जौहर विवि की 104 बीघा जमीन जब्ती शुरू, आजम ने खरीदी थी नियम विरुद्ध

रामपुर से सपा के सांसद मोहम्मद आजम खान (फाइल फोटो)रामपुर से सपा के सांसद मोहम्मद आजम खान (फाइल फोटो)

  • जिलाधिकारी ने कहा- रेवेन्यू बोर्ड से दस्तावेज मिलने के बाद जमीन जब्त की जा रही है
  • राजस्व परिषद ने इस मामले में 11 मुकदमे भी दर्ज किए हैं, जमीन की पैमाइश शुरू

रामपुर. समाजवादी पार्टी से सांसद आजम खान की मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की 104 बीघा जमीन को जब्त करने की कार्रवाई जिला प्रशासन ने शुरू कर दी है। रेवेन्यू बोर्ड कोर्ट के अनुसार दलित किसानों के समूह से इस जमीन की खरीद-फरोख्त में नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। यह विश्वविद्यालय आजम खान ने बनवाया था और वह ही इसके कुलाधिपति भी हैं। जौहर यूनिवर्सिटी पर प्रशासन ने गुरुवार को भी बड़ी कार्रवाई की। 26 किसानों को जमीन पर कब्जा दिला दिया। इससे पहले बुधवार को भी यूनिवर्सिटी की दो इमारतें कुर्क करने की कार्रवाई की गई थी।

उप जिलाधिकारी सदर प्रेम प्रकाश तिवारी गुरुवार दोपहर राजस्व टीम के साथ यूनिवर्सिटी पहुंचे और पैमाइश कराकर किसानों को कब्जा दिला दिया। इन जमीनों पर कब्जा करने के आरोप में किसानों ने आजम खां पर मुकदमे भी कराए थे और प्रशासन ने भूमाफिया घोषित कर दिया था।

जमीन कब्‍जाने के 28 मुकदमे दर्ज

समाजवादी पार्टी के सांसद एवं मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति आजम खां के खिलाफ यूनिवर्सिटी के लिए जमीन कब्जाने के 28 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। आलियागंज के 26 किसानों ने पिछले साल जुलाई में जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह को शपथ पत्र देकर शिकायत दर्ज कराई थी कि आजम खां ने सपा शासनकाल में उनकी जमीन जबरन जौहर यूनिवर्सिटी में मिला ली। विरोध करने  पर तत्कालीन सीओ सिटी आले हसन खां ने उन्हें डराया धमकाया और हवालात में बंद किया।

18 जुलाई को आजम को घोषित कियाा गया था भू-माफिया

इन शपथ पत्रों की जांच कराई गई और फिर 12 जुलाई को प्रशासन की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसके बाद आलियागंज के उन सभी 26 किसानों ने अजीमनगर थाने में अलग-अलग तहरीर देकर रिपोर्ट कराई। इसी दौरान 18 जुलाई को उपजिलाधिकारी की ओर से उनका नाम एंटी भू-माफिया पोर्टल पर दर्ज करा दिया गया। इस पोर्टल पर उन्हीं लोगों के नाम दर्ज कराए जाते हैं, जो जमीनों पर कब्जा करते हैं और उन्हें छोड़ते नहीं।

104 बीघा जमीन को प्रशासन ने कब्‍जे में लिया

प्रशासन ने बुधवार को  भी यूनिवर्सिटी में 104 बीघा जमीन को कब्जे में ले लिया था। यह जमीन 10 दलितों से जिलाधिकारी की परमिशन लिए बिना खरीदी गई  थी। इसके अलावा 1.37 करोड़ लेबर सेस जमा न करने पर यूनिवर्सिटी की दो इमारतें भी कुर्क कर ली गई थीं।

जौहर ट्रस्ट के नाम खरीदी गई जमीन

जमीन खरीद के मामले में हुई शिकायत पर जिलाधिकारी ने जांच कराई है। इस मामले में राजस्व परिषद ने 11 मुकदमे दर्ज किए  थे। इनकी पड़ताल में यह सामने आया कि जमीन अवैधानिक ढंग से खरीदी गई थी अब इस जमीन को राज्य सरकार के अधीन किया गया है। यह आदेश जारी होते ही जिला प्रशासन विश्वविद्यालय पहुंचा और पैमाइश कर जमीन पर कब्जा लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी। विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए दलितों की 104 बीघा जमीन जौहर ट्रस्ट के नाम खरीदी गई थी।

जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम का उल्लंघ हुआ

जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह ने कहा कि रेवेन्यू बोर्ड से संबंधित दस्तावेज की 1 प्रति मिलने के बाद जमीन जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। रेवेन्यू बोर्ड ने पाया कि जौहर ट्रस्ट ने 104 बीघा जमीन पर कब्जा करने के लिए उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम का उल्लंघन किया। मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की एक इमारत को भी जब्त किया गया है, क्योंकि जौहर ट्रस्ट विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए 1.37 करोड़ रुपए का उपकर जमा करने में असफल रहा है।

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