अभिजीत बनर्जी को पत्नी सहित मिला अर्थशास्त्र का नोबेल

कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के अपने प्रमुख वादे ‘न्याय योजना’ के लिए अभिजीत बनर्जी से सलाह ली थी
अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार संयुक्त रूप से अभिजीत बनर्जी के साथ एस्थर डुफ्लो और अमेरिकी मूल के अर्थशास्त्री और अमेरिकन अकेडमी ऑफ आर्ट एंड साइंसिस से जुड़े माइकल क्रेमर को मिला है. बता दें कि अभिजीत बनर्जी के साथ उनकी पत्नी एस्थर डुफ्लो को भी इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.
ओस्लो. भारत में जन्मे और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में प्रोफेसर अभिजीत बनर्जी (58) को 2019 के अर्थशास्त्र के नोबेल के लिए चुना गया है। उनके साथ एमआईटी में ही प्रोफेसर अभिजीत की पत्नी एस्थर डुफ्लो (46) और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर माइकल क्रेमर (54) को भी इस सम्मान के लिए चुना गया है। 21 साल बाद किसी भारतवंशी को अर्थशास्त्र के नोबेल के लिए चुना गया। अभिजीत बनर्जी को गरीबी पर अध्य्यन के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. अर्थशास्त्र का ये नोबेल पुरस्कार संयुक्त रूप से अभिजीत बनर्जी के साथ एस्थर डुफ्लो और माइकल क्रेमर को मिला है. अभिजीत बनर्जी का जन्म पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हुआ और इन्होंने कलकत्ता यूनिवर्सिटी और जेएनयू में शिक्षा हासिल की है. तीनों को दुनिया भर में ग़रीबी दूरे करने के लिए एक्सपेरिमेंट अप्रोच के लिए ये सम्मान दिया गया है.
नोबेल कमेटी ने इसकी जानकारी दी है.माना जा रहा है कि बीते दो दशक के दौरान इस अप्रोच का सबसे अहम योगदान रहा. दुनिया भर में ग़रीबों की आबादी 70 करोड़ के आसपास मानी जाती है.अभिजीत बनर्जी के ही एक अध्ययन पर भारत में विकलांग बच्चों की स्कूली शिक्षा की व्यवस्था को बेहतर बनाया गया, जिसमें क़रीब 50 लाख बच्चों को फ़ायदा पहुंचा है.
अभिजीत विनायक बनर्जी भारतीय मूल के अमेरिकी अर्थशास्त्री हैं. अभिजीत बनर्जी मूल रूप से भारत के पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं. उनका जन्म 21 फरवरी 1961 को मुंबई में हुआ.वह वर्तमान में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में अर्थशास्त्र के फोर्ड फाउंडेशन इंटरनेशनल प्रोफेसर हैं. इसके साथ ही अभिजीत बनर्जी अब्दुल लतीफ़ जमील पॉवर्टी एक्शन लैब के सह-संस्थापक हैं, जो इनोवेशन फॉर पॉवर्टी एक्शन के अनुसंधान सहयोगी हैं और कंसोर्टियम ऑन फाइनेंशियल सिस्टम्स एंड पॉवर्टी के सदस्य हैं. तीन लोगों में अभिजीत बनर्जी की पत्नी इश्तर डूफलो भी शामिल हैं, जो अर्थशास्त्र में नोबेल जीतने वाली सबसे कम उम्र की महिला हैं. अर्थशास्त्र में नोबेल जीतने वाली वे महज दूसरी महिला हैं.एस्थर मूल रूप से फ्रांस की रहने वाली हैं.
पुरस्कार की घोषणा होने के बाद इश्तर डूफेलो ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा है, “महिलाएं भी कामयाब हो सकती हैं ये देखकर कई महिलाओं को प्रेरणा मिलेगी और कई पुरुष औरतों को उनका सम्मान दे पाएंगे.”अभिजीत की रिसर्च की बदौलत की भारत में 50 लाख बच्चे गरीबी रेखा से बाहर आए हैं. अभिजीत के अलावा इनकी पत्नी एस्थर डुफलो और माइकल क्रेमर को अर्थशास्त्र का भी संयुक्त रूप से अर्थशास्त्र की नोबेल दिया गया है.
किताबें और लेख जिसने दुनिया को दिखाई राह
अभिजीत ने दुनिया को राह दिखाने के लिए इकोनॉमिक्स पर कई किताबें लिखी हैं. इनकी पहली किताब 2005 में वोलाटिलिटी एंड ग्रोथ लिखी थी. तब से लेकर आज तक अभिजीत बनर्जी ने कुल सात किताबें लिखी हैं. लेकिन इन्हें प्रसिद्धि मिली 2011 में आई इनकी किताब पूअर इकोनॉमिक्सः ए रेडिकल रीथीकिंग ऑफ द वे टू फाइट ग्लोबल पॉवर्टी.
कांग्रेस ने ‘न्याय योजना’ के लिए अभिजीत से सलाह ली थी
2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने अपने प्रमुख चुनावी वादे “न्याय योजना’ के लिए अभिजीत समेत दुनियाभर के अर्थशास्त्रियों से राय ली थी। इसके तहत तब कांग्रेस अध्यक्ष रहे राहुल गांधी ने वादा किया था कि हर गरीब के खाते में साल में 72 हजार रुपए डाले जाएंगे, यानि 6 हजार रुपए/महीना। योजना गरीबों को मिनिमम इनकम की गारंटी देगी। बनर्जी ने कहा था- 2500-3000 रु. प्रति महीना एक अच्छी शुरुआत हो सकती थी। ऐसा कहते वक्त मैं सालाना आर्थिक प्रतिबद्धताओं को भी ध्यान में रख रहा हूं। मेरा नजरिया यह था कि उन्हें (कांग्रेस) धीरे चलना चाहिए था। ऐसा करने से उन्हें वह सालाना आर्थिक स्थान मिल जाता, जिसकी जरूरत है।
अभिजीत बनर्जी के बारे में जानें
अभिजीत बनर्जी की मां निर्मला बनर्जी कलकत्ता के सेंटर फॉर स्टडीज इन सोशल साइंसेज में इकोनॉमिक्स की प्रोफेसर रही हैं और पिता दीपक बनर्जी कलकत्ता के प्रेसिडेंसी कॉलेज में प्रोफेसर और अर्थशास्त्र के हेड ऑफ डिपार्टमेंट रहे हैं.अभिजीत बनर्जी ने अपनी पढ़ाई कोलकाता के साउथ प्वाइंट स्कूल और प्रेसिडेंसी कॉलेज से की. प्रेसिडेंसी कॉलेज से उन्होंने 1981 में इकोनॉमिक्स की डिग्री ली और दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से 1983 में इकोनॉमिक्स में एम.ए. पूरा किया. इसके बाद 1988 में वो पीएचडी करने के लिए हार्वर्ड यूनिवर्सिटी गए.अभिजीत बनर्जी प्रतिष्ठित हावर्ड यूनिवर्सिटी और प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में पढ़ाने के बाद वर्तमान में मेसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (MIT) में फोर्ड फाउंडेशन इंटरनेशनल प्रोफेसर ऑफ इकोनोमिक्स हैं.अभिजीत बनर्जी अर्थशास्‍त्र का नोबेल पाने वाले दूसरे भारतीय इकोनॉमिस्‍ट हैं. इससे पहले अमर्त्‍य सेन को अर्थशास्‍त्र के क्षेत्र में उल्‍लेखनीय योगदान के लिए इस पुरस्‍कार से नवाजा जा चुका है.
अभिजीत बनर्जी के जेएनयू कनेक्शन को लेकर भी सोशल मीडिया पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है.
रामचंद्र गुहा ने ट्वीट किया है, “अभिजीत बनर्जी और इश्तर डूफेलो को नोबेल मिलने की ख़बर से खुश हूं. वे इसके योग्य हैं. अभिजीत बहुत बदनाम किए जा रहे यूनिवर्सिटी के गर्व भरे ग्रेजुएट हैं. उनका काम कई युवा भारतीय विद्वानों को प्रभावित करेगा.”पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी अभिजीत बनर्जी को बधाई दी है.
इससे पहले 11 अक्टूबर को शांति के नोबेल पुरस्कार का एलान किया गया था. इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद को शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया. यह पुरस्कार उनके देश के पुराने दुश्मन इरिट्रिया के साथ संघर्ष को सुलझाने के लिए दिया गया.

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