विकास दुबे एनकाउंटर: पुलिस कहानी की कमजोर कड़ियां और खड़े हैं 18 सवाल

जिसे निहत्थे गार्ड ने पकड़ा, उसे STF नहीं संभाल पाई? विकास दुबे के एनकाउंटर पर क्यों उठ रहे सवाल? जानिए

सोशल मीडिया पर लोग ये भी कह रहे हैं कि अपराधी विकास दुबे का अंत हो गया, अब उसके साथ अपराध में शामिल और उसको सरंक्षण देने वाले लोगों की जानकारी कैसे मिलेगी?
लखनऊ: कानपुर में 8 पुलिसकर्मियों की हत्या का मुख्य आरोपी गैंगस्टर विकास दुबे आज एनकाउंटर में मारा गया है. लेकिन पुलिस की इस कार्रवाई पर अब कई सवाल उठ रहे हैं. विपक्ष के अलावा सोशल मीडिया पर भी तमाम आम लोग पुलिस और सरकार से सवाल पूछ रहे हैं. सवाल उठना इसलिए भी लाजमी है क्योंकि विकास दुबे की गिरफ्तारी के बाद से ही उसे एनकाउंटर में मार दिए जाने की आशंका जताई जा रही थी. इस आशंका को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कल एक याचिका भी दायर की गई थी.

एनकाउंटर पर क्या सवाल उठ रहे?
सबसे पहला सवाल ये उठ रहा है कि उज्जैन में निहत्थे गार्ड ने विकास दुबे को पकड़ लिया, लेकिन STF के जवान उसे नहीं संभाल पाए?
विकास दुबे के पैर में रॉड लगी थी, वह ज्यादा तेज भाग नहीं सकता था. उसे ये बात पता थी, फिर भी वह भागने की कोशिश कैसे कर सकता है?
उसे पता था अगर भागा तो मार दिया जाएगा, फिर भी भागने की कोशिश क्यों की?
अगर उसे भागना ही होता, तो उज्जैन के महाकाल मंदिर में सरेंडर क्यों करता?
वह चलती गाड़ी में पुलिस जवानों के बीच में बैठा था, फिर उनके चंगुल से कैसे भाग निकला?
क्या इतने कुख्यात अपराधी के हाथ खुले थे? क्या पुलिस ने उसे हथकड़ी नहीं पहनाई थी, जो उसने पिस्तौल छीन ली?
इसके अलावा सोशल मीडिया पर लोग ये भी कह रहे हैं कि अपराधी विकास दुबे का अंत हो गया, अब उसके साथ अपराध में शामिल और उसको सरंक्षण देने वाले लोगों की जानकारी कैसे मिलेगें।
8 दिन 6 एनकाउंटर और 12 अनसुलझे सवाल, क्यों जवाब देने से बच रही यूपी पुलिस
ठीक एक सप्ताह पूर्व शुक्रवार (03 जुलाई की) सुबह कानपुर में 8 पुलिसकर्मियों की हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया। एक सप्ताह बाद शुक्रवार (10 जुलाई) की सुबह विकास दुबे मुठभेड़ में ढेर हो गया। इस एक सप्ताह में पुलिसकर्मियों की हत्या से लेकर विकास दुबे को अंजाम तक पहुंचाने की पूरी कहानी इतनी फिल्मी है कि लोगों को न तब विश्वास हो रहा था और न अब हो रहा। किसी फिल्मी कहानी की तरह इस पूरे कांड में इतने संयोग हैं कि सवाल खड़ा होना लाजमी है। वहीं लखनऊ से लेकर कानपुर और एसटीएफ तक के आला पुलिस अधिकारी भी पूरे घटनाक्रम की कड़ियों नहीं जोड़ पा रहे। आइये जानते हैं कौन से हैं वो 12 अनसुलझे सवाल जिनका जवाब देने से बच रही यूपी पुलिस।

1. विकास दुबे के खाकी वाले साथी

2-3 जुलाई को विकास दुबे में जिस तरह से 8 पुलिसकर्मियों को पूरी तैयारी के साथ मौते के घाट उतारा, उससे साफ है कि उसे पुलिस कार्रवाई की सूचना मिल चुकी थी। किसने दी थी ये सूचना और कौन हैं विकास दुबे के खाकी वाले साथी।

2. क्या बेनकाब होंगे सफेदपोश

विकास दुबे की पहुंच केवल यूपी पुलिस तक ही नहीं थी, बल्कि सत्ता के गलियारों में भी उसने गहरी जड़ें जमा रखीं थीं। लगभग हर राजनीतिक पार्टी से उसका गठजोड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि विकास दुबे की मौत के बाद, उसे शरण देने वाले सफेदपोश बेनकाब होंगे।

3.जिन पुलिस वालों से असलहा छीना उन पर क्या कार्रवाई हुई

यूपी पुलिस का दावा है कि गुरुवार तड़के फरीदाबाद से गिरफ्तार कर कानपुर लाए जा रहे विकास दुबे के साथी प्रभात मिश्रा ने कानपुर के पनकी के पास गाड़ी पंक्चर होने के बाद एक दरोगा की पिस्टल छीन ली और पुलिसवालों पर फायरिंग करते हुए भागने लगा। किसी पुलिसकर्मी से उसका हथियार छिनना बड़ी लापरवाही मानी जाती है। अमूमन इस तरह की घटना में पुलिस संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई करती है। जिस दरोगा से प्रभात ने पिस्टल छीनी उस पर क्या कार्रवाई हुई। इसी तरह विकास दुबे ने जिस पुलिसकर्मी से पिस्टल छीनी क्या उस पर भी कोई कार्रवाई होगी।

4. 24 घंटे के भीतर फिर पुलिसवाले से छीना हथियार

प्रभात मिश्रा एनकाउंटर के लगभग 24 घंटे के भीतर ही यूपी पुलिस के एक और दरोगा की पिस्टल छीन ली गई। ये दरोगा उस पुलिस टीम का हिस्सा था, जो 8 पुलिसकर्मियों की हत्या के आरोपी 5 लाख रुपये के इनामी बदमाश विकास दुबे को उज्जैन से सड़क मार्ग के जरिये कानपुर ला रही थी। 24 घंटे के भीतर एक ही गिरोह के दो बदमाशों को पुलिस अभिरक्षा में लाते वक्त वाहन खराब होना या दुर्घटनाग्रस्त होना और फिर पुलिसकर्मी का हथियार छीन फायरिंग करते हुए भागने का प्रयास करना क्या महज संयोग है।

5. कानपुर में ही हुए दो एनकाउंटर

आमतौर पर पुलिस अपराधियों की गिरफ्तारी और मुठभेड़ अपने क्षेत्र में ही दिखाती है, ताकि उसकी जांच और लिखापठी सब उनके दायरे में हो। अगर किसी अन्य जिले या राज्य में ऐसी मुठभेड़ हुई तो संबंधित इलाके की ही पुलिस जांच करेगी। ऐसे में प्रभात मिश्रा और फिर विकास दुबे दोनों का एनकाउंटर कानपुर में ही होना क्या ये भी महज संयोग है।

6. विकास को सड़क मार्ग से क्यों ला रही थी पुलिस

उज्जैन जाने से पहले यूपी पुलिस के आला अधिकारियों ने तय किया था कि विकास दुबे को चार्टड प्लेन से लाया जाएगा। फिर अचानक से उसे रात में सड़क मार्ग से क्यों लाया जा रहा था। सड़क मार्ग काफी लंबा है और इस दौरान विकास के भागने या उसके गिरोह द्वारा पुलिस टीम पर हमला करने का भी खतरा था।

7. मुठभेड़ से ठीक पहले वाहनों को क्यों रोका गया

उज्जैन से विकास को लेकर रवाना हुई पुलिस टीम के साथ मीडिया कर्मियों की भी गाड़ियां थीं। पुलिस ने उन्हें कई बार रोकने का प्रयास किया। मुठभेड़ से ठीक पहले घटनास्थल से काफी मीडियाकर्मियों सहित सभी निजी वाहनों को क्यों रोका गया था। गाड़ियों को रोकने से पहले विकास को ला रही पुलिस टीम की कुछ मीडिया कर्मियों से पीछा न करने को लेकर झड़प की भी खबरें हैं।

8. क्या गाड़ी भी संयोग से पलटी

पुलिस की गाड़ी सर्विस लेन पर जिस जगह पलटी है, वहां फेंसिंग में गैप देकर मुख्य लेन से सर्विस लेन पर जाने की जगह बनाई गई है। मतलब पुलिस की सर्विस लेन पर गाड़ी ठीक उसी जगह पलटी जहां पहले से डिवाइड और फेंसिंग में गैप था। क्या ये भी महज संयोग था।

9. पुलिस मुठभेड़ में मारे गए 6 वांछित

पुलिस को इसका प्रशिक्षण दिया जाता है कि भागते वक्त भी वह बदमाश के पैर में गोली मार सके। ताकि उसे जिंदा गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जा सके। इस कांड में आठ दिन में छह बदमाशों का पुलिस एनकाउंटर में मारा जाना। वो भी सभी को कमर के ऊपर गोली लगना। क्या ये भी क्या महज संयोग है।

10. क्या विकास की गाड़ी बदली गई थी?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उज्जैन से यूपी पुलिस विकास दुबे को टाटा सफारी गाड़ी में लेकर निकली थी। पुलिस की जो गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हुई, जिससे विकास दुबे के भागने की बात कही जा रही है वो टीयूवी 300 थी।न्यूज चैनलों पर टाटा सफारी में बैठे विकास दुबे की वीडियो फुटेज भी चल रही है। हांलाकि, कानपुर आईजी मोहित अग्रवाल ने विकास दुबे की गाड़ी बदलने की बात से इंकार किया है। अगर सुरक्षा की दृष्टि से गाड़ी बदली भी गई तो पुलिस इस क्यों छिपा रही।

11. उज्जैन में न तो एफआईआर हुई न कोर्ट में पेश किया

विकास दुबे उज्जैन में गिरफ्तार हुआ, वहां अधिकारियों ने पूछताछ की। गृहमंत्री ने बयान भी दिया और मध्य प्रदेश पुलिस के अधिकारियों ने भी प्रेसवार्ता की। उज्जैन में गिरफ्तारी के दौरान पुलिस को विकास दुबे के बैग से एक चाकू भी बरामद हुआ। बावजूद उसके खिलाफ न तो उज्जैन में एफआईआर दर्ज हुई और न ही स्थानीय कोर्ट में पेश कर उसे यूपी लाने के लिए ट्रांजिड रिमांड लिया गया।

12. मुठभेड़ की कड़ियां जोड़ने में नाकाम पुलिस

मुठभेड़ के बाद लखनऊ से लेकर कानपुर और यूपी एसटीएफ समेत यूपी पुलिस के आला अधिकारी मीडिया के सवालों से बचते रहे। पुलिस अधिकारी विकास दुबे मुठभेड़ की कड़ियां जोड़ने में क्यों नाकाम हैं।

विकास दुबे के एनकाउंटर की इनसाइड स्टोरी / मुठभेड़ स्थल से 5 किमी पहले मीडिया की गाड़ियों को रोका गया,15 मिनट बाद पुलिस की गाड़ी पलटने की सूचना आई
उज्जैन में पुलिस ने कोर्ट में पेश नहीं किया
विकास को उज्जैन में मध्य प्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार किया। इसके बाद यह चर्चा रही कि विकास को उज्जैन में मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा, लेकिन बाद में उसे सीधे यूपी एसटीएफ के हवाले कर दिया गया। गुरुवार दिनभर चर्चा रही कि विकास दुबे को एसटीएफ चार्टर्ड प्लेन से कानपुर ले जाएगी,लेकिन शाम तक तस्वीर पलट गई।बताया गया कि यूपी एसटीएफ विकास को सड़क मार्ग से ले जाएगी।
मीडिया की गाड़िया एसटीएफ के काफिल के पीछे थीं
यूपी एसटीएफ विकास दुबे को सड़क मार्ग से लेकर निकली तो मीडिया की कई गाड़ियां एसटीएफ के काफिल के पीछे थीं। मीडियाकर्मियों ने बताया कि रास्ते में तेज बारिश हो रही थी। मध्य प्रदेश में हाईवे पर एक ढाबे पर एसटीएफ की टीम ने खाना भी खाया। मीडियाकर्मी भी यहीं रुकेvतो एसटीएफ के अधिकारियों ने कहा किपुलिस की गाड़ियों कापीछा न करें।
रात करीब 3:15 बजे झांसी बार्डर पर एसटीएफ की टीम ने मीडिया के लोगों कोउसके काफिल से अलग करने की फिर कोशिश की,लेकिन मीडियाकर्मी पुलिस के काफिले के पीछे उरई, फिर कानपुर देहात तक लगे रहे।

कानपुर शहर की सीमा पर मीडियाकर्मी पुलिस के काफिले से अलग कर दिए गए
सुबह 6:00 बजे के आसपास कानपुर देहात के बारा टोल प्लाजा पर एसटीएफ का काफिला आगे निकल गया,लेकिन काफिले के पीछे चल रहे मीडियाकर्मियों की गाड़ी को सचेंडी पुलिस थाने की पुलिस ने रोक दिया। मीडियाकर्मियों ने पुलिस से बहस की तो कहा गया कि रास्ता सभी के लिए बंद कर दिया गया है। इसके बाद हाईवे पर बाकी वाहन भी रोक दिए गए।

फिर आई गाड़ी पलटने की सूचना
काफिले के रोके जाने पर मीडियाकर्मी पुलिस से बहस कर ही रहे थे कि करीब 15 मिनट बाद सूचना आती है कि विकास दुबे को ले जा रही एसटीएफ की गाड़ी पलट गई है। इस पर थोड़ी देर बाद स्थानीय थाना पुलिस और मीडियाकर्मी आगे बढ़ते हैं। करीब 30 मिनट का रास्ता तय करने के बाद मीडिया के लोग घटनास्थल पर पहुंचते हैं। वहां एसटीएफ की गाड़ी पलटी पड़ी थी।
पूछने पर एसटीएफ के लोगों ने बताया कि गाड़ी पलटने के बाद विकास दुबे ने भागने का प्रयास किया। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में वह घायल हो गया, उसे अस्पताल भेजा गया है। इसके थोड़ी देर बाद सूचना आती है कि अस्पताल में डॉक्टरों ने विकास को मृत घोषित कर दिया।
एसटीएफ के काफिले का पीछा कर रहे मीडियाकर्मियों का कहना है कि उज्जैन से कानपुर के रास्ते में कई बार मीडिया को अलग करने की कोशिश की गई, जिससे एनकाउंटर और पुलिस की कहानी पर सवाल उठ रहे हैं।
समाजवादी पार्टी ने अपने ट्वीटर पर लिखा, “विकास दुबे के साथ उन सभी सबूतों, साक्ष्यों का भी एनकाउंटर हो गया जिससे अपराधियों, पुलिस और सत्ता में बैठे उसके संरक्षकों का पदार्फाश होता! विकास के जरिए उन सभी को बचाने की कोशिश की है जो नेक्सेस में उसके मददगार रहे?आखिर उन सत्ताधीशों पर कार्रवाई का क्या जिनका नाम उसने स्वयं लिया.” इसके पहले सपा मुखिया अखिलेश यादव ने गाड़ी पलटने पर ट्वीट करके लिखा था, “दरअसल ये कार नहीं पलटी है, राज खुलने से सरकार पलटने से बचाई गयी है.”
पुलिस ने क्या बताया
कानपुर पुलिस पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार पी ने बताया, “विकास दुबे जो कि 5 लाख रुपए का वांछित अभियुक्त है. उसे उज्जैन से कानपुर गिरफ्तार कर लाया जा रहा था. तभी कानपुर के भौंती के पास पुलिस का वाहन दुर्घटना होकर पलट गया. जिसमें उसमें बैठे अभियुक्त और पुलिसकर्मी घायल हो गए. इसी दौरान विकास दुबे पुलिसकर्मी की पिस्टल छीनकर भागने लगा. पुलिस टीम ने उसका पीछा करके आत्मसमर्पण के लिए कहा लेकिन वह नहीं माना और पुलिस पर फायरिंग करने लगा. पुलिस ने भी आत्मरक्षा के लिए जवाबी फायरिंग की जिसमें वह घायल हो गया. इजाज के दौरान उसकी अस्पताल में मौत हो गयी.”
कानपुर के बिकरु गांव में दो जुलाई की रात को आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर देशभर में सुर्खियों में आया उत्तर प्रदेश का मोस्टवांटेड गैंगस्टर विकास दुबे गुरुवार सुबह उज्जैन के महाकाल मंदिर परिसर में मिला था. सात दिन की तलाश के बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. हालांकि, जिस कुख्यात अपराधी को लेकर कई राज्यों की पुलिस अलर्ट थी, उसकी गिरफ्तारी उतनी ही नाटकीय ढंग से हुई.

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