उप्र उपचुनाव: फुटपाथ पर सब्जी बेचने वाले के बेटे को बीजेपी ने बनाया उम्मीदवार

उत्तर प्रदेश की घोसी सीट पर हो रहे उपचुनाव के लिए बीजेपी ने सब्जी बेचनेवाले के बेटे विजय राजभर को अपना उम्मीदवार बनाया है. पार्टी के ये फैसला चारो तरफ चर्चा का विषय बना हुआ है. विजय के पिता ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया है.
लखनऊ: हमीरपुर उपचुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी ने बाकी बची 10 सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं. इनमें सबसे ज्यादा चर्चा मऊ की घोसी सीट की हो रही है. ऐसा इसलिए क्योंकि बीजपी ने इस सीट से सब्जी बेचने वाले के बेटे को अपना उम्मीदवार बनाया है. घोसी सीट से बीजेपी के प्रत्याशी विजय राजभर हैं. विजय राजभर को फागू चौहान के बेटे का टिकट काटकर उम्मीदवार बनाया गया है.
बीजेपी से टिकट मिलने पर विजय राजभर ने कहा, ”संगठन ने मुझे एक बड़ी जिम्मेदारी दी है, मेरे पिता मुंशी पुरा के पास फुटपाथ पर सब्जियां बेचते हैं, मैं पूरी कोशिश करूंगा कि उम्मीदों पर खरा उतरूं.”
पार्टी नेताओं ने घोसी विधानसभा सीट के विधायक फागू चौहान को बिहार राज्य का राज्यपाल बनाए जाने का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने उपचुनाव में पंडित दिनदयाल उपाध्याय के सपनों को साकार करते हुए सब्जी बेचने वाले के बेटे को अपना उम्मीदवार बनाया है. पंडित दीनदयाल उपाध्याय का सपना था कि समाज के अंतिम व्यक्ति को भी देश के उच्च पदों और समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जाए.
विजय राजभर मऊ में पार्टी के नगर अध्यक्ष के तौर पर सक्रिय भूमिका निभाते आए हैं. वो नगपालिका क्षेत्र के चुनाव में सहादतपुर से वार्ड मेंबर भी चुने गए थे.
भारतीय जनता पार्टी से बेटे को टिकट मिलने की खुशी पिता नंद लाल के चेहरे पर साफ दिखाई दे रही है. वो खुशी से फूले नहीं समा रहे. विजय राजभर के पिता ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद दिया है. इसके साथ ही उन्होंने अपने बेटे को जीत का आशीर्वाद भी दिया.
उत्तर प्रदेश की लखनऊ कैंट, बाराबंकी की जैदपुर, चित्रकूट की मानिकपुर, सहारनपुर की गंगोह, अलीगढ़ की इगलास, रामपुर, कानपुर की गोविंदनगर, बहराइच की बलहा, प्रतापगढ़, मऊ की घोसी और अंबेडकरनगर की जलालपुर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं.
रामपुर पर सबकी नजर, सवाल- क्या आजम का किला ध्वस्त कर पाएगी बीजेपी?
यूपी उपचुनाव: रामपुर पर सबकी नजर, सवाल- क्या आजम का किला ध्वस्त कर पाएगी बीजेपी?उत्तर प्रदेश में होने जा रहे विधानसभा उपचुनाव में रामपुर की सीट पर सबकी नजर है. (File Photo)
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की 11 विधानसभा सीटों पर हो रहा उपचुनाव (By-elections) इस बार खासा रोचक नजर आ रहा है. वैसे तो माना जाता रहा है कि उपचुनाव में सत्ताधारी पार्टी का ही दबदबा रहता है, लेकिन रामपुर की खास सीट पर पूरे प्रदेश की नजर है. ये वो सीट है, जो बीजेपी की लहर के बाद भी उसकी पहुंच से दूर ही रही. यहां दशकों से आजम खान का वर्चस्व है. आजम यहां से 1980 से लगातार (1996 को छोड़कर) विधायक बनते रहे हैं. यही कारण है कि इस बार हर हाल में इस विधानसभा में कमल का फूल खिलाने के लिये बीजेपी अलग-अलग मोर्चों पर संघर्ष करते हुए एक खास रणनीति के तहत चुनाव मैदान में उतरकर सियासी जंग लड़ती नजर आ रही है.
आजम की पत्नी तजीन फातमा से है मुकाबला, बसपा भी मैदान में
दरअसल रामपुर से 9 बार के विधायक आजम खान इस समय लोकसभा सदस्य हैं. उनके इस्तीफे से ये सीट खाली हुई है. लेकिन समाजवादी पार्टी ने इस बार आजम खान की पत्नी तजीन फातमा को टिकट दिया है. वहीं बीजेपी ने भारतभूषण गुप्ता और कांग्रेस ने अरशद अली खान को मैदान में उतारा है. इसके अलावा पहली बार बसपा ने भी यहां से कस्टम विभाग के पूर्व अधिकारी जुबेर मसूद खान को अपना उम्मीदवार घोषित कर रामपुर के मुकाबले को और रोचक बना दिया है.
करीब 40 साल में सिर्फ एक बार ही हारे हैं आजम
रामपुर में करीब 52 प्रतिशत मुस्लिम और 17 प्रतिशत दलित हैं, जिसके चलते ही बसपा यहां मुस्लिम प्रत्याशी उतार कर दलित मुस्लिम गठजोड़ के सहारे जीतने की रणनीति बना रही है. हालांकि अगर रामपुर विधानसभा सीट के इतिहास को देखें तो आजम खान यहां 1980 से अब तक चुनाव जीते हैं. हां, एक बार 1996 में आजम कांग्रेस से चुनाव हारे थे. लेकिन इसके बाद आजम नें कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.
2017 में भाजपा की लहर के दौरान भी आजम अपनी और अपने बेटे अब्दुल्ला आजम की सीट बचाने में कामयाब रहे थे. अब आजम के इस्तीफे के बाद ही हो रहे उपचुनाव में खुद आजम खान की पत्नी तजीन फातिमा चुनाव मैदान में हैं.
बीजेपी ने कमजोर प्रत्याशी पर लगाया दांव: वरिष्ठ पत्रकार
वरिष्ठ पत्रकार रतन मणि लाल कहते हैं कि भले ही आजम खान पुलिस-प्रशासन की सख्ती के चलते इन दिनों भूमाफिया से लगाकर बकरी चोरी समेत कई दर्जन मुकदमे झेल रहे हों और एक लंबे समय तक रामपुर से बाहर रहे हैं. आजम खान इन दिनों केसों में उलझे हुए हैं लेकिन इसके बाद भी बीजेपी के लिये रामपुर में कमल खिला पाना किसी चुनौती से कम नहीं है. इसका सबसे बड़ा कारण सपा की अपेक्षा बीजेपी द्वारा कमजोर प्रत्याशी को मैदान में उतारा जाना है.रतन मणि लाल कहते हैं कि बीजेपी प्रत्याशी भारत भूषण गुप्ता ने जहां 2012 में बसपा से चुनाव लड़कर महज 16,570 वोट हासिल किये थे, वहीं बीते पंचायत चुनाव में जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में भी महज 1623 वोट पाकर 7वें स्थान पर थे. और यही कारण है कि अब रामपुर में कमल खिलाने के लिये बीजेपी ने कई मोर्चों पर एक साथ ताकत झोंक दी है. बीजेपी ने इस बार न सिर्फ स्वामी प्रसाद मौर्य, बलदेव सिंह औलख और महेश गुप्ता जैसे मंत्रियों को रामपुर जिताने की जिम्मेदारी सौंपी है. वहीं डॉ चन्द्रमोहन और डॉ. देवेंद्र सिंह समेत कई पार्टी पदाधिकारियो को भी रामपुर में चुनाव जिताने की जिम्मेदारी सौंपकर उपचुनाव जीतने की एक खास रणनीति बनाई गई है.

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