तिरुवनंतपुरम,। केरल सरकार के नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में सुप्रीम कोर्ट जाने के मुद्दे पर प्रदेश के राज्‍यपाल आरिफ मोहम्‍मद खान ने नाराजगी जताई है। उन्‍होंने कहा कि मुझे सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इस बारे में प्रोटोकॉल का ध्‍यान रखना चाहिए था। बता दें कि केरल सरकार ने कहा है कि वह इस कानून को राज्‍य में लागू नहीं होने देगी।नागरिकता संशोधन कानून के मुद्दे पर केरल सरकार के सुप्रीम जाने के सवाल पर राज्‍यपाल आरिफ मोहम्‍मद ने कहा, ‘मुझे केरल सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने से कोई परेशानी नहीं है, लेकिन इस बारे में पहले मुझे बताया जाना चाहिए था। संवैधानिक प्रमुख होने के बावजूद मुझे इस बारे में समाचार पत्रों के माध्यम से पता चला। जाहिर है, मैं सिर्फ एक रबर स्टांप नहीं हूं।’केरल सरकार ने पिछले मंगलवार को सीएए की संवैधानिक वैधता को लेकर शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी। ऐसा करने वाला वह पहला राज्य है। सुप्रीम कोर्ट 60 अन्य याचिकाओं के साथ इस मामले की 22 जनवरी को सुनवाई करेगा।

राज्‍यपाल ने कहा, ‘यह प्रोटोकॉल का उल्लंघन है, साथ ही यह शिष्टाचार का भी उल्लंघन है। मैं इस पर गौर करूंगा कि क्या राज्य सरकार राज्यपाल की मंजूरी के बिना सुप्रीम कोर्ट में जा सकती है। यदि अनुमोदन नहीं, तो वे मुझे सूचित कर सकते थे।’

मुझे सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने से कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन सबसे पहले राज्यपाल को सूचित करना चाहिए था। अब मैं पता लगाऊंगा कि क्या राज्य सरकार राज्यपाल की अनुमति के बिना सुप्रीम कोर्ट जा सकती है?

केरल सरकार ने सीएए को धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ बताया था

विजयन सरकार ने सीएए को संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 25 का उल्लंघन बताया था। सरकार का कहना था कि यह धर्मनिरपेक्षता जैसे मूल सिद्धांत के खिलाफ है। केरल ऐसा पहला राज्य है, जिसने नागरिकता कानून को रद्द करने के लिए 31 दिसंबर को विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 10 जनवरी को सीएए को लेकर अधिसूचना जारी की थी।

उत्तर प्रदेश ने केंद्र को 40 हजार शरणार्थियों की सूची भेजी थी
इससे पहले उत्तर प्रदेश ने सोमवार को पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए गैर-मुस्लिम प्रवासियों की जानकारी गृह मंत्रालय को भेज दी। वह ऐसा करने वाला पहला राज्य बन गया है। देश में सीएए लागू होने के साथ ही योगी सरकार ने प्रदेशभर के शरणार्थियों की सूची बनाना शुरू कर दी थी। अब तक 19 जिलों में रहने वाले 40 हजार अवैध प्रवासियों की जानकारी जुटाई जा चुकी है।