विपक्ष बाहर,चार और विधायकों ने नही किया ठाकरे का समर्थन

वो 4 विधायक, जिन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा में उद्धव ठाकरे का समर्थन नहीं किया…
विश्वासमत के दौरान 4 विधायक तटस्थ रहे यानी उन्होंने किसी भी तरफ वोट नहीं किया. उन्होंने ना तो उद्धव सरकार के पक्ष में वोट किया और ना ही उनके विपक्ष में वोट किया.
मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा (Maharashtra Assembly) में महाविकास अघाड़ी (Maha Vikas Aghadi) यानी शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की सरकार ने शनिवार को बहुमत साबित कर दिया. उद्धव सरकार को विश्वासमत में कुल 169 विधायकों ने समर्थन किया, जिसमें शिवसेना, एनसीपी, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, निर्दलीय और अन्य सहयोगी पार्टियों ने समर्थन किया.वोटिंग से ठीक पहले 105 विधायकों वाली बीजेपी ने सदन से वॉकआउट कर दिया. 288 सदस्यों वाली सूबे की विधानसभा में बहुमत के लिए 145 विधायकों की जरूरत होती है.
विश्वासमत के दौरान 4 विधायक तटस्थ रहे यानी उन्होंने किसी भी तरफ वोट नहीं किया. उन्होंने ना तो उद्धव सरकार के पक्ष में वोट किया और ना ही उनके विपक्ष में वोट किया.
आपको बता दें कि इन तटस्थ रहे विधायकों में उद्धव ठाकरे के भाई राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के एक मात्र विधायक प्रमोद (राजू) रतन पाटिल, CPI (M) के विधायक निकोले विनोद भीवा और एआईएमआईएम (AIMIM) के 2 विधायक मोहम्मद इस्माइल अब्दुल खालिक और शाह फारुख अनवर शामिल हैं. इन्होंने सदन के अंदर किसी भी पार्टी का समर्थन नहीं किया.
आपको बता दें कि महाराष्ट्र के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की शपथ के कार्यक्रम में MNS के अध्यक्ष राज ठाकरे शामिल हुए थे. उनके साथ उद्धव की मौसी और राज ठाकरे की मां भी मौजूद थीं, लेकिन महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के एकमात्र विधायक ने महाराष्ट्र विधानसभा में उद्धव सरकार के विश्वासमत साबित करने के दौरान समर्थन नहीं किया.
फ्लोर टेस्ट के बाद सदन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि मैं सामने से लड़ने वालों में से हूं. उन्होंने शपथ के दौरान छत्रपति शिवाजी का नाम लिए जाने को लेकर सवाल उठाए जाने पर कहा कि अगर नाम लेना गुनाह है तो मैं ऐसा गुनाह बार-बार करूंगा.
उल्लेखनीय है महाराष्‍ट्र विधानसभा में आज उद्धव ठाकरे सरकार ने बहुमत सिद्ध कर दिया. 2 बजे शुरू हुई कार्यवाही में विपक्ष के भारी हंगामे और सदन से बीजेपी और उसके घटक दलों के वॉकआउट के बीच उद्धव ठाकरे सरकार ने सदन में बहुमत सिद्ध कर दिया. सदन में 169 विधायकों ने उद्धव सरकार के पक्ष में मतदान किया, जबकि विरोध में 0 वोट आए. इसके अलावा 4 मत तटस्‍थ रहे. यानि उन्‍होंने किसी का समर्थन नहीं किया. इनमें 2 AIMIM, 1 CPM जबकि एक विधायक मनसे का था. इस तरह उद्धव ठाकरे की सरकार ने सदन में बहुमत साबित कर दिया.
सदन में बहुमत साबित कर लेने के बाद उद्धव ठाकरे ने महाराष्‍ट्र विधानसभा में पहली बार संबोधन देते हुए कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज का वंदन कर मैं यहां आया हूं. हमारा महाराष्‍ट्र छत्रपति शिवाजी महाराज का महाराष्‍ट्र है. वह हमारे देवता समान हैं. उन्‍होंने आगे कहा कि सदन में विरोधी पक्ष नहीं हैं. देवेंद्र फडणवीस ने अगर हमनें शपथ ग्रहण के दौरान शिवाजी महाराज, साहूजी महाराज और डॉ. भीमराव अंबेडकर का नाम लिया तो इन्‍हें आपत्ति क्‍यों है? ये लोग भी तो हमेशा इन महानुभावों के नाम लेते हैं. जिस तरह सदन से वॉकआउट किया गया, मैं कहना चाहूंगा कि ये वो महाराष्‍ट्र नहीं है, जैसा हम चाहते हैं. हमनें जिन भी महानुभावों के नाम अपनी शपथ ग्रहण के लिए हमें उन पर गर्व है. मैं मैदान में लड़ने वाला इंसान हूं.
फडणवीस क्या बोले?
इससे पहले बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस ने सदन में कहा कि इस विधानसभा सत्र का आयोजन नियमानुसार नहीं है. वहीं कार्यवाहक विधानसभा अध्यक्ष दिलीप वाल्से पाटिल ने फडणवीस के दावों को खारिज करते हुए कहा राज्यपाल की अनुमति के बाद सत्र का आयोजन किया गया. फडणवीस ने भाषण जारी रखा और कहा कि महाराष्ट्र के मंत्रियों का शपथ ग्रहण करना संवैधानिक मानदंडों के अनुरूप नहीं है.
उन्होंने कहा कि भारत में कार्यवाहक अध्यक्ष को कभी नहीं बदला गया तो बीजेपी के कोलम्बकर को पद से क्यों हटाया गया. फडणवीस के दावे पर वाल्से पाटिल ने कहा, राज्य मंत्रिमंडल को कार्यवाहक अध्यक्ष बदलने को ‘‘पूरा अधिकार’’ है. वाल्से पाटिल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार विश्वास मत के लिए खुला मतदान होगा.
मंत्रियों का कराया परिचय
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने राज्य विधानसभा में अपनी कैबिनेट के छह सदस्यों का परिचय कराया. मुंबई के शिवाजी पार्क में 28 नवंबर को ठाकरे के शपथ ग्रहण समारोह में छह मंत्रियों एकनाथ शिंदे और सुभाष देसाई (शिवसेना), जयंत पाटिल और छगन भुजबल (एनसीपी) और बालासाहेब थोराट और नितिन राउत (कांग्रेस) ने मंत्री पद की शपथ ली थी. ठाकरे ने विश्वासमत से पहले 14वीं विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान मंत्रियों का परिचय कराया.
महाराष्ट्र विधानसभा के कार्यवाहक अध्यक्ष के विश्वास मत पर गिनती करने का आदेश देने के बाद बीजेपी विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया. गौरतलब है कि 21 अक्टूबर को हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी 105 सीटों पर जीत के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी. वहीं, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटों पर जीत मिली थी.

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