भाजपा से कोई ऑफर नहीं: उद्धव,मांगने पर दे सकते हैं समर्थन :कांग्रेस सासंद हुसैन दलवाई

उद्धव ठाकरे ने कहा कि कई अफवाएं चल रही हैं. उन पर विश्‍वास ना करें. शिवसेना के पास कोई भी प्रस्ताव नहीं आया है.
उद्धव ने कहा- भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) से कोई ऑफर नहीं मिला, कांग्रेस सासंद ने कहा कि मांगने पर दे सकते हैं समर्थन
मुंबई: आज शिवसेना विधायक दल की बैठक में अनौपचारिक रूप से उद्धव ठाकरे ने कहा कि भाजपा की तरफ से कोई ऑफर नहीं आया है. उद्धव ठाकरे ने कहा कि कई अफवाएं चल रही हैं. उन पर विश्‍वास ना करें. शिवसेना के पास कोई भी प्रस्ताव नहीं आया है. मीडिया के माध्यम से कुछ प्रस्ताव देना शुरू हुआ है. हम मित्र दलों को शत्रु नहीं मानते हैं. मेरा जो अमित शाह के साथ तय हुआ है, उसको किया जाना चाहिए. हम स्थिर सरकार देंगे. इसके साथ ही उन्‍होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को दिवाली के दिन मीडिया के साथ अनौपचारिक चर्चा में बयान नहीं देने चाहिए थे.मुख्यमंत्री के बयान के बाद ही चर्चा बंद हुई.मुझे विश्वास है कि सब सही होगा.
शिवसेना के करीबी सूत्रों के हवाले से ख़बर है कि पार्टी सुप्रीमो उद्धव ठाकरे ने आज शिवसेना विधायकों की मीटिंग को 15 मिनट तक संबोधित किया. उद्धव ठाकरे ने कहा कि भाजपा, एनसीपी और दूसरे दलों के विधायक उनके संपर्क में हैं. उन्‍होंने शिवसेना विधायकों से किसी भी बात को लेकर घबराने के लिये नहीं कहा. इस मीटिंग में विधायकों ने ये भी बात उठाई कि कई जगहों पर भाजपा के बागी उम्मीदवार की वजह से शिवसेना के उम्मीदवार हारे हैं.
उद्धव ठाकरे ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे ने जिसको जो शब्द दिया, पालन किया !. हम सत्ता के भूखे नहीं है लेकिन भाजपा से जो बात हुई उसे उस बात का पालन करना चाहिये. मुख्यमंत्री का पद हमेशा किसी एक व्यक्ति के लिये कायम नहीं रहता. हमारी संख्या अच्छी है. मुख्यमंत्री पद हमारा हक है और ये हमारी जिद्द है.
उन्‍होंने कहा कि लोकसभा के समय 50-50 फॉर्मूला का जो तय हुआ, भाजपा को वो नहीं मान्य है तो क्या बात करूं. नए सिरे से बात नहीं होगी जो तय हुआ है उसी से बात शुरू होगी.अपने विधायकों को कहा कि सत्ता के लिए आप कोई गलत कदम नही उठाओगे, मुझे विश्वास है.
कांग्रेस सांसद का बयान
इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा के सासंद हुसैन दलवाई ने कहा कि अगर शिवसेना प्रपोज़ल दे तो हम विचार करेंगे. ये बात अलग है कि हम दोनों पार्टियों की विचारधारा अलग है. हालांकि इसके पहले शिवसेना तीन बार कांग्रेस का समर्थन कर चुकी है- इंदिरा गांधी के समय, महाराष्ट्र में ए आर अंतुले को मुख्यमंत्री बनाते समय और प्रतिभा ताई पाटिल को राष्ट्रपति बनाते समय. तो इस बार हम क्यों नही विचार कर सकते?

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