जाने, 23 की सुबह के ‘भूले’ अजित पवार 26 की शाम होते-होते कैसे लौट आए ‘घर’

एनसीपी चीफ शरद पवार (Sharad Pawar) ने फिर से जता दिया कि वे चचा हैं और उनके दांव की काट अभी भतीजे अजित पवार (Ajit Pawar) के पास भी नहीं है.अजित पवार की राजनीतिक स्थिति वैसे भी बहुत अच्छी नहीं बताई जाती.
नई दिल्ली. सामन्य ज्ञान की किताबों में पढ़ाया जाता है कि चौधरी चरण सिंह (Chaudhary Charan Singh) देश के एक मात्र ऐसे प्रधानमंत्री थे, जिन्हें बतौर पीएम एक दिन भी संसद गए बगैर ही अपना पद छोड़ना पड़ा था. महाराष्ट्र में अजित पवार (Ajit Pawar) के उप मुख्यमंत्री बनने और फिर पद से इस्तीफा देने से एक बार पुरानी बात फिर से ताजा हो गई. हालांकि, चौधरी साहेब के बनने और हटने के बीच कोई साढ़े पांच महीने का वक्त रहा. 1979 के जुलाई से 1980 की शुरूआती दिनों तक चौधरी साहेब इस देश के प्रधानमंत्री रहे. कहा जाता है कि वे कांग्रेस की एक राजनीतिक चाल के झांसे में आकर प्रधानमंत्री बनने को तैयार हो गए थे. हालांकि अजित पवार का केस कुछ अलग है.
अजित पवार (Ajit Pawar) खुद महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री रह चुके हैं. वे शरद पवार (Sharad Pawar) के भतीजे के तौर पर जाने जरूर जाते हैं, लेकिन राजनीति में कोई नौसिखिया नहीं है. उनका 3 दशक से ज्यादा का राजनीतिक करियर है. उनके नाम के साथ तमाम उपलब्धियों के अलावा कई घपले-घोटाले भी जुड़े रहे हैं. उप मुख्यमंत्री के पद पर वे 79 घंटे ही रह सके. ये भी नहीं कहा जा सकता कि वे उपमुख्यमंत्री की कुर्सी पर कितने घंटे बैठे.
अपने मुख्यमंत्री के साथ उन्हें 26-11 यानी मुंबई में आतंकवादी हमले की बरसी के मौके पर शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि देने जाना था. चर्नी गेट पर आयोजित इस कार्यक्रम में पहली बार मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को साथ-साथ देखने का लोगों को मौका मिलता. लेकिन चचा पवार और दूसरे घरवालों ने मिलकर कुछ ऐसा चक्र चला कि वे इस कार्यक्रम में न शामिल हो सके. पता चल रहा है कि उसी समय ट्राइडेंट होटल में सुप्रिया सुले और परिवार के दूसरे लोग उन्हें घेरकर बीजेपी का पाला छोड़ एनसीपी में लौटने की शर्तें तय कर रहे थे. इसी दरम्यान सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भी लगने लगा कि गेम का रूख कुछ और हो गया है.
शरद पवार ने फिर से जता दिया कि वे चचा हैं और उनके दांव की काट अभी भतीजे अजित पवार के पास नहीं
अजित पवार के बेटे हार चुके हैं चुनाव
राजनीतिक विश्लेषक ये भी कह रहे हैं कि दरअसल अजित पवार की चिंता ये हो गई थी कि कहीं उन्हें भी चिदंबरम और इस तरह के दूसरे नेताओं जैसी स्थिति न झेलनी पड़े. महाराष्ट्र की राजनीति के जानकार बताते हैं कि वे पहले भी चाचा से कह चुके थे कि बीजेपी के ही साथ रहना चाहिए. इस दरम्यान जब उन्हें मौका मिला तो वे अकेले ही देवेंद्र फडणवीस के साथ हो लिए. अजित पवार की राजनीतिक स्थिति वैसे भी बहुत अच्छी नहीं बताई जाती है. उनके बेटे पार्थ भी चुनाव हार चुके हैं.
कुछ विश्लेषक इसे भी शरद पवार की राजनीतिक कुव्वत के तौर पर देख रहे हैं कि उन्होंने बेटी सुप्रिया सुले का राजनीतिक पथ साफ सुथरा रखने के लिए कांटे राह से किनारे किए हैं. माना जा रहा था कि अपनी स्थिति का फायदा उठा कर अजित पवार एक तरह से शरद पवार के राजनीतिक उत्तराधिकारी होने की भी कोशिश करते रहे हैं. जबकि सुप्रिया भी राजनीति में हैं और शरद पवार चाहते हैं कि सुप्रिया ही उनकी राजनीतिक विरासत को आगे ले जाएं.सब लोग हैरान हैं कि आखिर महाराष्ट्र (Maharashtra) में इतनी सियासी उठापटक के बाद भी शरद पवार ने अजित पवार को पार्टी से बाहर का रास्ता क्यों नहीं दिखाया. क्या अभी भी शरद पवार अपने भतीजे अजित पवार (Ajit Pawar) के मोह में हैं. अगर इसको देखें तो मामला समझ में आ जाएगा. दरअसल शरद पवार (Sharad Pawar) राजनीति के खिलाड़ी हैं. जिन को समझना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी है. शरद पवार जानते हैं कि अगर अजित पवार को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा देंगे तो अजित आजाद हो जाएंगे और उन पर दल बदल कानून लागू नहीं होगा.इसलिए आज तक शरद पवार ने मीडिया के लाख दबाव और पार्टी के नेताओं के दबाव के बाद भी अजित पवार को अपने साथ बना रखा. दरअसल दलबदल नियम के अनुसार यदि कोई विधायक या सांसद पार्टी से निकाल देता है तो उसके ऊपर दलबदल विधायक कानून लागू नहीं होता. इसका उदाहरण उत्तर प्रदेश में देखने को मिला था, जहां मुलायम सिंह यादव ने अमर सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया और अब वो स्वतंत्र रूप से राज्यसभा में हैं.
कोई भी मौका नहीं देना चाहते हैं
इसीलिए शरद पवार अजित पवार को इस तरह का कोई भी मौका नहीं देना चाहते. विधानसभा के गठन, नए विधानमंडल दल के नए नेता का चुनाव और बहुमत साबित होने या विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव होने तक अजित पवार को पार्टी से बाहर नहीं करेंगे. किसी भी विधानसभा सदस्य की सदस्यता जाने के लिए जरूरी है वह विधानसभा में पार्टी के खिलाफ मतदान करें. अभी तक अजित पवार ने ऐसा कोई काम नहीं किया है जिसके हिसाब से उनके ऊपर दल बदल कानून लागू होता है.
…जब शरद पवार ने ये कहा तो मान गये अजित पवार
अजित पवार सुनते रहे. शरद पवार ने फिर कहा कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दो और अगर तुम इस्तीफ़ा नहीं दे सकते तो कल जब विधानसभा में विश्वास मत होगा तो वहां मत आना.
नई दिल्ली: महाराष्ट्र की सियासत में घटनाक्रम बेहद तेजी से बदल रहा है. आज सुप्रीम कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया था, कल होने वाले इस फ्लोर टेस्ट से पहले ही महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी सीएम अजित पवार ने इस्तीफा दे दिया है. सोमवार शाम को ही पवार परिवार ने अजित पवार को मनाने की मुहिम तेज कर दी थी. आज सुबह मुम्बई के ट्राइडेंट होटल में शरद पवार, सुप्रिया सुले, प्रफुल्ल पटेल और जयंत पाटिल ने अजित पवार से मुलाक़ात की. सूत्रों के मुताबिक शरद पवार ने कहा कि मैं तुमसे नाराज़ नहीं हूं. महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देकर वापिस अपने घर आ जाओ. सुप्रिया सुले ने भी अजित पवार से निवेदन किया कि आपका फ़ैसला ग़लत है और बीजेपी की सरकार बनने नहीं जा रही है. आप घर वापसी कर लीजिए.
अजित पवार सुनते रहे. शरद पवार ने फिर कहा कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दो और अगर तुम इस्तीफ़ा नहीं दे सकते तो कल जब विधानसभा में विश्वास मत होगा तो वहां मत आना. इतना ही नहीं शरद पवार ने यहां तक कहा कि अगर तुम्हें लग रहा है कि बीजेपी का स्पीकर तुम्हें एनसीपी का विधायक दल का नेता बना देंगे और तुम व्हिप जारी कर दोगे तो ऐसा नहीं हो पाएगा. मैंने इसका हल भी निकाल लिया है. मैंने वकीलों से बात की है किसी भी पार्टी को तोड़ने के लिए 2/3 बहुमत की ज़रूरत होती है. अगर तुम नहीं मानोगे तो मैं एनसीपी बी बना दूंगा और मेरे पास 51 विधायक हैं तो एनसीपी के विधायक दल के नेता बनने के बावजूद भी मैं सरकार बनने नहीं दूंगा.
इस बैठक में शरद पवार, सुप्रिया सुले, प्रफुल्ल पटेल, जयंत पाटिल मौजूद थे. शरद पवार की इस बैठक के कुछ ही घंटो बाद अजीत पवार ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया.
उद्धव ठाकरे कल मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले सकते हैं. एनसीपी के जयंत पाटिल और कांग्रेस के बालासाहेब थोराट उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. ठाकरे को आज शाम गठबंधन का नेता चुना जाएगा. जानकारी के मुताबिक विधायकों के समर्थन का पत्र राज्यपाल को दिया जाएगा, इसी के आधार पर राज्यपाल उद्धव ठाकरे और बाकी दोनों नेताओं को शपथ दिला सकते हैं. बता दें कि आज ही डिप्टी सीएम के तौर पर अजित पवार और सीएम के तौर पर देवेंद्र फडणवीस ने इस्तीफे का एलान किया था.

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