प्रान्तीय संस्कृत सम्मेलन:संस्कृत विश्व की सभी भाषाओ की जननी: मण्डलायुक्त संजय

संस्कृत देश की आत्मा,संस्कृत न रहे तो कोई भी भाषा न रहे:यतिन्द्रानंद महाराज
सहारनपुर 23 नवम्बर, ! स्थानीय जनमंच में संस्कृत भाषा के उत्थान हेतु प्रान्तीय संस्कृत सम्मेलन द दून वैली पब्लिक स्कूल ने आयोजित किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि महामण्डलेश्वर यतेन्द्रानन्द महाराज,महामण्डलेशवर कैलाशानन्द महाराज,विशिष्ट अतिथि प्रताप सिंह (क्षेत्रीय संगठन मन्त्री संस्कृत भारती) ,प्रेमचन्द शास्त्री उपाध्यक्ष संस्कृत एकादमी,संजय कुमार कमिश्नर सहारनपुर मण्डल,जिलाधिकारी आलोक कुमार पाण्डेय,वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार प्रभु. ,द् दून वैली पब्लिक स्कूल के चेयरमैन राजकिशोर गुप्ता, प्रधानाचार्या श्रीमती सीमा शर्मा व निदेशक अनुराग सिंघल ने मां सरस्वती की मूर्ति के समक्ष पुष्प अर्पण व दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया
कार्यक्रम का प्रारम्भ में श्रीमती शर्मा ने संस्कृत के संदेश्श ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ एवं ’संस्कृत से संस्कृति’ पर विचार प्रस्तुत किए ! तत्पश्चात् स्कूल के बच्चों ने ‘संरस्वती वंदना वं ’भगवती सुर भारती’ पर शानदार नृत्य प्रस्तुति देकर हाॅल में उपस्थित सभी लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।
मण्डलायुक्त संजय कुमार ने प्रान्तीय संस्कृत सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि संस्कृत को हर व्यक्ति व बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक को सीखना चाहिये। उन्होने यह भी कहा कि संस्कृत की पढाई विद्यालयों में शुरुआत से ही करायी जानी चाहिये। हमें इस देश की सबसे प्राचीन संस्कृति का स्वरुप को एक जुट होकर आगे बढाना होगा। संस्कृत भाषा को आमजन तक पहुचाने हेतु उसे सरल स्वरुप में प्रस्तुत करना होगा।
उन्होने उपस्थित सभी शिक्षकगणों को आज के कार्यक्रम से संदेश लेकर जानेे व संस्कृत से बच्चो को रुबरु कराने की नसीहत दी। उन्होने कहा कि प्रतिदिन संस्कृत के श्लोको का उच्चारण करने से अस्थमा जैसी बीमारी नही होती है। संस्कृत को तृतीय भाषा के रुप में नही प्राथमिकता पर प्रचार-प्रसार करते हुए बढाना होगा। आज पूरे विश्व में चार बिलियन लोग अंग्रेजी बोलते है, जबकि संस्कृत भाषा उतनी बढोतरी नही कर पायी है। उन्होने कहा कि संस्कृत विश्व की सभी भाषाओ की जननी है। सभी भाषाओ की माता है।
जिलाधिकारी आलोक कुमार पाण्डेय ने अपने अत्यन्त प्रभावशाली भाषण में आधुनिकतम रिसर्चो के आधार पर संस्कृत भाषा की वैज्ञानिकता के प्रमाणित करते हुए संस्कृत को संस्कृति का प्राण बताया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार प्रभु ने अपने उद्बोधन में संस्कृत की सनातनता एवं वैज्ञानिकता पर प्रकाश डालते हुए सामाजिक परिदृश्य में संस्कृति की उपयोगिता सबके सामने रखी। उन्होने कहा कि संस्कृत परम्परा को बनाये रखना होगा।
महामण्डलेश्वर ने संस्कृत की गौरवशाली विजयगाथा बताई कि संस्कृत से ही संस्कृति है और इसी से संस्कार हैं संस्कृत अनादि है इसी लिए अनन्त है। सरस्वती की वीणा से निकले हुए शब्दों में नाद ब्रह्म ने ही जीवन शक्ति प्रदान की है इसलिए यह भाषा अनादि और अनन्त है। इसके मंत्रों में अनेक महारोगो को दूर करने की शक्ति है जिस पर अनेक शोध चल रहे हैं। संस्कृत का प्रचार एवं प्रसार विश्व के अनेक देशों में हो रहा है और संस्कृत भाषा एवं मंत्रोच्चार की शक्ति के उपर अनेक प्रकार के शोध निरन्तर चल रहे हैं ! यह विज्ञान के क्षेत्र में तकनीकि के क्षेत्र में निरन्तर ग्रहण की जा रही है। सबसे पहला विश्व में रिकार्डिंग वाक्य संस्कृत में ही था। यह भाषा लोक व परलोक दोनों का ज्ञान प्रदान करने वाली है। इसीलिए कहा गया है ओम मात्रे पृथ्विेये। उन्होने कहा कि संस्कृत ब्रहम है, चेतना है। अगर संस्कृत न रहेगी तो कोई भाषा भी न रहेगी। अंग्रेजी बाहर की पैंकिग है, अन्दर से सब सडे हुए है। संस्कृत को बढावा देने हेतु यह परम्परा चल पडी है अब इसी के साथ अन्य स्कूल व कालिजो में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित होंगे।
यतिन्द्रानन्द महाराज ने कहा कि विश्व गुरु बनना है तो संस्कृत को अपनाना होगा। संस्कृत इस देश की आत्मा है। हम सबको मिलकर संस्कृत को पूरे देश में स्थापित करना होगा। संस्कृत कभी मरने वाली भाषा नही है। संस्कृत पढने से स्मरण शक्ति बढती है। संसार की समस्त भाषाओं का जन्म संस्कृत से ही हुआ है। इसे खाली पठन पाठन की ही नही बल्कि इसको रोजगार परक भी बनाना होगा।
कार्यक्रम में अपर जिलाधिकारी वित्त वं राजस्व विनोद कुमार, नगराधीश पंकज कुमार वर्मा, जिला विद्यालय निरीक्षक अरुण कुमार दुबे, बेसिक शिक्षा अधिकारी रामेन्द्र कुमार, अधिवक्ता-पत्रकार- व्यापारीवर्ग, आई.एम.ए. से अनेक डाक्टर,आई.आई.ए.से प्रतिष्ठित उद्योगपति,अध्यापकगण एवं विद्यार्थियों ने तो भाग लिया ही, विशेष रूप से त्रिलोक चन्द गुप्ता वरिष्ठ आर.एस.एस विष्णु शुक्ला हरिशंकर गोनियाल , काजी नदीम साहब वं दारूलउलुम देवबन्द से भी अनेक मौलानाओं ,संस्कृत महा विद्यालय देवबन्द वं बेहट के संस्कृत विद्यालय से भी छात्रों ने विशेष रूप से वं शहर के सभी स्कूलों के छात्रों वं हिन्दी एवं संस्कृत के सभी अध्यापकों ने कार्यक्रम में भाग लिया। संचालन व संयोजन राजकुमार राजू व अनुराग सिंघल ने किया।

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