महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू, फैसले के खिलाफ शिवसेना सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे

महाराष्ट्र में राज्यपाल की ओर से प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू करने के प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट ने हरी झंडी देते हुए फाइल राष्ट्रपति के पास भेज दी. अब राष्ट्रपति ने कैबिनेट की सिफारिश पर हस्ताक्षर कर दिया है. इसके साथ ही महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया है.,. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की कैबिनेट की सिफारिश पर हस्ताक्षर कर दिया है. राष्ट्रपति ने गृह मंत्रालय द्वारा राष्ट्रपति शासन की भेजी गई सिफारिश पर अपनी मुहर लगा दी. इसके साथ ही महाराष्ट्र में 24 अक्टूबर से बरकरार राजनीतिक अनिश्चितता का फिलहाल पटाक्षेप हो गया है.शिवसेना ने मांग की थी कि उन्हें एनसीपी और कांग्रेस से समर्थन का लेटर लेने के लिए तीन दिन का समय दिया जाए.राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश करते हुए राष्ट्रपति को रिपोर्ट सौंपी . इस बीच शिवसेना ने सरकार गठन के लिए और समय दिये जाने से महाराष्ट्र के राज्यपाल के इनकार करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.
नई दिल्‍ली: शिवसेना ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है जिसमें महाराष्ट्र के राज्यपाल के उस फ़ैसले को चुनौती दी गई है जिसमें राज्यपाल ने शिवसेना की मांग को ठुकरा दिया था. शिवसेना ने मांग की थी कि उन्हें एनसीपी और कांग्रेस से समर्थन का लेटर लेने के लिए तीन दिन का समय दिया जाए. याचिका में आरोप लगाया कि गवर्नर भाजपा के इशारों पर काम कर रहे हैं. उन्हें सरकार बनाने के लिए ज़रूरी वक़्त नहीं दिया. गवर्नर ने जहां भाजपा को समर्थन जुटाने के लिए 48 घंटे का वक़्त दिया. वहीं शिव सेना को एनसीपी, कांग्रेस का समर्थन जुटाने के लिए महज 24 घंटे मिले. शिव सेना ने कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की है. सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने चीफ़ जस्टिस से पूछा है कि याचिका को सुनवाई के लिए कब लिस्ट करना है. सूत्रों के मुताबिक इससे पहले शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस के नेताओं कपिल सिब्‍बल और अहमद पटेल से इस बारे में संपर्क भी किया.
शिवसेना के एमएलसी अनिल दत्‍तात्रेय ने पार्टी की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. शिवसेना ने याचिका में केंद्र, कांग्रेस और एनसीपी और महाराष्‍ट्र सरकार को प्रतिवादी बनाया है. याचिका में कहा गया कि गवर्नर उस वक्‍त तक ये तय नहीं कर सकते कि किसके पास बहुमत है जब तक सरकार बनाने का दावा करने वाली पार्टी को सदन में ऐसा करने का मौका नहीं दिया जाता.महाराष्ट्र में आगे की रणनीति पर चर्चा के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, अहमद पटेल और केसी वेणुगोपाल एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार से मिलने पहुंचे हैं.महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश वाली खबर आने के बाद राजभवन के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है. राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की है.शिवसेना की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर राज्यपाल के फैसले पर सवाल उठाए याचिका में कहा गया कि राज्यपाल से उन्होंने 3 दिन की मोहलत की मांग की थी जिसको राज्यपाल ने मना कर दिया. शिवसेना ने अपनी याचिका में कहा कि शिवसेना ने सरकार बनाने के लिए 3 दिन की मोहलत की मांग की थी और इस 3 दिनों के दौरान वह एनसीपी और कांग्रेस के साथ बातचीत कर समर्थन जुटाना चाह रहे थे लेकिन उनको यह मोहलत नहीं दी गई.महाराष्ट्र कांग्रेस की वरिष्ठ नेता रजनी पाटिल ने कहा कि राष्ट्रपति शासन लगने से कोई फर्क नहीं पड़ता. हमारे तीन नेता मुम्बई गए हैं, दो-दिन में फैसला हो जाएगा. अहम फैसला है.. इसलिए समय लग रहा है. चट मंगनी पट ब्याह की तर्ज पर फैसला नहीं हो सकता.महाराष्ट्र के राज्यपाल को एनसीपी ने दोपहर 12:30 बजे चिट्ठी लिखकर अपने पास बहुमत नहीं होने की जानकारी दी थी और 3 दिन का समय मांगा था. इसके बाद राज्यपाल ने एनसीपी को दिए शाम 8:30 बजे तक के समय के खत्म होने की प्रतीक्षा किए बिना ही चिट्ठी के आधार पर राज्य में किसी भी दल के सरकार नहीं बना पाने की स्थिति की रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेज दी. गृह मंत्रालय ने इस रिपोर्ट को केंद्रीय कैबिनेट के पास भेजा और उसके बाद केंद्रीय कैबिनेट की इमरजेंसी बैठक बुलाई गई इस बैठक में महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने को मंजूरी दे दी गई.शिवसेना ने राज्यपाल के फैसले पर सवाल खड़े किए हैं. शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा है कि राज्यपाल एनसीपी को दिए गए समय से पहले राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कैसे कर सकते हैं?
राज्यपाल ने संवैधानिक प्रक्रिया का मजाक उड़ाया: रणदीप सुरजेवाला
कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी पर हमला बोला है. सुरजेवाला ने कहा कि महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर राज्यपाल ने संवैधानिक प्रक्रिया का मजाक उड़ाया है. सुरजेवाला ने कहा कि राज्यपाल को सबसे पहले चुनाव के पहले बने गठबंधन बीजेपी-शिवसेना को सरकार बनाने का मौका देना चाहिए था. दूसरे नंबर पर राज्यपाल को कांग्रेस और एनसीपी को सरकार बुनाने के लिए बुलाना चाहिए था. क्योंकि ये दूसरा सबसे बड़ा पोस्ट पोल एलायंस था. अगर राज्यपाल सभी पार्टियों को अलग-अलग बुला रहे थे तो उन्होंने कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए क्यों नहीं बुलाया?
कांग्रेस के पास एक बेहतरीन मौका था महाराष्ट्र में सरकार बनाने का: आचार्य प्रमोद कृष्णन
महाराष्ट्र में राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति शासन की अनुशंसा पर कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णन ने कहा कि एनसीपी को दिए समय से पहले अगर राज्यपाल ने ये किया है तो ये लोकतंत्र की हत्या है. आचार्य प्रमोद कृष्णन ने कहा कि आलाकमान के आसपास कुछ ऐसे नेता हैं जो चुनाव नहीं लड़ते लेकिन पार्टी के फैसले में होते हैं और वो ही उल्टी-सीधी सलाह देकर पार्टी के साथ ये कर रहे हैं. कांग्रेस के पास एक बेहतरीन मौका था महाराष्ट्र में सरकार बनाने का, पार्टी को कल ही फैसला ले लेना चाहिए था. ये दुर्भाग्यपूर्ण हुआ.
महाराष्‍ट्र में लगा राष्‍ट्रपति शासन
महाराष्‍ट्र में पल-पल बदलते राजनीतिक घटनाक्रम के बीच राज्यपाल भगत सिंह कोश्‍यारी ने केंद्र के पास राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश भेज दी है. राज्यपाल ने राष्ट्रपति से संविधान की धारा 356 में राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफ़ारिश की. मौजूदा राजनीतिक संकट के मद्देनज़र मौजूदा सरकार आगे नहीं चल पाने की रिपोर्ट भेजी. बता दें कि कुछ देर पहले ही खबर आई थी कि महाराष्‍ट्र में राष्ट्रपति शासन को लेकर केंद्रीय कैबिनेट की अहम बैठक हुई जिसमें मोदी कैबिनेट ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की गवर्नर की सिफारिश को राष्ट्रपति के पास भेज दिया है. गौरतलब है कि नौ नवंबर को पिछले विधानसभा की मियाद खत्‍म हुई थी. इससे पहले राज्‍यपाल ने भाजपा, शिवसेना के बाद एनसीपी को आज शाम साढ़े आठ बजे तक समर्थन जुटाने का वक्‍त दिया था.लेकिन सूत्रों के मुताबिक संभवतया राज्‍यपाल को ऐसा लगा कि कोई भी दल या गठबंधन स्थिर सरकार बनाने के पक्ष में नहीं है, लिहाजा राष्‍ट्रपति शासन की सिफारिश की है.

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