महाराष्ट्र सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू, 5 साल पूरे करेंगे; शरद पवार ने मुलाकात को राज्यपाल से वक्त मांगा

शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे और राकांपा प्रमुख शरद पवार। (फाइल फोटो)
गठबंधन सरकार बनाने के लिए कांग्रेस, राकांपा और शिवसेना की समन्वय समिति मेंं ड्राफ्ट तैयार
मुख्यमंत्री पद के लिए शिवसेना के सामने कट्‌टरपंथी छवि से बाहर आने की शर्त; राकांपा उपमुख्यमंत्री पद पर राजी
शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस के बीच हर चार विधायकों पर एक मंत्री हाेने पर सहमति बनी
राकांपा प्रमुख शरद पवार 17 नवंबर को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ सरकार को लेकर चर्चा करेंगे
मुंबई . महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार बनाने के लिए शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस की समन्वय समिति की पहली बैठक में न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) की रूपरेखा तय हो चुकी है। शुक्रवार को शरद पवार ने कहा- सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू, 5 साल पूरे करेंगे। हमने मुलाकात के लिए राज्यपाल से शनिवार दोपहर 3 बजे का वक्त मांगा है।
पवार ने कहा- पार्टियां स्थिर सरकार चाहती हैं, जिनका मकसद विकास करना होगा। मध्यावधि चुनाव की कोई गुंजाइश नहीं है। यह सरकार बनेगी और अपना पांच सालों का कार्यकाल पूरा करेगी। हम सभी यह सुनिश्चित करते हैं कि सरकार पांच साल तक चलेगी। हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस का गठबंधन 6 महीने से ज्यादा नहीं चलेगा। इस पर पूछे गए सवाल के जवाब में पवार ने कहा- मैं देवेंद्र जी को कुछ सालों से जानता हूं। मगर मुझे इस बात का पता नहीं था कि वे एक ज्योतिषी भी हैं।
साझा कार्यक्रम में महाराष्ट्र के हितों का ध्यान रखा जाएगा: शिवसेना
इससे पहले शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने कहा था कि साझा कार्यक्रम में महाराष्ट्र के हितों को ध्यान में रखा जाएगा। पूरे 5 साल शिवसेना का ही मुख्यमंत्री होगा। वहीं, राकांपा नेता नवाब मलिक ने कहा कि शिवसेना के साथ आने में कांग्रेस कुछ हिचकिचा रही है। ड्राफ्ट की कॉपी सोनिया गांधी को भेजी है, अगर कांग्रेस साथ नहीं आई तो सरकार नहीं बनाएंगे।
मुख्यमंत्री पद के मुद्दे पर ही शिवसेना ने भाजपा से गठबंधन तोड़ा: मलिक
मलिक ने कहा- ”मुख्यमंत्री पद के मुद्दे पर ही शिवसेना ने भाजपा से गठबंधन तोड़ा है। इसलिए उसके सम्मान और स्वाभिमान को जीवित रखना हमारी जिम्मेदारी है। महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए सभी दलों को साथ आना होगा। लेकिन कांग्रेस इससे कुछ हिचकिचा रही है। साझा कार्यक्रम का ड्राफ्ट सोनिया गांधी को भेजा गया है। अगर वो साथ नहीं आएगी तो सरकार नहीं बनाएंगे। राष्ट्रपति शासन लगने से प्रशासनिक व्यवस्थाएं पूरी तरह ठप हो गई हैं। राज्य के किसान परेशान हैं, उन्हें फसल की बुआई करनी है। तीनों पार्टियों ने इस मुद्दे पर राष्ट्रपति से मुलाकात करने की योजना बनाई है।”
ड्राफ्ट में किसानों का मुद्दा प्रमुखता से शामिल
तीनों दलों की समन्वय समिति की गुरुवार को बैठक हुई। इसके बाद कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने बताया कि ड्राफ्ट में किसानों का मुद्दा प्रमुखता से शामिल है। केवल एक-दो मुद्दों पर चर्चा होनी बाकी है। नई सरकार में मुख्यमंत्री पद शिवसेना के पास ही रहेगा। सूत्रों के मुताबिक, राकांपा उपमुख्यमंत्री पद पर मान गई है। बैठक में राकांपा प्रदेश प्रमुख जयंत पाटिल, राकांपा नेता छगन भुजबल और पार्टी के प्रवक्ता नवाब मलिक, कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण, मणिकराव ठाकरे, विजय वडेट्टीवर, शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे और सुभाष देसाई शामिल हुए।
शिवसेना के सामने रखी कट्‌टरपंथी छवि से बाहर आने की शर्त
कांग्रेस और राकांपा ने शिवसेना के सामने कट्टरपंथी हिंदूवादी पार्टी की छवि से बाहर आने की शर्त रखी है। कांग्रेस को शिवसेना को समर्थन देने से सबसे ज्यादा हिचक उसकी इसी छवि को लेकर है। वहीं राकांपा प्रमुख शरद पवार और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी 17 नवंबर को दिल्ली में शिवसेना के साथ गठबंधन सरकार बनाने के मुद्दे पर चर्चा करेंगे।
तीनों दलों के बीच सहमति बनी है कि प्रत्येक पार्टी के हर चार विधायकों पर एक मंत्री हाेगा। यह फाॅर्मूला लगभग तय है। शिवसेना के 56 विधायक हैं, उन्हें सात अन्य विधायकों का समर्थन है यानी शिवसेना के कुल 63 विधायक हैं। ऐसे में उसके 15 या 16 मंत्री होंगे। राकांपा के 11 या 12 मंत्री होंगे। वहीं कांग्रेस के 44 विधायक हैं, ताे उसे खाते में 11 मंत्री हाेंगे।

शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस साथ आए तो बहुमत
कुल सीटें: 288/ बहुमत: 145
दल सीटें
शिवसेना 56
एनसीपी 54
कांग्रेस 44
कुल 154
निर्दलीय 9 विधायक साथ होने का दावा
तब कुल संख्या बल 163
महाराष्ट्र में अन्य दलों की स्थिति
पार्टी सीट
भाजपा 105
बहुजन विकास अघाड़ी 3
एआईएमआईएम 2
निर्दलीय और अन्य दल 15
कुल 125

कॉमन मिनिमम प्रोग्राम में क्या करेंगे शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस
महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की गठबंधन सरकार बनाने के लिए कॉमन मिनिमम प्रोग्राम तय कर लिया गया है
महाराष्ट्र (Maharashtra) में शिवसेना (Shiv Sena), एनसीपी (NCP) और कांग्रेस (Congress) की गठबंधन सरकार बना लिए जाने का दावा किया जा रहा है. बताया जा रहा है कि उस कॉमन मिनिमम प्रोग्राम पर बात बन गई है, जिसके आधार पर सरकार बनने वाली है..
महाराष्ट्र (Maharashtra) में शिवसेना (Shiv Sena), एनसीपी (NCP) और कांग्रेस (Congress) की गठबंधन सरकार बना लिए जाने का दावा किया जा रहा है. कहा जा रहा है कि उस कॉमन मिनिमम प्रोग्राम पर बात बन गई है, जिसपर शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की गठबंधन सरकार बनने वाली है. बताया जा रहा है कि शिवसेना महाराष्ट्र की अगली सरकार का नेतृत्व करेगी, जिसे एनसीपी और कांग्रेस का समर्थन प्राप्त होगा. शिवसेना नेता संजय राउत ने यहां तक दावा किया है कि महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना सिर्फ 5 साल नहीं बल्कि अगले 25 वर्षों तक राज करेगी.
सरकार बनाने का फॉर्मूला ढूंढ़ लिए जाने के बीच ये सवाल उठ रहा है कि अलग-अलग विचारधारा रखने वाली शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस आखिर एक कॉमन पॉइंट पर कैसे पहुंचे हैं? तीनों पार्टियों ने किस आधार पर कॉमन मिनिमम प्रोग्राम बनाया है और उसमें कौन-कौन से मुद्दे शामिल हैं?
शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के कॉमन मिनिमम प्रोग्राम में है क्या?
शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस ने 40 पाइंट का कॉमन मिनिमम प्रोग्राम बनाया है. सरकार बनाने की दिशा में इसे सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के सभी पॉइंट्स अब तीनों पार्टियों के अध्यक्ष डिस्कस करेंगे. इसके बाद 19 नवंबर तक सरकार बनाने का फाइनल ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया जाएगा. 17 नवंबर को एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के बीच मुलाकात होनी है. इसके बाद तस्वीर कुछ और साफ हो सकेगी.
किसानों और युवाओं पर है सीएमपी का फोकस
बताया जा रहा है कि तीन पार्टियों के कॉमन मिनिमम प्रोग्राम में किसानों और युवाओं पर फोकस किया गया है. इसमें हिंदुत्व से जुड़े मुद्दों का जिक्र नहीं है. गठबंधन सरकार बनाने के लिए शिवसेना ने हिंदुत्व को लेकर अपने तेवर नरम किए हैं. जिन मुद्दों पर शिवसेना और एनसीपी-कांग्रेस के बीच टकराव की स्थिति बनती है, उसे फिलहाल ठंडे बस्ते में रखा गया है. बताया जा रहा है कि शिवसेना ने अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर भी नरमी रखी है.
कॉमन मिनिमम प्रोग्राम में विवादित मुद्दों से परहेज किया गया है
कांग्रेस और एनसीपी के घोषणापत्र में मुस्लिमों के लिए शिक्षा में 5 फीसदी आरक्षण का वादा किया गया था. शिवसेना मुसलमानों को 5 फीसदी आरक्षण दिए जाने के विरोध में थी. लेकिन अब बताया जा रहा है कि गठबंधन सरकार बनाने के लिए शिवसेना मुसलमानों को 5 फीसदी आरक्षण देने पर राजी हो गई है.
अल्पसंख्यक समुदाय की शिक्षा के लिए 5 फीसदी रिजर्वेशन की व्यवस्था पिछले कांग्रेस एनसीपी के शासनकाल में आगे बढ़ाई गई थी. लेकिन महाराष्ट्र की सत्ता में बीजेपी-शिवसेना के आ जाने की वजह से इसे लागू नहीं किया जा सका था. अब शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस की गठबंधन सरकार में इसे अमल में लाया जाएगा. बताया जा रहा है कि कॉमन मिनिमम प्रोग्राम में इस बात का जिक्र है.
सीएमपी में विवादित मुद्दों का नहीं है जिक्र
कॉमन मिनिमम प्रोग्राम बनाते वक्त तीनों पार्टियों ने अपने मतभेदों पर भी बात की है. वीर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की मांग भी एक ऐसा ही मुद्दा है. शिवसेना वीर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की मांग करती रही है. जबकि कांग्रेस और एनसीपी इसका विरोध करती रही है. बताया जा रहा है कि शिवसेना फिलहाल इस मसले को ठंडे बस्ते में डाल सकती है. गठबंधन सरकार का रास्ता साफ करने के लिए ऐसा करना जरूरी है.
सरकार बनाने के लिए शिवसेना और कांग्रेस करीब आ रहे हैं
फिलहाल तो यही बताया जा रहा है कि कॉमन मिनिमम प्रोग्राम का फोकस किसान और युवा होंगे. कांग्रेस और एनसीपी किसानों के मुद्दे उठाती आई हैं. दोनों पार्टियों के अहम वायदों में किसानों की पूरा कर्जमाफी है. इसे सीएमपी में शामिल किया जा सकता है. इसके साथ ही 10 रुपए में भरपेट खाने का वायदा भी है. बेरोजगारों के लिए मासिक भत्ते और स्थानीय लोगों को नौकरी में कोटा दिए जाने का मुद्दा भी है. इन मुद्दों को सीएमपी में शामिल किया जा सकता है.
कॉमन मिनिमम प्रोग्राम पर बात करते हुए कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण पहले ही कह चुके हैं कि कॉमन मिनिमम प्रोग्राम बनाने के लिए हमने शिवसेना के साथ कांग्रेस और एनसीपी के घोषणापत्रों को पढ़ा है और तीनों के कुछ अहम मुद्दों को सीएमपी में शामिल किया है. उन्होंने कहा कि ये इलेक्शन मैनिफेस्टो नहीं बल्कि एक्शन प्लान है, जिसके आधार पर एक स्वच्छ और ईमानदार सरकार का गठन होगा. इसमें विवादित मुद्दों को शामिल नहीं किया गया है.

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