नागरिकता संशोधन कानून 2019 कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान PFI ने ट्रांसफर किए करोड़ों, कपिल सिब्बल और इंदिरा जयसिंह का भी नाम

कपिल सिब्बल का चौंकाने वाला सच आया सामने?

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून 2019 (CAA) कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआइ) ने पिछले साल दिसंबर में उत्तर प्रदेश में सीएए के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन के लिए 120 करोड़ रुपये का फंड मुहैया कराया था। जानकारी के अनुसार यह पैसा कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल,वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह, दुष्यंत ए दवे और अब्दुल समंद सहित कई नामचीन हस्तियों को ट्रांसफर किया गया। जबकि 1.65 करोड़ रुपये पीएफआइ कश्मीर को ट्रांसफर किए गए।

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी प्रदर्शनों के लिए फंडिग के आरोप का पीएफआई के महासचिव मोहम्मद अली जिन्ना ने खंडन किया है। जिसपर, केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि एजेंसियां अपना काम कर रही हैं, मैं इसपर कोई प्रतिक्रिया नहीं देना चाहता हूं। लेकिन अगर कुछ संदिग्ध ट्रांजैक्शन हैं तो यह निश्चित रूप से शंका पैदा करता है। प्रदर्शनों का आयोजन स्वैच्छिक नहीं लगता है। रवि शंकर प्रसाद, केंद्रीय मंत्री

इस दौरान 77 लाख रुपये कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल को दिए गए। दुष्यंत दवे को 11 लाख रुपये, इंदिरा जयसिंह को 4 लाख और अब्दुल समंद को 3.10 लाख रुपये दिए गए। यह लेन-देन 73 बैंक खातों के माध्यम से हुआ है। जानकारी के अनुसार सिब्बल ने इसे लेकर कहा है कि उन्हें यह रकम फीस के तौर मिली है।

पीएफआइ हाथ सामने आने के बाद जांच एजेंसियां सतर्क हो गईं थी

बता दें कि उत्तरप्रदेश समेत कई राज्यों में सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के पीछे पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआइ) का हाथ सामने आने के बाद जांच एजेंसियां सतर्क हो गईं थी। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पीएफआइ के खिलाफ पहले से चली आ रही मनी लांड्रिंग की जांच को और तेज कर दिया था। उसके खातों की पड़ताल में आयकर विभाग भी जुट गया था। इसी के बाद यह खुलासा हुआ है।

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के नाम से 27 बैंक खाते खोले गए

जानकारी के अनुसार जांच में पता चला कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के नाम से 27 बैंक खाते खोले गए। 9 बैंक खाते रिहैब इंडिया फाउंडेशन के हैं, जो पीएफआइ से जुड़ा संगठन है और इसी संगठन ने 17 अलग-अलग लोगों और संगठन के नाम पर 37 बैंक खाते खोले हैं।

जांच एजेंसियों को चकमा देने के लिए 73 खातों में रुपये जमा किए गए

ईडी सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियों को चकमा देने के लिए, 73 खातों में लगभग 120 करोड़ रुपये जमा किए गए थे, लेकिन खातों में मामूली राशि छोड़ दी गई थी। ऐसा प्रतीत होता है कि पैसा जमा करने वालों को एक बार में 50 हजार रुपये से कम जमा करने का निर्देश दिया गया था।

लेनदेन की तारीखें हिंसा की तारीखों से मेल खाती हैं

ईडी के सूत्रों ने यह भी बताया कि पीएफआइ के 15 बैंक खातों में लेनदेन की तारीखें भी हिंसा की तारीखों से मेल खाती हैं। इससे हिंसक विरोध और पीएफआइ के बीच एक स्पष्ट संबंध साबित होता है। सीएए के  पास होने के बाद पीएफआइ के 15 बैंक खातों में 1. 04 करोड़ जमा किए गए। दिसंबर से जनवरी के बीच इन बैंक खातों से 1.34 करोड़ रुपये निकाले गए। निश्चित दिनों (21 दिसंबर और 12 दिसंबर) पर पीएफआइ के एक खाते से 80-90 बार निकासी की गई।

भाजपा ने की मामले की जांच की मांग

मामला सामने आने के बाद भाजपा ने इसकी जांच की मांग की है। भाजपा नेता और केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि अगर किसी विशेष दिन ऐसा वित्तीय लेनदेन हुआ है तो इसकी जांच होनी चाहिए।

PFI के तीन दफ्तर – G-78, शाहीन बाग, जामिया नगर,  G- 66 शाहीन बाग जामिया नगर, F-30, शाहीन बाग, जामिया नगर में स्थित है.वहीं रिहेब इंडिया फाउंडेशन का एक दफ्तर  एन-44, ग्राउंड फ्लोर, हिलाल होम्स, अबुल फजल एनक्लेव 1, जामिया नगर में है जबकि दूसरा दफ्तर डी-31 जंगपुर में स्थित है.

बता दें पिछले कई दिनों से शाहीन बाग ने देश और विदेश की मीडिया का ध्यान खींचा है. यहां पर एक महीने से ज्यादा समय से सीएए के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा है. इस प्रदर्शन में मुख्य रूप से महिलाएं शामिल हो रही हैं.

प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली और नोएडा को जोड़ने वाली एक सड़क को घेरा हुआ है जिसकी वजह से रोज लाखों लोगों को काफी परेशानी का सामाना करना पड़ रहा है.

कौन कर रहा है शाहीन बाग प्रोटेस्ट की फंडिंग?
इस प्रदर्शन के शुरू होने के साथ यह सवालों के घेरे में आ गया था. खासतौर पर इस पूरे प्रदर्शन की फंडिग को लेकर कई सवाल उठ रहे थे.

अब जब यह खुलासा हुआ है कि PFI के दफ्तर धरना स्थल के पास ही स्थित हैं. तो ऐसे में यह सवाल पैदा होता है कि क्या इस प्रोटेस्ट के पीछे भी PFI है.

देश के बड़े वकीलों को दिए गया पैसा
बता दें PFI जुड़ा एक बहुत बड़ा खुलासा जी न्यूज ने किया है. सूत्रों के हवाले से खबर है कि पीएफआई के बैंक अकाउंट से देश के कई बड़े वकीलों को पैसे दिए गए.

इनमें कपिल सिब्बल और इंदिरा जयसिंह का नाम भी शामिल है. 2 से 3 दिन के अंदर अंदर 120 करोड़ रुपये जमा किए गए और उन्हें तुरंत निकाल भी लिया गया है.

आरोपों पर क्या बोले सिब्बल और दवे
इन आरोपों को कांग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सिरे से खारिज करते हुए इन्हें बकवास करार दिया.

वहीं सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि वकीलों को जो फीस जाती है वह आधिकारिक तौर पर दी जाती है.

उन्होंने कहा, ‘मैंने कभी भी PFI के लिए केस नहीं लड़ा है हालांकि मुझे फिलहाल यह याद नहीं आ रहा है कि किसी मामले में अन्य पार्टी की तरफ इन्होंने मुझे भुगतान किया या नहीं.’

दवे ने कहा अगर इन्होंने मुझे कोई भुगतान भी किया है, अगर किया है तो मुझे नहीं लगता कि पहले यह कोई बैन संस्था थी.  दवे ने कहा कि यह सब मेरे लिए मायने नहीं रखता है, मैं अल्पसंख्यकों की हक के लिए अदालत में लड़ता रहूंगा.

वहीं इंदिरा जयसिंह और अब्दुल समर की तरफ से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

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