धार्मिक स्थल, मॉल, होटल-रेस्टोरेंट खुलेंगे आज से, चार धाम पर फैसला नहीं

उत्तराखंड में 8 जून से हो रहे अनलॉक 1.0 (Unlock 1.0) में सरकार ने धार्मिक स्थल, मॉल, होटल-रेस्टोरेंट खोलने की इजाजत दी है, लेकिन चारधाम यात्रा अभी शुरू नहीं की जाएगी.
उत्तराखंडः आज से खुलेंगे धार्मिक स्थल और मॉल-होटल, चारधाम यात्रा पर फैसला नहीं

देहरादून. उत्तराखंड सरकार ने 8 जून से हो रहे अनलॉक 1.0 (Unlock 1.0) को लेकर बड़ी राहत दी है. पूरे राज्य में कल से होटल, रेस्टोरेंट, मॉल और सभी धार्मिक स्थल खुलेंगे. लेकिन राज्य के किसी भी कंटेनमेंट जोन यानी वो इलाके जहां कोरोना (COVID-19) के केस आए हैं, वहां कोई छूट नहीं मिलेगी. वहीं देहरादून नगर निगम में भी कोई होटल, रेस्टोरेंट, मॉल और धार्मिक स्थल नहीं खुलेगा. कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए सरकार ने अनलॉक 1.0 के तहत जारी गाइडलाइंस की जानकारी देते हुए चारधाम यात्रा (Chardham Yatra) को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है. सरकार ने कहा है कि अभी चारधाम यात्रा शुरू करने की इजाजत नहीं दी जाएगी. यही नहीं, सरकार ने बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को भी राज्य में आने की अनुमति नहीं देने का फैसला किया है.

सरकार की गाइडलाइन

1- उत्तराखंड के होटल्स की बात करें तो देश के हाई लोड कोविड शहरों से बुकिंग की परमिशन नहीं दी गई है.
2- नॉन हाई लोड COVID-19 शहरों से आने वाले किसी भी यात्री को कम से कम 7 दिन तक होटल में रहना पड़ेगा. यात्री को टूरिज्म डिपार्टमेंट की गाइडलाइन्स को भी मानना होगा.
3- रेस्टोरेंट को लेकर सरकार ने कहा है कि सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक रेस्टोरेंट खुल सकेंगे, लेकिन उसके मालिक को हर कस्टमर का पूरा रिकॉर्ड डेट और टाइम के साथ रखना होगा.
4- सरकार ने मॉल खोलने की भी इजाजत दे दी है. सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक मॉल खुलेंगे, लेकिन मॉल की शॉप सिर्फ 50 फीसदी ही खुलेंगी. मॉल मैनेजमेंट को तय करना पड़ेगा कि कितने लोग एक वक्त में एंट्री कर सकेंगे.
5- प्रदेश के धार्मिक स्थल भी सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक खुलेंगे, लेकिन वहां पर भी लॉकडाउन के नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा.
6- चारधाम यात्रा को लेकर सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है. सरकार ने कहा है कि चारधाम यात्रा अभी शुरू नहीं की जाएगी. इसको लेकर तीर्थ पुरोहितों से बातचीत के बाद फैसला होगा. वहीं दूसरे राज्यों से कोई श्रद्धालु अभी उत्तराखंड नहीं आ पाएगा.
30 जून तक नीलकंठ और गोलज्यू देवता के दर्शन नहीं होंगे, चारधाम यात्रा पर असमंजस

COVID-19 संकट की वजह से न सिर्फ चारधाम यात्रा पर संकट है, बल्कि Unlock 1.0 में उत्तराखंड के अन्य मंदिरों को भी 8 जून से खोलने पर असमंजस है
कोरोना वायरस (COVID-19) की रोकथाम के मद्देनजर लॉकडाउन 5.0 के बीच केंद्र सरकार ने 8 जून यानी सोमवार से धार्मिक स्थलों को खोलने की इजाजत दी है.लेकिन उत्तराखंड (Uttarakhand) में इसको लेकर उत्साह,चिंता और कन्फ्यूजन तीनों स्थितियां बनी हुई हैं. इसकी वजह प्रदेश में कोरोना का संक्रमण लगातार गहराना है.शनिवार को भी प्रदेश में कोरोना संक्रमण के 91 नए मामले सामने आए,जिससे संक्रमितों का आंकड़ा 1300 के पार पहुंच गया.ऐसे में मंदिरों को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाने के फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. खासकर उत्तराखंड के मशहूर चारधाम यात्रा (Chardham Yatra) पर भी असमंजस है.

चारधाम यात्रा पर भी संकट

उत्तराखंड के चार धाम गंगोत्री, यमुनोत्री,बद्रीनाथ और केदारनाथ में स्थित मंदिरों के कपाट 26 अप्रैल से 15 मई के बीच खोले जा चुके हैं.कोरोनाकाल के कारण चारधाम यात्रा पर पाबंदी रही,लेकिन अब जबकि केंद्र सरकार ने Unlock 1.0 के तहत मंदिरों को खोलने की छूट दे दी है,इन चार धामों के प्रबंधन से जुड़े लोग इससे सहमत नहीं हैं.बद्रीनाथ समेत चारों धामों के पंडा-पुरोहितों ने 8 जून से यात्रा शुरू करने पर एतराज जताया है.उनकी आशंका है कि इससे कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ जाएगा.सरकार के प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक का कहना है कि इस संबंध में चारों धामों के तीर्थ-पुरोहितों से बातचीत की जाएगी. बहरहाल,आगे के निर्णय को लेकर अभी संशय बना हुआ है.
मठ-मंदिरों की अलग-अलग राय

हालांकि प्रदेश के कई मठ-मंदिरों को 8 जून से खोलने की तैयारी चल रही है,लेकिन इस पर लोगों की अलग-अलग राय है.टपकेश्वर स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर के पुजारी आचार्य विपिन जोशी स्वयंसेवकों के साथ मंदिर की साफ-सफाई में जुटे हैं.मंदिर परिसर में सोशल डिस्टेंसिंग के लिए चूने से सर्कल बनाए जा रहे हैं.पुजारी ने कहा कि दर्शन के दौरान श्रदालुओं को न चढ़ावा चढ़ाने की अनुमति होगी और न उन्हें प्रसाद दिया जाएगा.श्रदालुओं को तिलक भी नहीं लगाया जाएगा.आचार्य विपिन जोशी का कहना है कि कोरोना काल में मंदिरों को दर्शन के लिए खोला जाना आवश्यक है.इससे लोग नई ऊर्जा महसूस करेंगे.दूसरी ओर,कुमाऊं के प्रसिद्ध चितई गोलू देवता मंदिर प्रशासन ने मंदिर नहीं खोलने का फैसला लिया है.जागेश्वर धाम भी बंद रहेगा.इधर ऋषिकेश में नीलकंठ मंदिर प्रबंध समिति ने भी 30 जून तक आम श्रदालुओं के लिए मंदिर बंद रखने का फैसला लिया है.

मंदिर न खुले तो समस्या

उत्तराखंड में अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण जरिया है धार्मिक पर्यटन. एक मोटे अनुमान के मुताबिक प्रतिवर्ष करीब 3 करोड़ लोग उत्तराखंड आते हैं, जिनमें से अधिकांश धर्मस्थलों पर आते हैं. अकेले चारधाम यात्रा से करीब 5 लाख लोगों की आजीविका सीधे जुड़ी हुई है. अप्रत्यक्ष तौर ये आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता है. ऐसे में मंदिर न खुलें तो समस्या होगी. दूसरी ओर पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों की राय भी गौर करने वाली है. इन लोगों का कहना है कि अब जबकि मानसून सिर पर है, यात्रा शुरू किए जाने का कोई औचित्य नहीं है. क्योंकि विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड में जगह-जगह लैंडस्लाइड के कारण सड़कों का नेटवर्क ठप पड़ जाता है. यात्रा का जो पीक समय था अप्रैल से 15 जून तक का, वो हाथ से निकल चुका है।

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