उत्तराखंड में कोरोना: हर तीसरे घंटे बढरही संख्या हुई 122,पूल टैस्टिंग शुरू

Coronavirus in Uttarakhand:122 हुई संक्रमितों की कुल संख्या
उत्तराखंड में कोरोना के 16 नए मामले, सबसे ज्यादा सात नैनीताल में
देहरादून,। उत्तराखंड में कोरोना का ग्राफ तेजी से बढ़ता जा रहा है। बुधवार को प्रदेश में नौ नए मामले सामने आए हैं, जिनमें एक-एक उत्तरकाशी,हरिद्वार व अल्मोड़ा,दो नैनीताल ,चार ऊधमसिंह नगर जिले में सामने आए हैं। इससे संक्रमित मरीजों का आंकड़ा बढ़कर 122 हो गया। हालत यह है कि हर तीसरे घंटे घंटे के रही रपट संख्या बढ़ा रही हैं। हालांकि इनमें से 55 लोग स्वस्थ होकर अपने घरों को लौट चुके हैं।
उत्तराखंड में दूसरे राज्यों से वापस लौटते प्रवासियों की आमद बढ़ने से स्थिति हर दिन विकट होती जा रही है। अब इनके संपर्क में आए लोग भी संक्रमित पाए जा रहे हैं। पिछले 11 दिन में प्रदेश में कोरोना के 59 मामले सामने आ चुके हैं। चिंताजनक पहलू यह कि धीरे-धीरे प्रदेश के सभी जिले वायरस की चपेट में आ रहे हैं।

बुधवार को नौ लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई है। उत्तरकाशी निवासी युवक 15 मई को अपने तीन साथियों के साथ दिल्ली से वापस लौटा था। संदिग्ध के आधार पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने युवक का सैंपल भेजा था,जिसमें कोरोना की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही हरिद्वार के रुड़की का एक जन भी संक्रमित पाया गया। वह कुछ दिन पहले ही मुंबई से लौटा था और उसका सैंपल ले उसे होम क्वारंटाइन कर दिया था।

मंगलवार को सामने आए सर्वाधिक 14 मामले

कोरोना के लिहाज से मंगलवार उत्तराखंड पर भारी पड़ा। प्रदेश में पहली बार एक दिन में 16 मामले सामने आए हैं। इनमें सर्वाधिक सात नैनीताल जिले में हैं। इसके अलावा बागेश्वर और पौड़ी जिले में दो-दो और ऊधमसिंह नगर में तीन केस पॉजिटिव आए हैं। साथ ही एक – एक मामला उत्तरकाशी और रुड़की का है।
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार मंगलवार को 429 सैंपल की रिपोर्ट मिली है। इनमें 415 की रिपोर्ट नेगेटिव है। पौड़ी में कोरोना संक्रमित मिला नैनीडांडा ब्लॉक निवासी 19 वर्षीय युवक दस मई को गुरुग्राम से हल्द्वानी पहुंचा था। 11 मई की रात वह हल्द्वानी से हरिद्वार आया। 13 मई को वह हरिद्वार से कोटद्वार के दशहरा मैदान में पहुंचा,जहां से स्वास्थ्य जांच के बाद उसे बस से घर भेजा गया था। इसमें 22 यात्री सवार थे। 17 मई को उसका सैंपल जांच को भेजा गया था।
बताया गया कि घर पहुंचने पर युवक नौ लोगों के संपर्क में आया,जिन्हें क्वारंटाइन कर दिया गया। पूरी ग्राम सभा सील कर दी गई है। उसके संपर्क में आए लोगों को भी तलाशा जा रहा है। पौड़ी जिले के श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में भर्ती युवक की रिपोर्ट भी देर शाम पॉजिटिव मिली। टिहरी जिले के कीर्तिनगर निवासी युवक 10 मई को गुरुग्राम से आया था।
सीमांत जनपद उत्तरकाशी में कोरोना का एक और पॉजीटिव केस सामने आया है। युवक 16 मई को दिल्ली से आया था। दिल्ली से तीन अन्य साथियों के साथ एक प्राइवेट वाहन में उत्तरकाशी पहुंचा था। संदिग्धता के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने युवक का सैंपल भेज युवक को जिला अस्पताल में आइसोलेशन पर रखा।
उधर,कुमाऊं में भी कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ी है। एक ही दिन में 12 मामले पॉजिटिव आए हैं। पॉजिटव केस में ऊधमसिंहनगर के किच्छा में एक 19 वर्षीय युवती और 13 वर्षीय किशोर की रिपोर्ट भी पॉजीटिव आई है। ये दोनों चार दिन पहले कोरोना संक्रमित मिले युवक के भाई-बहन हैं। युवक गुरुग्राम से लौटा था। इसके अलावा बाजपुर निवासी एक व्यक्ति भी संक्रमित मिला है। बागेश्वर और नैनीताल में मिले संक्रमित लोग भी मुंबई,गुरुग्राम और अन्य शहरों से लौटे थे। प्रदेश में अब तक एक महिला की कोरोना के चलते मौत भी हो चुकी है।
अब तक का रिकॉर्ड टूटा
कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ने से उत्तराखंड में हालात चिंताजनक हो रहे हैं। मंगलवार को प्रदेश में 14 मामले सामने आए। मंगलवार को पौड़ी में दो,ऊधमसिंह नगर में तीन,नैनीताल में सात,बागेश्वर जनपद में दो लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई । प्रदेश में पहला कोरोना संक्रमित मामला 15 मार्च को आया था। इसके बाद से 16 मई को नौ संक्रमित मामले मिले थे,लेकिन मंगलवार को सबसे ज्यादा 14 संक्रमित मामले मिले।
कोरोना के बढ़ते मामलों को देख उत्तराखंड में शुरू हुई पूल टेस्टिंग
बढ़ते मामले देख अब कोरोना के संदिग्ध मरीजों की पूल टेस्टिंग का निर्णय लिया गया है। दून मेडिकल कॉलेज ने पूल टेस्टिंग शुरू कर दी। हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में भी जल्द शुरू करने की तैयारी है। इससे हर दिन करीब डेढ़ हजार सैंपल की जांच मुमकिन होगी। अभी हर दिन औसतन 300 से 350 सैंपल की ही जांच हो पा रही है।

पंत ने बताया कि पूल टेस्टिंग में पांच संदिग्ध मरीजों के सैंपल लेकर एक सुपर सैंपल बना दिया जाता है। सुपर सैंपल की जांच रिपोर्ट निगेटिव आने पर उसे अलग किया जाता है। निगेटिव रिपोर्ट का मतलब यही है कि मरीजों में कोरोना संक्रमण नहीं है।

सुपर सैंपल की रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर उसमें शामिल सभी पांच नमूनों की दोबारा जांच कर देखा जाता है कि सभी कोरोना वायरस से संक्रमित हैं या नहीं। अभी कोरोना के संदिग्ध मरीजों के लैब भेजे जा रहे नमूनों को एक-एक कर जांचा जा रहा था। जांच में पांच से आठ घंटे लग रहे हैं,जबकि पूल टेस्टिंग से इतने ही समय में एक साथ पांच नमूनों की जांच हो सकेगी।

इनकी भी होगी जांच

-ऐसे लोग जो पिछले 14 दिनों में विदेश से आए हैं और उनमें इंफ्लूएंजा जैसे लक्षण (बुखार-खांसी,सांस लेने में तकलीफ आदि) दिख रहे हैं।

-लैब में मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर उसके संपर्क में आए सभी लोगों की जांच होगी।

-कंटेनमेंट जोन में स्वास्थ्य व अन्य अति आवश्यक कामों में लगे कर्मचारी जिनमें इंफ्लूएंजा जैसे लक्षण दिख रहे हैं।

-ऐसे मरीज जो एक्यूट रेस्पिरेटरी इंफेक्शन की गंभीर स्थिति से जूझ रहे हैं।

-मरीज के सीधे संपर्क में आए लोग जिनमें लक्षण नहीं भी दिख रहे हैं, की मुलाकात के 5 से 10 दिनों में जांच होगी।अभी तक ऐसे मामलों में पांच से 14 दिन के बीच जांच होती थी।
-हॉटस्पॉट और कंटेनमेंट जोन में इंफ्लूएंजा जैसे लक्षण के लोग।
-इंफ्लूएंजा के मरीज और ऐसे लोग जिनमें लक्षण दिखने शुरू हो रहे हैं।
-इंफ्लूएंजा के लक्षण वाले प्रवासी या बाहर से लौटने वाले मजदूर की जांच तबीयत खराब होने के 7 दिन में होगी।

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने बदली जांच की रणनीति

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) ने जांच की रणनीति में बदलाव किया है। अपर सचिव पंत ने इसकी जानकारी दी। बताया कि अब ऐसे लोगों की भी जांच होगी जो मरीज के सीधे संपर्क में आए हैं,लेकिन उनमें लक्षण नहीं दिख रहे। वह भी पांच से 10 दिन में। कंटेनमेंट जोन में काम कर रहे कर्मचारी जांच के दायरे में है। उनकी भी जांच होगी,जो तीव्र श्वसन संक्रमण से ग्रसित हैं।

दून अस्पताल में पहले दिन बनाए गए 23 सुपर सैंपल

दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर आशुतोष सयाना ने बताया कि पहले दिन पांच-पांच सैंपल के 23 सुपर सैंपल बनाए गए। आगे इसका दायरा बढेगा। रियल टाइम पेरीमिरेज चेन रिएक्शन (पीसीआर) जांच से मरीज के निगेटिव और पॉजिटिव होने का पता चलता है।

दो तरह के हैं कोरोना संक्रमित मरीज

एसिम्पटोमैटिक: ये ऐसे मरीज हैं, जिनकी रोगों से लड़ने की क्षमता यानी इम्युनिटी अधिक है और कोविड-19 के लक्षण नहीं दिख रहे ।

सिम्पटोमैटिक: जिनमें खांसी, बुखार और सांस लेने में तकलीफ जैसे कोविड-19 के लक्षण दिख रहे हैं, उन्हें सिम्पटोमैटिक कहते हैं।

कोरोना के खिलाफ जंग में चुनौतियों का पहाड़

कोरोना के खिलाफ जंग में उत्तराखंड जहां जीत के करीब पहुंचता दिख रहा था,अब सामने मुसीबतों का पहाड़ खड़ा है। अप्रैल प्रथम सप्ताह में जमातियों ने सिस्टम की मुश्किलें बढ़ाईं और अब प्रवासियों के बढ़ती आगमन से वही स्थिति दोबारा आ खड़ी हुई है। इससे न सिर्फ सरकारी मशीनरी की बेचैनी बढ़ गई है,बल्कि सांख्यिकी भी गड़बड़ाई है। मरीजों के ठीक होने का ग्राफ नीचे लुढ़क गया है, मरीजों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है।

प्रदेश में बीती 15 मार्च को कोरोना का पहला मामला सामने आया था। इसके बाद अगले डेढ़ माह तक संक्रमण ग्राफ में उतार-चढ़ाव आता रहा। इस बीच ऐसे भी पल आए,जब प्रदेश कोरोना के खिलाफ जंग में जीत के करीब दिखने लगा। लेकिन लॉकडाउन-3 में मिली छूट ने उम्मीद पर पानी फेर दिया।
कुछ समय पहले तक राज्य राष्ट्रीय औसत की तुलना में बेहतर स्थिति में था,अब परिस्थितियां बदलने लगी हैं। विभिन्न शहरों में फंसे प्रवासियों की घर वापसी शुरू होते ही मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ने लगी। पिछले दो माह से पर्वतीय जिलों में शांति थी,वहां भी अब भय है। रोज किसी न किसी पर्वतीय क्षेत्र से नये कोरोना मरीज सामने आ रहे हैं। इस बीच सरकार सैंपलिंग का दायरा बढ़ा रही है। जितनी ज्यादा जांच होगी मरीज भी उसी अनुपात में बढ़ेगी।

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