भारत ग्लोबल स्पैम काल रेंकिंग में आया पांच रैंक नीचे

भारत ग्लोबल स्पैम काल रैंकिंग में पांच रैंक नीचे आया, किंतु 2019 में स्पैम काल्स की संख्या में 15 फीसदी बढ़ोतरी

i) भारत में पिछले दो सालों में स्पैम काल्स की संख्या 15 फीसदी बढ़ी है

ii) भारत में हर 3 में से 1 महिला को यौन शोषण या अनुपयुक्त काल या एसएमएस मिलते हैं

iii) भारत ग्लोबल एसएमएस स्पैम इंडैक्स में 8वें स्थान पर
नई दिल्ली, 3 दिसम्बर 2019 ट्रूकालर ने आज अपनी सालाना ट्रूकालर इनसाईट्स रिपोर्ट के परिणामों का ऐलान किया है, जिसमें 2019 में स्पैम काल्स से प्रभावित शीर्ष पायदान के 20 देशों की सूची दी गई है। यह रिपोर्ट का तीसरा संस्करण है, जिसमें स्पैम काल्स से प्रभावित देशों की रैंकिंग में बड़ा बदलाव आया है।
भारत में स्पैम काल्स पर एक नज़र
रिपोर्ट के अनुसार भारत स्पैम काल्स की संख्या की दृष्टि से पांच रैंक नीचे आ गया है, जबकि ब्राज़ील इस सूची में पहले पायदान पर है। भारत में उपयोगकर्ताओं को मिलने वाले स्पैम काल्स 25.6 कॉल प्रति यूज़र/ माह की दर से बढ़ रहे हैं, जो पिछले साल की तुलना में 15 फीसदी बढ़ोतरी है। इस साल की रिपोर्ट का सबसे रोचक तथ्य यह है कि 10 फीसदी स्पैम कॉल्स वित्तीय सेवा प्रदाताओं की ओर से की जाती हैं, जबकि इस कैटेगरी को पिछले साल सूचीबद्ध नहीं किया गया था।
स्पैम काल्स को श्रेणी में बांटा जाए तो आपरेटर्स भारत में शीर्ष पायदान के स्पैमर्स बने हुए हैं, उपयोगकर्ताओं को मिलने वाले 67 फीसदी काल कई तरह के आफर्स और रिमाइंडर्स के बारे में होते हैं। हालांकि देश में विकसित होते मोबाइल पेमेंट सिस्टम और मध्यम वर्ग के चलते बैंक और फिनटेक आधारित संगठन तथा टेलीमार्केटिंग सेवाएं क्रमशः 10 और 17 फीसदी के साथ सबसे बड़े स्पैमर्स के रूप में उभरे हैं।
इसके अलावा ट्रूकालर की इस रिपोर्ट में दुनिया भर में स्पैम एसएमएस के रूझान भी पेश किए गए हैं, रिपोर्ट में टाप 20 देशों की सूची दी गई है जिन्हें सबसे ज़्यादा स्पैम एसएमएस मिलते हैं। आंकड़े दर्शाते हैं कि स्पैम मैसेज विकसित होते क्षेत्रों में सबसे ज़्यादा मिलते हैं। भारत इस दृष्टि से आठवें स्थान पर है, जहां एक उपयोगकर्ता औसतर हर माह 61 स्पैम मैसेज प्राप्त करता है। इस तरह के स्पैम से प्रभावित शीर्ष पायदान के तीन बाज़ार अफ्रीका महाद्वीप में हैं।

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