हदिया केस को बड़े वकीलों को मिले थे पैसे:राष्‍ट्रीय जांच एजेंसी

राष्‍ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच में खुलासा हुआ है कि अखिला अशोकन उर्फ हदिया,पीएफआई और सत्‍य सारिणी कार्यकर्ताओं के निशाने पर थी.

नई दिल्‍ली: देश के विभिन्‍न हिस्‍सों में नागरिकता कानून (CAA) के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों में सक्रिय संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. सूत्रों के हवाले से खबर है कि पीएफआई के बैंक अकाउंट से देश के कई बड़े वकीलों को पैसे दिए गए. इनमें कपिल सिब्बल और इंदिरा जयसिंह का नाम भी शामिल है.

इन आरोपों को कांग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सिरे से खारिज करते हुए इन्हें बकवास करार दिया. कपिल सिब्बल ने कहा कि पीएफआई मेरा क्लाइंट है. जो पैसा मुझे मिला है, वो हदिया केस में मिला है. जोकि 2017-2018 में हुआ था.

वहीं सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि वकीलों को जो फीस जाती है वह आधिकारिक तौर पर दी जाती है. उन्होंने कहा, ‘मैंने कभी भी PFI के लिए केस नहीं लड़ा है हालांकि मुझे फिलहाल यह याद नहीं आ रहा है कि किसी मामले में अन्य पार्टी की तरफ इन्होंने मुझे भुगतान किया या नहीं.’

दवे ने कहा अगर इन्होंने मुझे कोई भुगतान भी किया है, अगर किया है तो मुझे नहीं लगता कि पहले यह कोई बैन संस्था थी. दवे ने कहा कि यह सब मेरे लिए मायने नहीं रखता है, मैं अल्पसंख्यकों की हक के लिए अदालत में लड़ता रहूंगा.

एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने पीएफआई से पैसा लेने की बात को खारिज करते हुए कहा है कि वह उनकी छवि खराब करने वालों और मीडिया के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगी.

हदिया केस
इस संबंध में राष्‍ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच में खुलासा हुआ है कि अखिला अशोकन उर्फ हदिया,पीएफआई और सत्‍य सारिणी कार्यकर्ताओं के निशाने पर थी. दरअसल अखिला ने इस्‍लाम को अपना लिया था और हदिया बन गई थी. उसने पीएफआई कार्यकर्ता शाफीन जहां से शादी की.26 साल की हादिया ने मुस्लिम शख्स से 2016 में निकाह करने के बाद इस्लाम कबूल कर लिया था।  बता दें कि हादिया उर्फ अखिला अशोकन के पिता केएम अशोकन ने अपनी लड़की को लव जिहाद का विक्टिम बताते हुए कोर्ट का रुख किया था।

इसके बाद केरल हाई कोर्ट ने हादिया की उसके पति के साथ शादी की वैधता रद्द कर दी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फैसला पलटते हुए हादिया के निकाह को फिर से बहाल कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद हादिया अपने पति शफी के साथ रह रही हैं। हादिया केस इस साल के चर्चित मामलों में से एक था जो काफी वक्त तक सुर्खियों में रहा।

हदिया ही क्यों, अदालतें भी हैं प्रोग्रामिंग का शिकार-
केन्द्र सरकार और हाईकोर्ट के अनुसार हदिया जैसी तमाम लड़कियों का कट्टरपंथी ताकतों द्वारा लव-जेहाद के लिए प्रोग्रामिंग की जा रही है. डिजिटल इंडिया में बच्चे और युवा सोशल मीडिया की प्रोग्रामिंग का शिकार होकर परिवार और समाज से दूर हो रहे हैं. अब प्राइम टाइम टीवी डिबेट्स की प्रोग्रामिंग से अदालतों की सुनवाई और फैसले प्रभावित होने लगे हैं.

एनआईए की जांच रिपोर्ट के अनुसार, वेबसाइट के माध्यम से सम्मोहन और धर्म-परिवर्तन कराने के बाद लड़कियों के निकाह कराने का कट्टरपंथियों द्वारा संगठित गैंग चलाया जा रहा है. इन आरोपों की सच्चाई से इंकार नहीं किया जा सकता पर सवाल यह है कि इतनी लम्बी जांच के बावजूद असल दोषी अभी तक गिरफ्तार और दण्डित क्यों नहीं हुए?

पद्मावती की तरह हदिया मामले में चुनावी सियासत-
देश में जीएसटी, एनपीए, बेरोजगारी जैसी अनेक समस्याएं हैं. गुजरात चुनाव में विकास के मुद्दे से बचने के लिए पद्मावती जैसे मामलों से धार्मिक प्रोग्रामिंग का प्रयत्न हो रहा है. क्या हदिया के माध्यम से दक्षिण भारत में सियासी कब्जे के लिए साम्प्रदायिक प्रोग्रामिंग का घमासान हो रहा है? आधार जैसे जनहित के व्यापक मामलों पर जल्द सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट के पास समय नहीं है. फिर हदिया जैसे मामलों में लम्बी सुनवाई करके अदालतें सियासत की प्रोग्रामिंग का क्यों शिकार हो रही हैं?

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