राजस्थान+मध्यप्रदेश+छत्तीसगढ़+पंजाब से धनी है महाराष्ट्र,जाने अर्थशास्त्र की कहानी

कांग्रेस शासित राज्य पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की कुल जीडीपी भी महाराष्ट्र की जीडीपी के बराबर नहीं बैठती है. वहीं, देश की जीडीपी में महाराष्ट्र 14 फीसदी का योगदान देता है.
कांग्रेस शासित राज्य पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की कुल जीडीपी भी महाराष्ट्र की जीडीपी के बराबर नहीं बैठती है. वहीं, देश की जीडीपी में महाराष्ट्र 14 फीसदी का योगदान देता है.
मुंबई. महाराष्ट्र में अब सियासी घमासान समाप्त हो गया है. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे आज देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. लेकिन अब सवाल उठता है कि पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र की सत्ता को लेकर क्यों इतनी उठा-पटक हो रही थी. इसको लेकर देश के बड़े आर्थिक जानकार बताते हैं कि क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़ा राज्य राजस्थान भी महाराष्ट्र से पीछे है. वहीं, पंजाब, मध्य-प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान की कुल जीडीपी भी महाराष्ट्र की बराबर नहीं कर पाती है. अगर आंकड़ों की बात करें तो, महाराष्ट्र के आर्थिक सर्वे में राज्य की जीडीपी 26.60 लाख करोड़ रुपये बताई गई थी. वहीं, इन सभी राज्यों की जीडीपी मिलाकर 25.71 लाख करोड़ रुपये बैठती है.
जीडीपी में टॉप पर है महाराष्ट्र- भारत में जीडीपी साइज के लिहाज से महाराष्ट्र टॉप पर है. वहीं, इस लिस्ट में तमिलनाडु दूसरे स्थान पर आता है. इसके बाद उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात का नंबर आता है.
अन्य राज्यों के मुकाबले कितना धनी है महाराष्ट्र- कांग्रेस शासित प्रदेश राजस्थान की जीडीपी 9.29 लाख करोड़ रुपये है. वहीं, मध्य प्रदेश की 8.09 लाख करोड़, पंजाब 5.21 लाख करोड़, छत्तीसगढ़ की 3.12 लाख करोड़ रुपये है. इन राज्यों की जीडीपी कुल 25.71 लाख करोड़ रुपये के करीब है. वहीं, महाराष्ट्र की कुल जीडीपी 26.60 लाख करोड़ रुपये है.
प्रति व्यक्ति आय के मामले में महाराष्ट्र टॉप-3 में – महाराष्ट्र -प्रति व्यक्ति आय के मामले में तीसरे नंबर पर है. इस मामले में कर्नाटक और तेलगांना महाराष्ट्र से आगे हैं. राज्य में प्रति व्यक्ति आय 1 लाख 91 हजार 827 रुपये है, जबकि कर्नाटक में प्रति व्यक्ति आय 2 लाख 7 हजार 62 रुपये और तेलगांना में 2 लाख 6 हजार 107 रुपये है. पिछले साल की अपेक्षा इस वर्ष राज्य में प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी हुई है. वर्ष 2017-18 में प्रति व्यक्ति आय 1 लाख 76 हजार 1022 रुपये थी, जो 2018-19 में बढ़कर 1,91,827 रुपये हो गई.
महाराष्ट्र की जीडीपी- वित्त वर्ष 2018-19 में महाराष्ट्र की जीडीपी बढ़कर 26.60 लाख करोड़ रुपये हो गई. वहीं, इस दौरान फिस्कल डेफेसिट यानी वित्तीय घाटा (आमदनी और खर्च के बीच का अंतर) 1.2 फीसदी रहने का अनुमान है. यह देश के बड़े राज्यों में सबसे बेहतर है. महाराष्ट्र की आबादी 11.4 करोड़ है. जबकि अकेले मुंबई में ही करीब 2 करोड़ लोग रहते हैं.
महाराष्ट्र के आर्थिक आंकड़ों पर एक नज़र
>> 2017-18 में 111.02. लाख टन दूध का उत्पादन
>> 2018-19 में राज्य में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 80013 करोड़
>> दिसंबर 2018 तक राज्य में लैंडलाइन टेलीफोन 45.10 लाख व मोबाइल फोन की संख्या 1,325. 50 लाख
>> राज्य में वाहनों कि संख्या 322 लाख से बढ़ कर 349 लाख हुई
मुंबई में रहते हैं सबसे ज्यादा रईस- बार्कलेज हुरुन की रिपोर्ट के मुताबिक, 246 यानी 26 फीसदी अमीरों के साथ मुंबई अमीरों की राजधानी बनी हुई है. इसके बाद नई दिल्ली (175) और बेंगलुरु (77) का नंबर आता है. सूची में 82 एनआरआई को भी जगह मिली है, जिनमें से 76 फीसदी सेल्फ-मेड हैं.
सोनिया और राहुल गांधी ने उद्धव ठाकरे को बधाई दी है या आगाह किया है!
सोनिया और राहुल गांधी ने उद्धव ठाकरे को बधाई दी है या आगाह किया है!सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने पत्र लिखकर उद्धव ठाकरे से शपथ ग्रहण समारोह में न आ पाने के लिए माफी मांगी है (फाइल फोटो, PTI)
कांग्रेस (Congress) अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के पत्रों की भाषा को गौर से पढ़ें तो यह पत्र बधाई से ज्यादा आने वाली चुनौतियों से आगाह करने वाले पत्र लगते हैं.
उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) के रूप में पहली बार मातोश्री का कोई सदस्य देश के सबसे अमीर राज्य का मुख्यमंत्री (CM) बनने जा रहा है. देश की व्यावसायिक राजधानी के शिवाजी पार्क (Shivaji Park) में जब ठाकरे शपथ ले रहे होंगे तो उन्हें बधाइयों के ढेर में दो बधाइयां खासकर याद रहेंगी जो उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस (Congress) के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के पत्रों में दी गई है. इन पत्रों की भाषा को गौर से पढ़ें तो यह पत्र बधाई से ज्यादा आने वाली चुनौतियों से आगाह करने वाले पत्र लगते हैं. इनकी भाषा से यह साफ होता है कि ये पत्र किसी आपद धर्म का निर्वाह करने के लिए लिखे गए हैं.
सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने अपने पत्र के पहले पैराग्राफ में नव नियुक्त मुख्यमंत्री को बधाई दी और साथ ही शपथग्रहण समारोह में शामिल न हो पाने पर खेद व्यक्त किया. इसके बाद सोनिया गांधी ने साफ लिखा ” शिव सेना, एनसीपी और कांग्रेस ऐसे बेहद असामान्य हालात में एक साथ आए हैं, जब देश भाजपा की तरफ से अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना कर रहा है. राजनैतिक वातावरण जहरीला हो गया है और अर्थव्यवस्था ढह गई है. किसान आफत के मारे हैं.” इसके आगे सोनिया गांधी नए मुख्यमंत्री को याद दिलाती हैं ” शिव सेना, एनसीपी और कांग्रेस एक साझा कार्यक्रम पर सहमत हुए हैं. मुझे पूरा भरोसा है कि तीनों पार्टियां इस प्रोगाम को अक्षरश: लागू करने के लिए कोई कसर बाकी नहीं रहने देंगी.”
देश की परिस्थितियों को असामान्य और राजनैतिक माहौल (Political Environment) को जहरीला बताने जैसे कठोर शब्दों का प्रयोग शायद ही कभी बधाई पत्रों में किया जाता हो. यही नहीं भाजपा की ओर से देश को अभूतपूर्व खतरे की बात कह कर सोनिया गांधी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि यह गठबंधन आपद् धर्म का निर्वाह करने के लि बना है.
जिस तरह की धीर गंभीर भाषा का इस्तेमाल सोनिया गांधी ने किया उससे आगे बढ़कर भाषा का प्रयोग राहुल गांधी ने किया है. राहुल ने भी पहली लाइन में बधाई दी और कार्यक्रम में न आ पाने की बात कही. उसके बाद राहुल ने लिखा, ” महाराष्ट्र में सरकार बनने के पहले के घटनाक्रम ने देश के लोकतंत्र के सामने एक खतरनाक नजीर पेश की है. मुझे खुशी है कि महाराष्ट्र विकास अघाड़ी (Maharashtra Vikas Aghadi) ने लोकतंत्र को नजरअंदाज करने की भाजपा की कोशिश का जवाब दिया है.” पत्र के अंत में राहुल गांधी ने यह भी लिख दिया कि उन्हें भरोसा है कि गठबंधन सरकार एक सेक्युलर और गरीब हितैषी सरकार साबित होगी.
राहुल गांधी के पत्र में उन्हीं चुनौतियों को और दृढ़ता से बताया गया जिनका जिक्र सोनिया गांधी ने किया था. इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस की परंपरा और देश के संविधान की भावना के अनुसार सेक्युलर (Secular) शब्द भी जोड़ दिया.
इन दोनों पत्रों में बधाई से ज्यादा यह दिखता है कि दोनों नेता मुख्यमंत्री को उनका कर्तव्य याद दिला रहे हैं और शायद उन्हें उनके कार्यक्षेत्र का दायरा भी बता रहे हैं.
सोनिया गांधी जहां उद्धव ठाकरे को कॉमन मिनिमम प्रोग्राम (Common Minimum Programme) से बाहर न जाने की नसीहत देती दिख रही हैं, वहीं राहुल गांधी उन्हें सांप्रदायिकता से बचने की सलाह देते दिख रहे हैं. इन दोनों पत्रों इन संदेशों को इसलिए नजरंदाज नहीं किया जा सकता क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी ठाकरे को बधाई दी है, लेकिन उनके पत्र की भाषा विशुद्ध बधाई पत्र की है, जिसमें आने वाली चुनौतियों की चर्चा न करने की परंपरा को कायम रखा गया है. मनमोहन के पत्र में देश की विकट स्थितियों की भी चर्चा नहीं की गई है. जाहिर सोनिया और राहुल ने इस बधाई पत्र के माध्यम से न सिर्फ ठाकरे को आगाह किया है बल्कि भविष्य में गठबंधन में उठने वाले किसी विवाद के लिए एक कसौटी भी तैयार कर दी है.

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