किसानों पर विपक्ष के दोहरे रूख़ पर रविशंकर प्रसाद का प्रहार,

Farmers Protest: रविशंकर प्रसाद बोले- विपक्ष का दिखा दोहरा रवैया, कांग्रेस ने किया था APMC एक्ट खत्म करने का वादा

किसानों की ओर से केंद्र सरकार से लगातार कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की जा रही है. वहीं विपक्ष दलों के जरिए भी किसानों के इस आंदोलन का समर्थन किया जा रहा है.

नई दिल्ली: केंद्र सरकार के जरिए लाए गए कृषि कानूनों का देश में विरोध देखने को मिल रहा है. किसानों की ओर से केंद्र सरकार से लगातार इन कानूनों को वापस लेने की मांग की जा रही है. वहीं विपक्ष दलों के जरिए भी किसानों के इस आंदोलन का समर्थन किया जा रहा है. इस बीच केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने किसान आंदोलन में कूदे विपक्षी दलों पर निशाना साधा है.
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विपक्षी दलों पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा है कि किसान आंदोलन में कूदे विपक्षी दलों का दोहरा और शर्मनाक रवैया सामने आया है. प्रसाद ने कहा है कि ये दल अपना राजनीतिक वजूद बचाने के लिए आंदोलन के साथ आए हैं. विपक्ष दलों का काम सिर्फ मोदी सरकार का विरोध करना ही रह गया है.
इस दौरान केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा,’कांग्रेस ने खुद अपने 2019 के चुनावी घोषणा पत्र में कृषि से जुड़े APMC एक्ट को समाप्त करने की बात कही थी.इन्होंने अंग्रेजी के घोषणा पत्र में लिखा कि APMC (Agricultural produce market committee) एक्ट को Repeal (भंग) करेंगे लेकिन दोहरा चरित्र यहां सामने आता है कि इन्होंने हिंदी के घोषणा पत्र में लिखा है कि इस कानून में संशोधन करेंगे, जो कि हम कर रहे हैं.’
वहीं आम आदमी पार्टी पर भी रविशंकर प्रसाद ने हमला बोला. उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल की सरकार ने 23 नवंबर 2020 को नए कानून (कृषि कानून) को नोटिफाई करके दिल्ली में लागू कर दिया है. हालांकि अब इधर आप विरोध कर रहे हैं और उधर आप गजट निकाल रहे हैं.

दोहरा चरित्र

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि हम विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस, NCP और उनके सहयोगी दलों के शर्मनाक दोहरे चरित्र को देश के सामने बताने आए हैं. जब इनका राजनीतिक वजूद खत्म हो रहा है तो अपना अस्तित्व बचाने के लिए ये किसी भी विरोधी आंदोलन में शामिल हो जाते हैं. रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि जो हमने किया, यूपीए की सरकार भी वही कर रही थी.

विरोध करने का मिला मौका

रविशंकर प्रसाद ने कहा, ‘किसान आंदोलन के नेताओं ने साफ-साफ कहा है कि राजनीतिक लोग हमारे मंच पर नहीं आएं. हम उनकी इन भावनाओं का सम्मान करते हैं लेकिन ये सभी कूद रहे हैं, क्योंकि इन्हें भाजपा और नरेंद्र मोदी का विरोध करने का एक और मौका मिल रहा है.’

किसान विरोधी होने का आरोप

बता दें कि कृषि कानूनों के विरोध में पिछले कई दिनों से किसान दिल्ली बॉर्डर पर डेरा डाले हुए हैं. वहीं आठ दिसंबर को किसानों ने भारत बंद का ऐलान किया है, जिसका कई विपक्षी पार्टियों ने समर्थन भी किया है. इसके साथ ही किसानों के मुद्दे पर विपक्ष लगातार मोदी सरकार पर हमलावर रुख अख्तियार किए हुए हैं और लगातार किसान विरोधी होने का आरोप लगा रहे हैं. इन सबके बीच अब बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विपक्षी पार्टियों को आड़े हाथ लिया है.
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जब बतौर कृषि मंत्री शरद पवार ने की थी APMC में ऐक्ट में बदलाव की वकालत, लिखी थी राज्यों को चिट्ठी
किसान आंदोलन का समर्थन कर रहे शरद पवार ने यूपीए के दौर में बतौर कृषि मंत्री रहते हुए APMC ऐक्ट में बदलाव के लिए राज्यों को चिट्ठी लिखी थी।

हाइलाइट्स:
कृषि कानून के खिलाफ किसानों का आंदोलन 12वें दिन में पहुंचा
बतौर कृषि मंत्री शरद पवार ने APMC ऐक्ट में बदलाव की मांग की थी
अब वह केंद्र के कानून के खिलाफ किसान आन्दोलन का समर्थन कर रहे हैं


शरद पवार (फाइल फोटो)

कृषि कानून (Farm Laws) के विरोध में किसान आंदोलन के समर्थन में देश की कई विपक्षी पार्टियां है। इनमें पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) भी शामिल हैं। हालांकि एक वक्त ऐसा भी था कि जब पवार यूपीए सरकार में मंत्री थे तो उन्होंने राज्यों के मुख्यमंत्रियों से कृषि उत्पाद विपणन समिति (APMC) कानून में संशोधन करने को कहा था जिससे निजी क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके। इस बीच, दिवंगत बीजेपी नेता अरुण जेटली की राज्यसभा में यूपीए के किसान कानून के खिलाफ दिए गए बयान का वीडियो भी वायरल हो रहा है।

पवार ने लिखी थी मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी

पवार के कई मुख्यमंत्री को लिखे गए कुछ चिट्ठी की विषयवस्तु साझा करते हुए सूत्रों ने बताया कि भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने भी APMC में उन्हीं प्रावधानों में बदलाव किए हैं, जिनके लिए पवार ने कृषि मंत्री रहते हुए प्रयास किए थे। बता दें कि NCP ने 8 दिसंबर को किसानों के भारत बंद का समर्थन किया है।

तब संसद में कृषि कानून की वकालत कर रही थी कांग्रेस, सिब्बल का वीडियो वायरल

शीला, शिवराज को लिखा था पत्र

सरकारी सूत्रों ने कहा कि पवार ने 2010 में दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को लिखे पत्र में कहा था कि देश के ग्रामीण इलाके में विकास, रोजगार और आर्थिक समृद्धि के लिए कृषि क्षेत्र को अच्छी तरह संचालित बाजारों की जरूरत होगी। राज्य APMC कानून में संशोधन की अपेक्षा जताते हुए उन्होंने पत्र में लिखा, ‘इसके लिए कोल्ड स्टोरेज समेत विपणन ढांचे में बड़े निवेश की जरूरत होगी। इसके लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी जरूरी है जिसके लिए एक उचित नियामक तथा नीतिगत माहौल चाहिए होगा।’ इसी तर्ज पर उन्होंने मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लिखे पत्र में खेतों से लेकर उपभोक्ताओं तक विपणन के ढांचे में निवेश की जरूरत पर जोर देते हुए कहा था कि निजी क्षेत्र को इस संबंध में अहम भूमिका निभानी होगी।

यूपीए ने भी कृषि कानून का किया था समर्थन

कृषि कानून (Krishi Kanoon) के विरोध में किसान आंदोलन का आज भले ही कांग्रेस समर्थन कर रही हो लेकिन जब यूपीए-2 सत्ता में थी तो संसद में कांग्रेस ने किसानों के लिए ऐसे ही कानून का समर्थन किया था। सदन में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने कहा था कि किसानों को उसकी फसल का उचित मूल्य मिलना जरूरी है। 2012 का सिब्बल का यह वीडियो काफी वायरल हो रहा है।

जब सदन में सिब्बल ने किया था किसान कानून का समर्थन
4 दिसंबर 2012 के लोकसभा की कार्यवाही के दौरान के वायरल वीडियो में सिब्बल सदन में किसानों की फसल के मार्केट में बेचने को लेकर बयान दे रहे हैं। सिब्बल बोल रहे हैं कि जब किसान के पास जब फसल होती है तो उनको मालूम नहीं होता है कि उन्हें किस मार्केट में जाना है। अगर मंडी जाता है तो 35-40 प्रतिशत सामान खराब हो जाता है और इस बीच में 8 लोग कमीशन एजेंट बिचौलिए होते हैं। उन्होंने कहा कि ये स्टडी की गई है कि बेचारे किसान का जो माल मार्केट में बिकता है उसका केवल 15-17 प्रतिशत किसान को जाता है, बाकी बिचौलियों को चला जाता है। विपक्ष के नेता और विपक्ष दलों को ये तय करना है कि वे किसान के साथ हैं या बिचौलिए के साथ।

विपक्ष पर आरोप लगाने वाली अब बीजेपी भी घिर रही है
बीजेपी किसान आंदोलन का समर्थन कर रहे विपक्ष पर आरोप लगा रही है कि वे राजनीति कर रहे हैं। लेकिन पूर्व केंद्रीय मंत्री बीजेपी के दिवंगत नेता अरुण जेटली का राज्यसभा में दिए गए एक भाषण का वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वह तत्कालीन सरकार के किसान नीतियों का विरोध कर रहे हैं। जेटली ने तत्कालीन यूपीए सरकार पर आरोप लगाए थे, ‘आप निजी क्षेत्र को इजाजत की बात कर रहे हैं, अमेरिका और यूरोप के किसानों की बात कर रहे हैं। वहां तो ये सालों से हैं, वहां के किसानों को तो इन कंपनियों ने मालामाल कर दिया होता। उनका किसान बड़ा धनाढ्य होता। वहां बड़े-बड़े स्टोर हैं, किसान से खरीदते हैं और सारा का सारा पैसा जो बिचौलिये की जेब में जाता था वह अब किसानों के पास जाता है लेकिन एक हकीकत ये भी है कि यूरोप अमेरिका 400 बिलियन डालर की सब्सिडी किसानों को देते हैं। यूरोप और अमेरिका अपने किसानो के प्रतिदिन 6000 हजार रुपया सब्सिडी देते हैं क्योंकि किसान को बाजार में भाव नहीं मिल रहा है। तो इन बड़े चेन इंटरनैशनल ने किसान की क्या स्थिति कर दी? जिस दुनिया में ये अनुभव लागू किया गया वहां, किसान को जीवित रखने के लिए 400 बिलियन डालर हर साल किसानों को दिया जाता है। क्या कारण है कि ये काम अमेरिका यूरोप में चला नहीं लेकिन भारत में बड़ा सफल हो जाएगा? इस देश के अंदर, इस देश में केवल एक एग्री उत्पाद हैं जिसमें बिचौलिया नहीं होता। बिचौलिया चला जाएगा और किसानों को बहुत फायदा हो जाएगा। ये अपने आप में पर्याप्त तर्क नहीं है। जब छोटे बिचौलिये निकलते हैं तो उसमें सुपर बिचौलिये शामिल हो जाते हैं और उस सुपर मिडिलमैन का नाम है वालमार्ट, टेस्कोस आदि। वो सबसे बड़ा मिडिलमैन में आता है।’

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