कर जारी किये। बिना ई-टेंडर के पट्टे दिये गए और पुराने पट्टों की मियाद भी बढ़ाई गई। सीबीआइ को इस मामले में सपा सरकार के तत्कालीन खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति की संलिप्तता के साक्ष्य भी मिले हैं, जिनकी छानबीन चल रही है।
सपा शासनकाल में हुआ था घोटाला
खनन घोटाला समाजवादी पार्टी की सरकार में वर्ष 2012 से 2016 के बीच हुआ था। वर्ष 2012 से 2013 के बीच तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने खनन विभाग अपने पास रखा था। बाद में उन्होंने गायत्री प्रसाद प्रजापति को खनन मंत्री बनाया था। 31 मई, 2012 को तत्कालीन यूपी सरकार ने एक आदेश जारी किया गया था, जिसमें जिसमें कहा गया था कि जो भी खनन होगा वह ई-टेंडर के ही माध्यम से किया जाएगा, लेकिन इस नियम का पालन नहीं किया गया। हाई कोर्ट के आदेश पर सीबीआइ इस घोटाले की जांच कर रही है। हाई कोर्ट ने दो अलग-अलग जनहित याचिकाओं पर 28 जुलाई, 2016 को अवैध खनन की जांच के आदेश दिए थे।

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