डेढ़ हजार फालतू कानून हटाने को सुको जज अरूण मिश्र ने बांधे मोदी की तारीफों के पुल, बताया विजनरी लीडर

दूरदर्शी PM ने 1500 फालतू क़ानूनों को उखाड़ फेंका: सुप्रीम कोर्ट के जज ने मोदी की तारीफ़ों के बाँधे पुल

“राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जिन चुनौतियों का न्यायपालिका आज सामना कर रही है, वे समान हैं, और इस लगातार बदलते विश्व में न्यायपालिका का एक अति महत्वपूर्ण रोल है।

सुप्रीम कोर्ट के जज अरुण मिश्रा ने आज प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ़ करते हुए उन्हें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त ‘विजनरी लीडर’ कहा, “जिसकी दृष्टि वैश्विक है, और कार्यान्वयन – स्थानीय जरूरतों के अनुसार।”

तकरीबन 1500 गैर जरूरी कानूनों को रूल बुक से निकाल फेंकने के लिए जज मिश्रा ने पीएम मोदी और केंद्रीय विधि मंत्री रवि शंकर प्रसाद की तारीफ़ करते हुए कहा कि भारत आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वैश्विक समुदाय का जिम्मेदार और सबसे मित्रतापूर्ण संबंध रखने वाला देश है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अन्तर्राष्ट्रीय न्यायिक कॉन्फ्रेन्स-2020 पर ‘वोट ऑफ थैंक्स’ भाषण के दौरान ‘न्यायपालिका और बदलता विश्व’ पर बोलते हुए जज मिश्रा ने कहा, “राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जिन चुनौतियों का न्यायपालिका आज सामना कर रही है, वे समान हैं, और इस लगातार बदलते विश्व में न्यायपालिका का एक अति महत्वपूर्ण रोल है।”

जस्टिस मिश्रा जो सुप्रीम कोर्ट में जजों की वरिष्ठता में तीसरे नंबर पर आते हैं, ने मोदी द्वारा कॉन्फ्रेन्स के उद्घाटन करने पर उनका शुक्रिया अदा करते हुए, उन्हें “विजनरी लीडर” बताया।

न्यायधीश मिश्रा ने भारत के लोकतंत्र की तरीफ करते हुए कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और दुनिया यह देख आश्चर्य मानती है कि लोकतंत्र किस तरह इतने सहजता पूर्वक काम कर सकता है।

मीडिया ख़बरों के अनुसार, न्यायपालिका के आधुनिकीकरण की जरूरत पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हम अब इक्कीसवीं सदी में हैं और हमें न सिर्फ आज के लिए, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भी न्यायपलिका के लिए अत्याधुनिक ढाँचे की आवश्यकता है।

ANI

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 Supreme Court Justice Arun Mishra at International Judicial Conference 2020, in Delhi: India is a responsible & the most friendly member of international community under the stewardship of internationally acclaimed, visionary Prime Minister, Shri Narendra Modi.
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न्यायिक प्रणाली को लोकतंत्र की रीढ़ कहते हुए जस्टिस मिश्रा ने उसे सुदृढ़ करने को आज के समय की माँग करार दिया, उन्होंने कहा, “न्यायपालिका लोकतंत्र की रीढ़ है, तो वहीं विधायिका उसका हृदय और कार्यपालिका उसका दिमाग। राज्य के इन तीनों अंगों को अपनी-अपनी भूमिका निभाते हुए आपस में सामंजस्य बनाये रखने से ही लोकतंत्र सुचारू रूप में काम कर सकता है।”

भूमंडलीकरण पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था में कुछ लोगों के हाशिये पर चले जाने की स्थिति चिंताजनक है। इस कॉन्फ्रेन्स में 20 से ज्यादा देशों के जज शामिल हुए हैं।

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