गेंद फिर राज्यपाल के पाले में,क्या कहते हैं संविधान के जानकार

महाराष्ट्र (Maharashtra) में सत्ता की खींचतान में सीएम देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) के इस्तीफे के बाद नया मोड़ आ गया है. अब राज्यपाल (Governor) के बुलाने पर एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस (Shiv Sena-NCP-Congress) की गठबंधन सरकार बना सकती है.
नई दिल्ली. महाराष्ट्र (Maharashtra) के सीएम देवेंद्र फडणवीस फडणवीस (Devendra Fadnavis) और डिप्टी सीएम अजित पवार (Ajit Pawar) के इस्तीफे के बाद राज्य की ताजा राजनीतिक हालात फिर बदल गए हैं. अब एक बार फिर से राज्यपाल (Governor) भगत सिंह कोश्यारी (Bhagat Singh Koshyari) की भूमिका अहम होने जा रही है. ताजा राजनीतिक घटनाक्रम के बाद अगर शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस (Shiv Sena-NCP-Congress) सरकार बनाने के लिए सामने आती है तो राज्यपाल को उनको बुला सकते हैं.
राज्यपाल के इस फैसले पर संविधान विशेषज्ञों ने अपनी-अपनी राय रखी है. देश के जाने-माने संविधान विशेषज्ञ (Constitutional Experts) और लोकसभा (Lok Sabha) के पूर्व महासचिव सीके जैन (C K Jain) कहते हैं, ‘सुप्रीम कोर्ट के सोमवार को दिए निर्णय की कोई अहमियत अब नहीं रह गई, क्योंकि जब सरकार ही गिर गई तो बहुमत साबित करने और फ्लोर टेस्ट का कोई महत्व नहीं बचता है. अब जो भी नई सरकार बनेगी उसको सदन में बहुमत साबित करना पड़ेगा. राज्यपाल के पास अब जो भी दल या गठबंधन सरकार बनाने का दावा पेश करेगी राज्यपाल अपने विवेक के आधार पर सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं.’
महाराष्ट्र की राजनीतिक हालात मंगलवार को एक बार फिर से बदल गए हैं. राज्यपाल केअगले कदम की फिर से कयास लगाए जा रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि महाराष्ट्र की नई सरकार बुधवार शाम तक बहुमत साबित करे. बता दें कि शनिवार सुबह ही बीजेपी नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री पद और एनसीपी नेता अजित पवार को उप मुख्यमंत्री (Deputy CM) पद की शपथ दिलाई गई थी.
लेकिन, इस फैसले को लेकर विपक्षी पार्टियों ने सवाल खड़े किए और सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. सुप्रीम कोर्ट में इस घटनाक्रम पर लगातार दो दिन रविवार और सोमवार को सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को फैसला सुरक्षित रख लिया था. मंगलवार सुबह सुप्रीम कोर्ट ने देवेंद्र फडणवीस की सरकरा को बुधवार शाम तक बहुमत साबित करने का आदेश दिया. लेकिन, मंगलवार सुबह से ही राज्य की राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदलने लगे. सबसे पहले राज्य के डिप्टी सीएम अजित पवार ने इस्तीफा दिया. पवार के इस्तीफे के कुछ ही देर बात राज्य के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने भी इस्तीफा दे दिया.
राज्यपाल के इस फैसले पर संविधान विशेषज्ञों ने अपनी-अपनी राय रखी है.
महाराष्ट्र में बदलते राजनीतिक घटनाक्रम पर सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विनोद दिवाकर कहते हैं, ‘देखिए, सुप्रीम कोर्ट के जो निर्णय आए थे वह शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी की याचिका के आधार पर थे. इन दलों की याचिका पर ही कोर्ट ने हॉर्स ट्रेडिंग को रोकने के लिए बड़ा फैसला लिया था. कोर्ट ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए साफ कहा था कि बुधवार शाम पांच बजे तक सभी विधायकों का शपथ हो जाना चाहिए और शपथ के बाद बहुमत परीक्षण हो. कोर्ट ने बहुमत परीक्षण के लिए लाइव टेलिकास्ट और ओपेन बैलेट पेपर से मतदान की भी बात की. क्योंकि, अब राज्य की राजनीतिक हालात बदल गए हैं. राज्य की मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति में एक बार फिर से राज्यपाल के पास ही निर्णय लेने का अधिकार है.’
आज ही सरकार बनाने का दावा पेश करेगी शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस, कल सुबह उद्धव ठाकरे लेंगे CM पद की शपथ
महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के साथ कांग्रेस नेता बालासाहेब थोरोट और एनसीपी नेता जयंत पाटिल उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. कांग्रेस-एनसीपी और शिवसेना के वरिष्ठ नेता आज राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे.महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के इस्तीफे के बाद अब उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री होंगे. आज रात करीब साढ़े आठ बजे कांग्रेस-एनसीपी-शिवसेना के नेता राजभवन जाकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे. इस दौरान उद्धव ठाकरे मौजूद रहेंगे. कुछ देर में कांग्रेस-एनसीपी-शिवसेना की संयुक्त बैठक भी होगी. इस बैठक में उद्धव ठाकरे को नेता चुना जाएगा.
एनसीपी नेता नवाब मलिक ने भी बताया कि शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे अगले मुख्यमंत्री होंगे. वहीं शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि शपथ ग्रहण समारोह कल सुबह मुंबई के शिवाजी पार्क में होगा.
सूत्रों के मुताबिक, उद्धव ठाकरे के साथ कांग्रेस नेता बालासाहेब थोरोट और एनसीपी नेता जयंत पाटिल उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. नवाब मलिक ने कहा कि शिवसेना, एनसीपी, कांग्रेस का गठबंधन अगले 20-25 साल तक बना रहेगा.
वहीं शिवसेना के एक नेता ने कहा, ‘‘उद्धव ठाकरे मुंबई के होटल में शाम को होने वाली बैठक में तीनों पार्टियों के संयुक्त नेता चुने जाएंगे, ताकि सरकार बनाने का दावा पेश किया जा सके. इसके बाद शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और कांग्रेस संयुक्त रूप से सरकार बनाने के लिए राज्यपाल के समक्ष संयुक्त पत्र सौंपेंगे.’’
वहीं एनसीपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि मैं नहीं समझता कि तीनों पार्टियां सरकार बनाने का दावा पेश करने में और समय लेंगी. विधान भवन के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फडणवीस के इस्तीफे की घोषणा के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार बुधवार को सदन के पटल पर शक्ति परीक्षण कराने की कोई जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा, ‘‘इसके बजाय राज्यपाल दूसरी सबसे बड़ी पार्टी शिवसेना को सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए आमंत्रित करेंगे.’’
अधिकारी के मुताबिक इसके लिए राज्यपाल को शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के संयुक्त बयान और विधायकों के हस्ताक्षर वाली सूची की जरूरत होगी. शिवसेना के 56, एनसीपी के 54 और कांग्रेस के 44 विधायकों की संयुक्त संख्या 154 होती है जबकि 288 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए केवल 145 सदस्यों की जरूरत है.
मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के तीन दिन बाद देवेंद्र फडणवीस ने अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी. उन्होंने कहा कि उप मुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार के निजी कारणों से इस्तीफा देने के बाद बीजेपी के पास सदन में बहुमत नहीं है.

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