जामिया हिंसा: अयोध्या फैसले बाद संविधान ‘जलाने’ वाले ही आज CAA विरोध में उतरे उसे बचाने

शाहीन बाग, प्रदर्शन
इस बातचीत में JNU का छात्र शर्जील अपनी बात को ये कहकर शुरू करता है कि वो चाहता हैं कि संविधान को जलाने का समारोह जेएनयू में आयोजित हो। वो समझाता है कि किस तरह आखिर ये फैसला एक बदलाव का समय है और जो मुस्लिम संविधान की वाह-वाही कर रहे हैं उन्हें संदेश भेजा जाना चाहिए है कि वे संविधान में यकीन नहीं करते। इसलिए इसे जला दिया जाना चाहिए।
शाहीन बाग में प्रदर्शन पर बैठी महिलाएँ
नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में शाहीन बाग पर हुए महिला प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया पर कई लोग वहाँ मौजूद महिलाओं की तारीफों के पुलिंदे बाँध रहे हैं। ट्वीट कर-करके हाईवे ब्लॉक करने वाली महिलाओं की तारीफ हो रही है। उन्हें नारी सशक्तिकरण का चेहरा बताया जा रहा है। इसी बीच रेहाना खातून नामक महिला की फोटो शेयर करके भी बताया जा रहा है कि वो अपने 20 दिन के बच्चे को लेकर इस कड़ाके की ठंड में केवल प्रदर्शन करने इसलिए आई हैं ताकि संविधान को बचाया जा सके। महिला का कहना है कि अगर वो ये प्रदर्शन नहीं करेगी, तो उनके बच्चे उससे पूछेंगे, “आखिर तुमने मेरे लिए किया ही क्या है।”
Charmy Harikrishnan ചാമി ഹരികൃഷ്ണൻ
@charmyh
Rehane Khatoun with her 20-day-old child protesting against CAA at Shaheen Bagh in the freezing cold of Delhi. “If I don’t protest, my child will ask one day, ‘What did you do for me?’”
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18:37 – 30 Dec 2019
Mariya Salim
@MariyaS87
20 day old Umme Habeeba,the youngest protestor @ Shaheen Bagh.Wen I asked her mother how she manages sitting in d cold having gone thru delivery 20 days back, she said, “..samvidhaan bachaana hai. Baithengey” @thewire_in @washingtonpost @AJEnglish @nytimes @times @TIME @BBCHindi
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23:10 – 30 Dec 2019
हालाँकि, जाहिर है कि शाहीन बाग के प्रदर्शन में शामिल महिलाओं की ऐसी तस्वीरों का प्रयोग सोशल मीडिया पर सीएए के ख़िलाफ़ खड़े लोगों की प्रतिबद्धता दर्शाने के लिए शेयर किया जा रहा है। लेकिन वामपंथी मीडिया गिरोह के हर ‘नाटक’ की तरह इस प्रदर्शन में भी एक ट्विस्ट है। जिसे समझने के लिए लिए हमें कुछ दिन पहले जाना पड़ेगा, जब राम मंदिर पर सर्वोच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुनाया था।
दरअसल, राममंदिर मामले में कोर्ट का फैसला आने के बाद जेएनयू छात्रों के बीच व्हॉट्सअप पर बातचीत हुई थी। जिसे पढ़ने के बाद आप वर्तमान में हो रहे प्रदर्शन की तस्वीर को सही से समझ पाएँगे और जान पाएँगे कि हाईवे जाम करने वालों के इस विरोध में कितनी सच्चाई है, इसे शुरू करने वाले लोगों का क्या उद्देश्य है?
ऊपर दिए चैट के स्क्रीनशॉट में देखा जा सकता है कि आज सड़के जाम करके संविधान को बचाने की बात करने वालों में शर्जील इमाम इस ग्रुप का हिस्सा है और जो अयोध्या पर फैसला आने के बाद संविधान को जलाने की बातें कर रहा है। साथ ही ये भी बोल रहा हैं कि वो सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सुनाए फैसले को नहीं जला सकते, क्योंकि वो बहुत लंबा है। जिसपर वसीम नाम का सदस्य शर्जील की बात का रिप्लाई देते हुए कहता है कि वो संवैधानिक होने की कोशिश नहीं कर रहा, लेकिन ऐसा करने से उनपर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
बता दें, इस बातचीत में शर्जील सिर्फ़ इतना ही नहीं कहता। वो अपनी बात को ये कहकर शुरू करता है कि वो चाहता हैं कि संविधान को जलाने का समारोह जेएनयू में आयोजित हो। वो समझाता है कि किस तरह आखिर ये फैसला एक बदलाव का समय है और जो मुस्लिम संविधान की वाह-वाही कर रहे हैं उन्हें संदेश भेजा जाना चाहिए है कि वे संविधान में यकीन नहीं करते। इसलिए इसे जला दिया जाना चाहिए।
इसके बाद वो लोगों संविधान खारिज करने की अपील करते हुए कहता है कि इसके लिए ज्यादा लोगों की आवश्यकता नहीं है। सिर्फ़ कुछ मुस्लिम और गैर-मुस्लिम इसके लिए काफी हैं। इस बीच एक सनी नाम का ग्रुप सदस्य उसे सलाह देता है कि तुम ऐसा जेएनयू के दरवाजे के बाहर क्यों नहीं करते। जिसपर शर्जील जवाब देता है कि उसकी इच्छा है कि ये काम कहीं पर भी हो, लेकिन बस हो। ऐसे में जब कोई दूसरा शख्स उसे कहता है कि वे कोर्ट के फैसले को जला सकते हैं, तो शर्जील कहता है कि वो संविधान जलाने की सलाह देगा, क्योंकि फैसला 1500 पेजों का है।
अब आखिर ये शर्जील है कौन?

शर्जील इमाम जेएनयू में मॉडर्न हिस्ट्री का छात्र है। इसने आईआईटी बॉम्बे से कम्प्यूटर साइंस की पढ़ाई की है। साथ ही द वायर, द क्विंट और फर्स्टपोस्ट जैसे वामपंथी प्रोपगेंडा फैलाने वाली वेबसाइट्स में बतौर स्तंभकार काम करता है। इसके अलावा अपने खाली टाइम में शर्जील भीड़ को भड़काकर दंगे फैलाने और सड़कें जाम करने का काम भी करता है।
जिसका उदाहरण फेसबुक पर मुस्लिम स्टूडेंट ऑफ जेएनयू द्वारा अपलोड की गई 14 दिसंबर 2019 की वीडियो है। जिसमें शर्जील सीएए के ख़िलाफ़ मुस्लिम लोगों को कहता नजर आ रहा है कि उनकी संपत्तियाँ जब्त कर ली जाएँगी और उन्हें पाकिस्तान भेज दिया जाएगा। इसके अलावा 40 सेकेंड की वीडियो में वो कुरान का हवाला दे देकर बताने की कोशिश कर रहा है कि आखिर किस तरह कुरान, संविधान से ऊपर हैं। वीडियो में वो बताता हैं कि वो किस तरह एक जेएनयू का छात्र है और दिल्ली में चक्काजाम करना चाहता है।
वीडियो में उसे कहते सुना जा सकता है कि वो चाहता है कि दिल्ली में चक्का जाम हो। जिसके लिए वो समुदाय विशेष को केंद्र में रखकर कहता है कि मुसलमान सिर्फ़ दिल्ली में ही नहीं, बल्कि… मुसलमान हिंदुस्तान के 500 शहरों में चक्का जाम कर सकता है। इसके बाद वो भीड़ को उकसाते हुए कहता है “क्या मुसलमानों में इतनी हैसियत भी नहीं कि उत्तर भारत के शहरों को बंद कराया जा सके।”
संविधान को फासीवादी बताते हुए शर्जील यहाँ फिर कुरान का हवाला देता है और बताता है कि ये कुरान में है अगर कोई तुम्हें घर से निकाले तो तुम उसे घर से निकालो।
9 मिनट की वीडियो में ही शर्जील भीड़ को समझा देता है कि आखिर कैसे लोगों को सड़कों पर उतरने से हिचकना नहीं चाहिए। वो बताता है कि ये दिल्ली हैं और पुलिस की हर कार्रवाई पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया आएगी। इसके अलावा शर्जील ये भी कहता है, “आग लगाने के लिए 2 काम करने होंगे… लाठी खाने के लिए तैयार रहना होगा और नंबर दो ऑर्गनाइज़ (संगठित) रहना होगा।”
इतना ही नहीं, शर्जील इस वीडियो में जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों को भी खारिज करता दिख रहा है। शर्जील अपनी कट्टरता के अनुरूप भीड़ को तैयार करते हुए भीड़ को उन लोगों से दूर रहने की सलाह देता है जो जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के लिए उन्हें बुलाते हैं। उसका कहना है, “अगर वो सच में हमारी परवाह करते हैं, तो उन्हें हमारे पास आना चाहिए। देखते हैं कौन आएगा।” इसके बाद वो भीड़ को अन्य समूहों के प्रति भड़काता है और कहता है कि आम आदमी पार्टी या AISA से उम्मीदें मत लगाइए। हम दिल्ली को बंद करना चाहते हैं, यहाँ दुकाने बंद करना चाहतें हैं, दूध की बिक्री बंद करना चाहते हैं।
अब सोचिए, 14 दिसंबर को जिस शर्जील की स्पीच में इतना जहर हो और जिसने दो मिनट भी मजहब से हटकर बात न की हो, जो दिल्ली बंद करने पर आमादा हो, सड़क जाम करवाने पर उतारू हो, जो कुरान का हवाला देकर बाकी सभी प्रदर्शनों को खारिज कर रहा हो… और जिसके कहने पर अगले ही दिन जामिया से 3 किलोमीटर दूर चलकर आए प्रदर्शनकारी वहाँ इकट्ठा हो जाएँ और कहें वे वहाँ संविधान को बचाने आए हैं। तो उस प्रदर्शन को क्या समझा जाएगा? ट्विटर पर 20 दिन के बच्चे के साथ उसकी माँ की तस्वीरें और संविधान बचाने के नामपर सड़कों पर बैठे लोगों की तस्वीर शेयर करके इस प्रोटेस्ट को गंभीरता रूप दिया जा रहा है।
लेकिन, जिसकी जड़ शर्जील जैसे लोग हैं और जिस प्रदर्शन का पूरा खाका एक कट्टरपंथी ने तैयार किया हो, उस समय शाहीन बाग का प्रोटेस्ट कितना वास्तविक लग सकता है और इसके पीछे का उद्देश्य क्या हो सकता है। ये खुद सोचिए…..
शर्जील लगातार 15वें दिन तक हाइवे ब्लॉक करने को अपने लिए गर्व की बात समझता हैं और लोगों को भड़काऊ बयान देकर उकसाना अपना फर्ज। लेकिन, उसे हीरो बनाने वालों को और उसके दिखाए रास्ते पर चलकर हाईवे पर बैठने वालों को ये याद रखने की जरूरत है कि शर्जील वही शख्स है जिसने एक महीने पहले अयोध्या फैसला आने पर संविधान को जलाने की बात की थी और अब मौक़ा देखकर इसे बचाने के नाम पर चक्काजाम करवा रहा है।

Nupur J Sharma
Editor, OpIndia.com since October 2017

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