संजय राउत कैसे जुटाएंगे 175 विधायक? देखना चाहता हूं अमित शाह की महारत:शरद पवार

एनसीपी नेता शरद पवार
महाराष्ट्र (maharashtra) में नई सरकार बनाने की कोशिशों के बीच एनसीपी ने मंगलवार को कहा था कि अगर शिवसेना भाजपा के साथ गठबंधन खत्म करने का ऐलान कर देती है, तो महाराष्ट्र में एक नए राजनीतिक विकल्प पर विचार किया जा सकता है.
मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) में नई सरकार को लेकर सस्पेंस बरकार है. नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) सुप्रीमो शरद पवार (Sharad Pawar) ने एक बार साफ किया कि वह महाराष्ट्र सरकार में हिस्सेदार नहीं बनने जा रहे हैं.बुधवार को राकांपा प्रमुख शरद पवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि भाजपा और शिवसेना को जनादेश मिला है। उन्हें ही सरकार बनाना चाहिए। हमें तो विपक्ष में बैठने का जनादेश मिला है। मैं चार बार मुख्यमंत्री रह चुका हूं। अब इसकी कोई इच्छा नहीं है।
भाजपा-शिवसेना के बीच तकरार पर पवार ने यह भी कहा, ‘‘शिवसेना और राकांपा की सरकार का सवाल ही कहां है। वे (भाजपा-शिवसेना) बीते 25 साल से साथ हैं। आज या कल, वे फिर से साथ आ जाएंगे। विकल्प एक ही है कि भाजपा और शिवसेना मिलकर सरकार बनाएं। राष्ट्रपति शासन को दूर रखने का यही एकमात्र तरीका है।’’ 24 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे, लेकिन सरकार के गठन को लेकर स्थिति अब तक साफ नहीं है। शिवसेना और भाजपा दोनों मुख्यमंत्री पद को लेकर अड़ी हुई हैं।
पवार से मिले थे राउत
बुधवार को शिवसेना सांसद संजय राउत ने राकांपा प्रमुख शरद पवार से मुलाकात की। राउत ने कहा, ‘‘पवार देश और राज्य के बड़े नेता हैं। वे महाराष्ट्र के राजनीतिक हालात को लेकर चिंतित हैं। इसी संबंध में उनसे चर्चा हुई।’’ इससे पहले संजय राउत ने कहा था, ‘‘हमारी ओर से न तो कोई प्रस्ताव आएगा और न जाएगा। जो पहले तय हुआ था उसी पर बात होगी। ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री पद पर चुनाव से पहले सहमति बनी थी। उसी के मुताबिक गठबंधन हुआ था।’’
हमने शिवसेना को प्रस्ताव भेजा: भाजपा
मंगलवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के घर हुई बैठक के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि जनता ने भाजपा-शिवसेना गठबंधन को जनादेश दिया है। हमने शिवसेना को प्रस्ताव भेजा है और हमें उनकी तरफ से कोई प्रस्ताव नहीं मिला। हम अगले 24 घंटे तक उनके जवाब का इंतजार करेंगे। हमारे दरवाजे खुले हैं। शरद पवार ने कहा कि भाजपा और शिवसेना (Shiv Sena) को सरकार गठन का जनादेश मिला है. सरकार बनाने की जिम्मेदारी इन दोनों पार्टियों की ही है. कांग्रेस और एनसीपी मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाएगी. वहीं, शिवसेना नेता संजय राउत से हुई मुलाकात को लेकर पूछे गए सवाल पर पवार ने कहा कि राउत से सियासी समीकरण को लेकर कोई बात नहीं हुई.
इससे पहले एनसीपी ने मंगलवार को कहा था कि अगर शिवसेना भाजपा के साथ गठबंधन खत्म करने का ऐलान कर देती है, तो महाराष्ट्र में एक नए राजनीतिक विकल्प पर विचार किया जा सकता है. एनसीपी से जुड़े सूत्रों ने बताया था कि उनकी पार्टी शिवसेना के साथ बातचीत आगे बढ़ाने से पहले चाहती है कि केंद्र सरकार में शिवसेना के इकलौते मंत्री अरविंद सावंत इस्तीफा दें.
इस बीच कांग्रेस भी सरकार बनाने की कोशिशों में लगी है. सुबह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मिलने उनके घर पहुंचे. अब सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे दोपहर बाद मुंबई पहुंच रहे हैं.
>> इस बीच भाजपा के सहयोगी रामदास अठावले का कहना है कि चाहे एनसीपी का समर्थन लेना पड़े या दोबारा चुनाव में जाना पड़े, शिवसेना को मुख्यमंत्री पद नहीं दिया जाएगा.
>>एनसीपी नेता शरद पवार से मुलाकात के बाद संजय राउत ने पत्रकारों से कहा, पवार देश और महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता हैं. वह राज्य की मौजूदा राजनीतिक हालात को लेकर चिंतित हैं. मुलाकात के दौरान हमारे बीच इसी मुद्दे पर बात हुई.’
>>नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) प्रमुख शरद पवार से मुलाकात के बाद संजय राउत अब उद्धव ठाकरे से मिलने मातोश्री पहुंचे हैं.
>>इससे पहले कांग्रेस नेता अहमद पटेल केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मिलने पहुंचे. अभी तक ये साफ नहीं हो पाया है कि दोनों नेताओं की मुलाकात की असल वजह क्या रही. हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए ये माना जा रहा है कि महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन को लेकर ही ये मुलाकात हुई है.
>>गडकरी से मुलाकात करके निकले अहमद पटेल से पत्रकारों ने इस बाबत सवाल किया, तो उन्होंने महाराष्ट्र को लेकर किसी भी चर्चा से साफ इनकार किया और कहा कि वह किसानों की समस्या को लेकर गडकरी से मिलने उनके घर गए थे.
नितिन गडकरी के घर के बाहर कांग्रेस नेता अहमद पटेल
>> सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे आज दोपहर मुंबई पहुंच सकते हैं.
>>माना जा रहा है कि अगर 9 नवंबर तक महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन को लेकर कोई हल नहीं निकलता है, तो वहां पर राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है. बता दें कि महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन की आखिरी तारीख 9 नवंबर है.
>>शिवसेना नेता संजय राउत (Sanjay Raut) का कहना है कि चुनाव से पहले जो प्रस्ताव दिया गया था, हम उसी प्रस्ताव पर राज़ी होंगे. पार्टी को कोई नया प्रस्ताव मंजूर नहीं है. महाराष्ट्र में सरकार बनाने की कोशिशों के बीच संजय राउत एनसीपी प्रमुख शरद पवार से मिलने के लिए रवाना हुए है.
>>संजय राउत ने कहा, ‘महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहलेभाजपा-शिवसेना के बीच 50-50 फॉर्मूले पर सहमति बनी थी. इस प्रस्ताव के बाद ही दोनों पार्टियां का गठबंधन हुआ था. अब चुनाव बाद भाजपा अपने वादों से पीछे हट रही है.
क्या है 50-50 फॉर्मूला?
दरअसल, महाराष्ट्र चुनाव से पहले बीजेपी और शिवसेना के बीच एक राजनीतिक ‘डील’ हुई थी. इसके तहत पांच साल की सरकार में ढाई साल का सीएम पद बीजेपी के पास और बाकी ढाई साल का सीएम पद शिवसेना के पास रहेगा. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद ही बीजेपी को 50-50 फॉर्मूले की याद दिलाई थी. ठाकरे ने साफ शब्दों में कहा था- ‘लोकसभा चुनाव में अमित शाह और देवेंद्र फडणवीस के साथ जो तय हुआ था, उससे न कम और न ज्यादा चाहिए. उससे एक कण भी अधिक मुझे नहीं चाहिए.’
विधानसभा में किसको कितनी सीटें?
महाराष्ट्र की 288 सीटों वाले विधानसभा में भाजपा को 105, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54, कांग्रेस को 44 और अन्य को 29 सीटें मिली हैं. सरकार बनाने के लिए बहुमत का आकंड़ा 146 है. इस तरह से भाजपा-शिवसेना गठबंधन के पास बहुमत के आंकड़े हैं, लेकिन मुख्यमंत्री पद और 50-50 फॉर्मूले पर बात नहीं बन पाने के कारण अभी तक नई सरकार का गठन नहीं हो पाया है.
राजनीतिक संकट की ओर बढ़ते महाराष्ट्र में क्या ये है BJP की चुप्पी का राज़?
महाराष्ट्र में वर्तमान दौर में भाजपा को सबसे ज्यादा खतरा शिवसेना से है
सूत्रों की मानें तो भाजपा के शीर्ष स्तरीय कुछ नेताओं का मानना है कि महाराष्ट्र में अगर भाजपा सरकार से बाहर हो जाती है तो लंबे दौर में उसका फायदा है, क्योंकि वर्तमान दौर में राज्य में भाजपा को सबसे ज्यादा खतरा शिवसेना से है.
महाराष्ट्र (Maharashtra) में चुनाव नतीजे आने के 12 दिन बाद भी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश नहीं किया है. भाजपा (BJP) और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह (Amit Shah) की कार्यशैली को देखें तो जो कुछ महाराष्ट्र में हो रहा है, वो इनकी कार्यशैली से मिलता नहीं है. ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर भाजपा इस बार सरकार बनाने में इतनी खामोश क्यों है. क्या भाजपा के शांत रहने के पीछे सिर्फ विधानसभा (Assembly) में विधायकों (MLA) का वोट गणित है या शीर्ष नेतृत्व किसी दूसरे प्लान पर काम कर रहा है.
भाजपा के शांत रहने की ये है असली वजह
सूत्रों की मानें तो भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के कुछ नेताओं का मानना है कि महाराष्ट्र में अगर भाजपा सरकार से बाहर हो जाती है तो लंबे दौर में उसका फायदा है, क्योंकि वर्तमान दौर में राज्य में भाजपा को सबसे ज्यादा खतरा शिवसेना से है. पिछले एक दशक में भाजपा देश में अकेली हिंदू हितैषी पार्टी के रूप में स्थापित हुई है, लेकिन शिवसेना बार-बार उसकी इस छवि पर हमला करती रहती है. लोकसभा चुनाव 2019 से ठीक पहले भी उद्धव ठाकरे ने अयोध्या का दौरा कर राम मंदिर मामले में भाजपा को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की थी, इसका मकसद सिर्फ सीटों के बंटवारे में भाजपा पर दबाव बनाना था. ऐसे में अगर शिवसेना एनसीपी और कांग्रेस के मदद से राज्य में सरकार बना लेती है तो उसकी हिंदूवादी छवि पर इसका सीधा असर पड़ेगा.
शिवसेना को भी पता है कि अगर एक बार कांग्रेस के समर्थन से सरकार बना ली तो उसका भविष्य खतरे में है
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि भले ही भाजपा को रोकने के नाम पर शिवसेना को कांग्रेस और एनसीपी का समर्थन मिल जाए, लेकिन ये सरकार चलने वाली नहीं है, यानी महाराष्ट्र में या तो राजनीतिक दलों में विद्रोह हो जाएगा या जल्दी विधानसभा चुनाव हो जाएंगे, ऐसे में इसका सीधा फायदा भाजपा को मिलेगा.
शिवसेना को भी है सरकार बनाने में डर
ऐसा नहीं कि इस गणित को सिर्फ बीजेपी नेता ही समझ रहे हैं. शिवसेना को भी पता है कि अगर एक बार कांग्रेस के समर्थन से सरकार बना ली तो उसका भविष्य खतरे में है, क्योंकि ये सरकार कुछ दिन ही चलेगी और यदि विधानसभा चुनाव जल्दी हो गए तो उसका परंपरागत वोट बैंक सिर्फ कुछ दिनों की सरकार के नाम पर खिसक जाएगा. शायद यही वो कारण है कि बार-बार मीडिया के सामने बड़े-बड़े दावे करने वाली शिवसेना ने अब तक राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के सामने जाकर सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश नहीं किया है.

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