PETA की बकरीद पर पशुओं की अवैध ‘कुर्बानी’ रोक की मांग

प्रतीकात्मक तस्वीर

बकरीद पर 11 ऊंटों की होनी थी कुर्बानी,  जब्त, बकरीद से पहले पशुधन निर्यात पर सरकार ने लगाई रोक,पशुओं के हितों के लिए काम करने वाली संस्था PETA ने बकरीद के अवसर पर होने वाले जानवरों के अवैध तरीके से कुर्बानी को रोकने की मांग की है. पेटा ने कहा है कि पशुओं का वध सिर्फ लाइसेंस वाले बूचड़खाने में किया जा सकता है.

नई दिल्ली, 10 अगस्त ! पशुओं के हितों के लिए काम करने वाली संस्था PETA ने सभी राज्य सरकारों को पत्र लिखकर मांग की है कि बकरीद के अवसर पर होने वाले पशुओं की अवैध तरीके से कुर्बानी को रोका जाए. पेटा ने कहा है कि पशुओं का वध सिर्फ लाइसेंस वाले बूचड़खाने में ही होना चाहिए.

बकरीद पर 11 ऊंटों की होनी थी कुर्बानी,  जब्त

11 camels caught before bakrid  giridih गिरिडीह के खैरोन गांव से मंगलवार की देर शाम एस डी ओ पवन कुमार मण्डल के निर्देश पर बीडीओ शशिभूषण वर्मा व सीओ सुनीता कुमारी के नेतृत्व में छापेमारी कर 11 ऊंटों को जब्त किया. इन ऊंटों को बकरीद में कुर्बानी देने के लिए लाया गया था.बता दें कि ऊंट को राज्यकीय पशु घोषित किया गया है. माननीय उच्च न्यायलय राजस्थान के द्वारा इसके खरीद-बिक्री व हत्या पर पूर्व से हीं रोक लगाया गया है, जिस कारण झारखण्ड में भी रोक लगायी गयी है. इसी को लेकर मंगलवार को सरिया अनुमण्डल सभागार में आयोजित शांति समिति की बैठक में अनुमण्डल पदाधिकारी पवन कुमार मण्डल ने स्पष्ट किया था कि ऊंट की खरीद बिक्री व कुर्बानी देने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.कल देर शाम को सरिया के खैरोन गांव में दर्जन भर ऊंट कुर्बानी के लिए लाए जाने की गुप्त सूचना प्रशासन को मिली, जिस पर फौरन कार्रवाई करते हुए सरिया पुलिस व प्रखंड पदाधिकारी ने संयुक्त रूप से छापेमारी कर 11 ऊंटों को जब्त किया. इस बाबत एस डी ओ श्री मण्डल ने कहा कि जब्त ऊंटों को वापिस राजस्थान सरकार को सौंपने की प्रक्रिया की जाएगी एवं दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी.छापेमारी दल में अंचल पुलिस निरीक्षक आर एन चौधरी, थाना प्रभारी विकास पासवान, ए एस आई उपाध्याय एवं दर्जनों जवान शामिल थे.

पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों, पुलिस महानिदेशक, और पशुधन विभाग सहित कई अन्य विभागों को लेटर लिखकर यह अनुरोध किया है कि बकरीद से पहले पशुओं के अवैध व्यापार और हत्याओं को रोकने के लिए सभी संभव कदम उठाए जाएं.पेटा ने एक बयान में कहा, ‘राज्य सरकारों का यह कर्तव्य है कि देश के पशु संरक्षण कानूनों को लागू करें और इसका पालन कराएं. पेटा की यह मांग है कि सभी अथॉरिटी जानवरों के कटने पर रोक लगाएं.’

पेटा इंडिया ने कहा है कि गोश्त के लिए पशुओं की हत्या और उनकी कुर्बानी से संबंधित दो मामलों पर 17 फरवरी, 2017 और 10 अप्रैल 2017 के आदेश के द्वारा सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पशुओं का वध केवल आधिकारिक लाइसेंस वाले बूचड़खाने में ही किया जा सकता है. इसलिए नगर निगमों को इस आदेश का पालन कराना ही होगा.’  पेटा ने कहा कि जानवरों की हत्या और कुर्बानी ‘पशुओं के प्रति कूरता नियम, 2001, खाद्य सुरक्षा एवं मानक रेगुलेशन, 2011 के भी खिलाफ है. खाद्य सुरक्षा एवं मानक रेगुलेशन, 2011 के मुताबिक गोश्त के लिए ऊंट की हत्या पर रोक है, जबकि बकरीद के दौरान इनकी भी कुर्बानी दिए जाने का चलन है.पेटा ने लोगों से अनुरोध किया है कि धार्मिक समारोह के नाम पर जानवरों की हत्या न करें. पेटा ने कहा है कि त्योहार के दौरान पशुओं की ढुलाई में पशु परिवहन नियम, 1978 का भी उल्लंघन किया जाता है.

बकरीद से पहले पशुधन निर्यात पर सरकार ने लगाई रोक

बकरीद के अवसर पर खाड़ी देशों को पशुधन का निर्यात काफी बढ़ जाता है. लेकिन सरकार ने इसके पहले ही पशुधन निर्यात पर अनिश्‍िचतकालीन रोक लगा दी.

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो-रायटर्स)प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो-रायटर्स)

देश में सभी बंदरगाहों से पशुधन निर्यात पर सरकार ने अनिश्चितकालीन रोक लगा दी है. जानवरों के हितों के लिए काम करने वाली संस्थाओं की मांग को देखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है.

केंद्रीय जहाजरानी मंत्रालय ने सभी बंदरगाहों से पशुधन निर्यात रोकने का निर्णय लिया है. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, केंद्रीय जहाजरानी मंत्रालय के राज्यमंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा, ‘हमें यह जानकारी मिली कि डीपीटी के टूना पोर्ट (दीनदयाल पोर्ट ट्रस्ट, कच्छ) से भेड़ों और बकरियों का निर्यात किया जा रहा था. पशुधन की ऐसी एक खेप दुबई जा रही थी. इसका मतलब है कि उन्हें वध के लिए निर्यात किया जा रहा था.’

गौरतलब कि पशुओं की ऐसी बड़ी खेप ईद-उल-अजहा यानी बकरीद से पहले संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जाती है. यूएई में इस त्योहार के अवसर पर ऊंटों और सांड़ों के अलावा बड़े पैमाने पर बकरियों और भेड़ों की कुर्बानी दी जाती है. बकरीद इस साल 22 अगस्त को मनाया जा सकता है.जीव दया प्रेमियों और जानवरों के अधिकारों के लिए काम करने वाली कई संस्थाओं ने इस निर्यात के बारे में शिकायत की थी. कुछ दिनों पहले ही नागपुर एयरपोर्ट से होने वाले ऐसे ही पशुधन निर्यात खेप का लोगों ने विरोध किया था. इसलिए सरकार ने सभी जगह से होने वाले पशुधन निर्यात पर पूरी तरह से रोक लगा दी है. गुजरात सरकार ने भी ऐसी ही मांग की थी.दिलचस्प यह है कि मंत्रालय ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है, जब एनडीए सरकार के दौरान ही देश से पशुधन निर्यात में काफी तेजी आई थी. पशुधन निर्यात साल 2013-14 के 69.30 करोड़ रुपये से बढ़कर साल 2016-17 में 527.40 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. देश से खासकर भेड़ों और बकरियों का निर्यात होता है.

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