पेंच फंसा:शिवसेना ने ढाई साल को लिखित में मांगा मुख्यमंत्री पद

मातोश्री में आयोजित शिवसेना की बैठक में पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि भाजपा से हमें लिखित में आश्वासन चाहिए। महाराष्ट्र में शिवसेना ने ढाई साल के लिए अपने मुख्यमंत्री की मांग की है। शिवसेना ने कहा, ‘अगर ढाई साल तक हमारी पार्टी का कोई मुख्यमंत्री नहीं रहेगा, तो महाराष्ट्र में गठबंधन की सरकार नहीं बनेगी।’कांग्रेस के बहुत सारे एमएलए भाजपा में शामिल होने के लिए तैयार
मुंबई, । महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद शनिवार को शिवसेना के नवनिर्वाचित विधायकों की मातोश्री में उद्धव ठाकरे से मुलाकात के दौरान निर्णय लिया गया कि जिस प्रकार अमित शाह जी ने लोकसभा चुनावों से पहले 50-50 फार्मूले का वादा किया था, उसी प्रकार दोनों सहयोगी दलों भाजपा और शिवसेना को 2.5 – 2.5 वर्षों के लिए सरकार चलाने का मौका मिलना चाहिए। शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कहा कि हमें भाजपा से लिखित में ये आश्वासन चाहिए। गौरतलब है कि भाजपा-शिवसेना गठबंधन को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बहुमत मिला है। लेकिन सत्ता किसकी होगी इसका फैसला दीवाली के बाद ही लिया जाएगा।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में हाल ही में हुए 288 सीटों का चुनाव परिणाम आ चुका है। परिणाम के आते ही सत्ता को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो चुकी है। गृह मंत्री अमित शाह ने शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे को बधाई देते हुए कहा है कि सत्ता को लेकर अब दिवाली के बाद ही वार्ता होगी ।
इस मामले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कहना है कि भाजपा शिवसेना के मुख्यमंत्री पद को बांटने की मांग को नही मानेगी, अगर 56 सीट जीतने वाली शिवसेना ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद की मांग करती है तो भाजपा उसके साथ कोई समझौता नहीं करेगी।
सामना में शुक्रवार को लिखे संपादकीय के अनुसार अभी इस बात का विश्लेषण करने में समय लगेगा कि शिवसेना-भाजपा ने 2014 की तुलना में कम सीटें क्यों जीती हैं। लेकिन महाराष्ट्र की जनता के फैसले से साफ जाहिर हो रहा है कि यह महज जनादेश, महाजनादेश या क्लीन स्वीप नहीं। राज्य की जनता ने दूसरी पार्टियों को तोड़े जाने अस्वीकार कर दिया है। जनता का संदेश साफ है कि हमोर पैर सदैव जमीन पर होने चाहिए।
चुनाव होने से पहले, राकांपा के नेता भाजपा में शामिल तो हो गए थे लेकिन चुनावों में जनता ने इसे समझा। इसी वजह से एनसीपी ने इन चुनावों में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र में बिना किसी नेता वाली कांग्रेस को भी 37 सीटें मिली। विधानसभा चुनाव के नतीजे शिवसेना और भाजपा के पक्ष में हैं। ये सरकार के लिए सबक की तरह है जिसका सोचना है कि वह जो कर रही है वही कानून है।
कांग्रेस से भाजपा में शामिल होने वाले विधायकों के सामने शिव सेना बनी अड़चन
कांग्रेस के बहुत से विधायक भाजपा में शामिल होने की इच्‍छा जता रहे हैं। लेकिन सामने सबसे बड़ी समस्‍या यह है कि ये उन्‍हीं सीटों से विधायक हैं जो सीटें बीजेपी की सहयोगी शिव सेना की पारंपरिक सीटें हैं।
राधाकृष्‍ण विखे पाटील (फाइल फोटो)
खबर है कि कांग्रेस के बहुत सारे एमएलए भाजपा में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन जमीनी हालात कुछ ऐसे हैं कि लग रहा है कि कांग्रेस से भाजपा में आने की यह कवायद बहुत आसान नहीं होगी।समस्‍या यह है कि राधाकृष्‍ण विखे पाटील समेत कई एमएलए जो भाजपा में शामिल होने की योजना बना रहे हैं, वे उन सीटों से मौजूदा एमएलए हैं जो सीटें पारंपरिक तौर पर शिव सेना के पास रही हैं। शिव सेना और भाजपा गठबंधन के लिए थोड़ा मुश्किल सफर होगा क्‍योंकि शिव सेना भाजपा के ‘आयातित’ एमएलए के लिए आसानी से अपनी सीटें छोड़ने वाली नहीं है।
विखे पाटील जल्द भाजपा में शामिल हो सकते हैं
राधाकृष्‍ण विखे पाटील इसी हफ्ते भाजपा में शामिल होने वाले हैं, संभव है उन्‍हें कैबिनेट में भी जगह मिल जाए। वह शिरडी विधानसभा क्षेत्र से पांच बार लगातार एमएलए रहे हैं। लेकिन यह सीट पारंपरिक रूप से सेना के पास रही है। यहां तक कि विखे पाटील ने खुद भी 1995 में सेना के टिकट पर शिरडी से चुनाव लड़ा था, इसके बाद वह कांग्रेस में चले गए थे।
इसी तरह, वडाला से कांग्रेस एमएलए कालिदास कोलांबकर भाजपा में एंट्री के लिए मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडनवीस से संपर्क में हैं। लेकिन वडाला सीट भी शिवसेना के पास ही है, इसीलिए उनके भाजपा में शामिल होने में देरी हो रही है। सूत्रों का कहना है कि शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा है कि कोलांबर शिव सेना के टिकट पर यहां से लड़ सकते हैं। अभी फडनवीस को इस पर फैसला लेना बाकी है।
यही स्थिति चिखली से राहुल बोंद्रे और मान विधानसभा क्षेत्र से जयकुमार गोरे की है। सिल्‍लोड विधानसभ क्षेत्र से कांग्रेस एमएलए अब्‍दुल सत्‍तार को यह समस्‍या नहीं है लेकिन यहां स्‍थानीय भाजपा कार्यकर्ता उनके खिलाफ हैं।
मुख्‍यमंत्री फडनवीस के करीबी भाजपा नेता का कहना है कि विखे पाटील के शिव सेना जॉइन करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता क्‍योंकि समझौते के अनुसार शिरडी सेना की सीट है। इसके अलावा बीजेपी ने सेना को आश्‍वासन दिया है कि उसे राज्‍य मंत्रीमंडल में अहम जगह मिलेगी। यह कृषि मंत्रालय हो सकता है। यहां यह भी ध्‍यान देने योग्‍य है कि 1990 के दशक में सेना-बीजेपी सरकार में विखे पाटील शिव सेना की ओर से कृषि मंत्री रह चुके हैं।

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