सुको से सरकार को आरकॉम की बैंक गारंटी के 104 करोड़ रु. लौटाने का आदेश

आरकॉम के चेयरमैन अनिल अंबानी।
टेलीकॉम डिस्प्यूट्स सेटलमेंट एंड अपीलेट ट्रिब्यूनल ने 2018 में आरकॉम के पक्ष में फैसला दिया था
सरकार ने ट्रिब्यूनल के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, कोर्ट ने कहा- अपील में कोई मेरिट नहीं
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) को 104 करोड़ रुपए लौटाए जाएं। आरकॉम की यह राशि बैंक गारंटी के तौर पर सरकार के पास जमा है। इस मामले में टेलीकॉम डिस्प्यूट्स सेटलमेंट एंड अपीलेट ट्रिब्यूनल (टीडीसैट) ने 21 दिसंबर 2018 को आरकॉम के पक्ष में फैसला दिया था। टीडीसैट ने कहा था कि आरकॉम की 908 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी में से सरकार स्पेक्ट्रम चार्ज के 774 करोड़ रुपए भुनाकर 104 करोड़ रुपए कंपनी को लौटाए। टेलीकॉम विभाग 30 करोड़ रुपए पहले ही एडजस्ट कर चुका था। इस फैसले को सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। जस्टिस आर एफ नरीमन और एस रविंद्र भट्ट की बेंच ने मंगलवार को फैसले में कहा कि सरकार की अपील में कोई मेरिट नहीं है।
आरकॉम के शेयर में 3.5% बढ़त
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बीएसई पर आरकॉम का शेयर 3.5% चढ़कर 87 पैसे पर पहुंच गया। एनएसई पर 85 पैसे तक पहुंचा।
आरकॉम दिवालिया प्रक्रिया में है
कारोबार में घाटा होने और कर्ज बढ़ने की वजह से आरकॉम ने 3 साल पहले ऑपरेशंस बंद कर दिए थे। उसने रिलायंस जियो को स्पेक्ट्रम बेचकर दिवालिया होने से बचने की कोशिश की लेकिन लंबी कानूनी प्रक्रिया और सरकार की ओर से मंजूरी में देरी की वजह से डील नहीं हो पाई। ऐसे में कंपनी ने खुद ही दिवालिया प्रक्रिया में जाने का विकल्प चुना। इसके आरकॉम के एसेट्स बेचने की प्रक्रिया चल रही है।

ब्लैकमनी/एक हजार करोड़ रु. हॉन्गकॉन्ग भेजने में सीबीआईसे 48 कंपनियों पर केस
बैंक ऑफ इंडिया, एसबीआई और पीएनबी के कुछ अफसरों पर मिलीभगत का आरोप
रकम भेजने के लिए 48 फर्मों ने तीन बैंकों की चार ब्रांचों में चालू खाते खुलवाए थे
एक हजार अड़तीस करोड़ रुपए का काला धन हॉन्गकॉन्ग भेजने के आरोप में सीबीआई ने तीन लोगों और 48 कंपनियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि पैसा 2014-15 में भेजा गया था। ज्यादातर कंपनियों के मालिक चेन्नई के हैं। सीबीआई के मुताबिक बैंक ऑफ इंडिया, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब नेशनल बैंक के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से रकम हॉन्गकॉन्ग भेजी गई। सीबीआई ने मोहम्मद इब्राम्सा जॉनी, जिंटा मिढर और नजीमुद्दीन नाम के शख्स को आरोपी बनाया है।
51 चालू खातों से हुआ पूरा खेल
जांच एजेंसी को सूचना मिली थी कि 1038.34 करोड़ रुपए बाहर भेजने के लिए 48 फर्मों ने तीन बैंकों की चार ब्रांचों में 51 चालू खाते खुलवाए थे। इनमें से 24 खातों से आयातित सामान के बदले 488.39 करोड़ रुपए का एडवांस भुगतान किया गया। वहीं, 27 खातों से भारतीय पर्यटकों के विदेश दौरों के लिए 549.95 करोड़ रुपए निकाले गए। 24 कंपनियों में से सिर्फ 10 ने कुछ मात्रा में सामान आयात किया। लेकिन बैंकों को सौंपे इनवॉयस में आयातित सामान और आयात की कीमत में काफी अंतर था।

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