सीएए , जेएनयू हिंसा सहित कई मुद्दों पर विपक्षी दलों की बैठक में बसपा, आपा, टीएमसी, शिवसेना नहीं 

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की तरफ से बुलाई गई इस बैठक बहुजन समाज पार्टी, आम आदमी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस शामिल नहीं हुई. सीपीआई, सीपीएम, आरजेडी, एनसीपी, जेएमएम सहित अन्य दलों के नेता इसमें शामिल हुए.

पार्लियामेंट एनेक्सी में हुई बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल, एके एंटनी, केसी वेणुगोपाल, गुलाम नबी आजाद और रणदीप सुरजेवाला, सीपीएम के सीताराम येचुरी, सीपीआई के डी राजा, जेएमएम के नेता और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, एनसीपी के प्रफुल्ल पटेल, आरजेडी के मनोज झा, नेशनल कांफ्रेस के हसनैन मसूदी और आरएलडी के अजित सिंह मौजूद थे.

नई दिल्ली: कांग्रेस और कई दूसरे विपक्षी दलों ने बैठक की जिसमें संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के विरोध में हुए प्रदर्शनों और कई यूनिवर्सिटी कैंपस में हिंसा के बाद पैदा हुए हालात, आर्थिक मंदी और दूसरे मुद्दों पर चर्चा की गई. ये बैठक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की तरफ से बुलाई गई थी.इ

बैठक में कौन आया और कौन नहीं?
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा बुलाई गई इस बैठक में 20 दलों के नेता शामिल हुए. इस बैठक में सीएए के विरोध में हुए प्रदर्शनों और कई विश्वविद्यालय परिसरों में हिंसा के बाद पैदा हुए हालात, आर्थिक मंदी तथा कई अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई.

पार्लियामेंट एनेक्सी में हुई बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, माकपा के सीताराम येचुरी, भाकपा के डी राजा, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, आरजेडी के मनोज झा, नेशनल कांफ्रेस के हसनैन मसूदी और आरएलडी के अजित सिंह मौजूद थे.

इसके साथ ही आईयूएमएल के पी के कुन्हालीकुट्टी, लोकतांत्रिक जनता दल के शरद यादव, पीडीपी के मीर मोहम्मद फैयाज, जद (एस) के डी कुपेंद्र रेड्डी, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के जीतन राम मांझी, रालोसपा के उपेंद्र कुशवाहा तथा कई अन्य दलों के नेता भी बैठक में शामिल हुए.

इस बैठक में बीएसपी, आम आदमी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना शामिल नहीं हुईं.

सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में सीएए विरोधी प्रदर्शनों, जेएनयू, जामिया मिल्लिया इस्लामिया और कुछ दूसरे यूनिवर्सिटी में हिंसा के बाद के हालात, आर्थिक मंदी, बेरोजगारी और कृषि संकट पर चर्चा हुई. इस बैठक में संसद के आगामी बजट सत्र में नरेंद्र मोदी सरकार को घेरने की रणनीति पर भी चर्चा किए जाने की खबर है.नागरिकता संशोधन कानून(Citizenship Amendment Act) के खिलाफ सोमवार को दिल्ली में विपक्षी दलों ने एकता दिखाने के लिए एक बैठक बुलाई थी। कांग्रेस की बुलाई इस बैठक में तृणमूल कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी, आम आदमी पार्टी, शिवसेना, समाजवादी पार्टी और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम इस बैठक में शामिल नहीं हुए। 

शिवसेना ने कहा- मीटिंग को कोई जानकारी नहीं

शिवसेना ने सोमवार को दावा किया कि उसे दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की बुलाई गई विपक्षी पार्टियों की बैठक के बारे में कोई जानकारी नहीं है। शिवसेना के ग्रुप लीडर इन लोक सभा विनायक राउत ने आईएएनएस को बताया कि हमें इस तरह की बैठक की जानकारी नहीं है। हमें इसके लिए आमंत्रित नहीं किया गया है। इसलिए हमने अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया है।

आम आदमी पार्टी (आपा) ने भी विपक्षी दलों की बैठक में शामिल होने से मना कर दिया है। समाचार एजेंसी एएनआइ ने जानकारी दी कि देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर चर्चा करने के लिए कांग्रेस द्वारा आहूत आज की विपक्षी बैठक में शामिल नहीं होगी।

AAP ने कहा- ऐसी किसी बैठक की जानकारी नहीं

AAP के सांसद संजय सिंह ने कांग्रेस द्वारा बुलायी गयी आज की विपक्षी बैठक में शामिल नहीं होने पर कहा कि हमें ऐसी किसी भी बैठक के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इसलिए, ऐसी किसी बैठक में शामिल होने का कोई मतलब नहीं है जिसके बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है।

विपक्षी दलों की मीटिंग में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बसपा सुप्रीमो मायावती भी शामिल नहीं हुईं। ममता बनर्जी ने जहां पहले ही इस बैठक में शामिल ना होने की बात कह दी थी, वहीं मायावती ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी, इस बैठक में शामिल नहीं होगी। वहीं बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने ट्वीट करते हुए बताया कि बसपा आज कांग्रेस द्वारा बुलाए गए विपक्षी दलों की बैठक में शामिल नहीं होगी।बैठक में सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) पर देश को गुमराह किया है.उन्होंने कहा, ”सरकार ने उत्पीड़न का ढीला शासन किया, नफरत फैलाई और हमारे लोगों को सांप्रदायिक आधार पर विभाजित करने की कोशिश की. संविधान को कमजोर किया जा रहा है और शासन के उपकरणों का दुरुपयोग किया जा रहा है.” कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘‘सरकार ने दमन चक्र चला रखा है, नफरत फैला रही है और लोगों को समुदाय के आधार पर बांट रही है.’’उन्होंने कहा, ‘‘देश में अप्रत्याशित अशांति है. संविधान को कमजोर किया जा रहा है और सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है. देश के हिस्सों खासकर उत्तर प्रदेश में समाज के बड़े तबकों को प्रताड़ित किया जा रहा है और उन पर हमले किए जा रहे हैं.’’उन्होंने दावा किया, ‘‘असम में एनआरसी उल्टा पड़ गया. मोदी-शाह सरकार अब एनपीआर की प्रक्रिया को करने में लगी है. यह स्पष्ट है कि एनपीआर को पूरे देश में एनआरसी लागू करने के लिए किया जा रहा है.’’

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