चीनी राष्‍ट्रपति का ढोल नगाड़ों और भरतनाट्यम से भव्‍य स्‍वागत

महाबलीपुरम: चीनी राष्ट्रपति चिनफिंग के भव्य स्वागत
प्रधानमंत्री मोदी ने नहीं, अनौपचारिक शिखर बैठक के लिए चीन ने चुना था ममल्लापुरम
सूत्रों के मुताबिक मोदी-शी समिट के वेन्यू के लिए ममल्लापुरम का नाम चीन ने सुझाया था, जिस पर भारत तुरंत सहमत हो गया। ममल्लापुरम से चीन का ऐतिहासिक लिंक तो है ही, लेकिन राजनीतिक वजहों से भी यह प्रधानमंत्री मोदी के लिए काफी अहम है।

हाइलाइट्स
मोदी-शी अनौपचारिक शिखर बैठक के लिए ममल्लापुरम का चुनाव भारत ने नहीं, चीन ने किया था
समुद्र किनारे बसे प्राचीन नगर ममल्लापुरम के चीन के साथ हैं ऐतिहासिक रिश्ते, इसी वजह से हुआ चुनाव
चीन ने जब ममल्लापुरम का नाम सुझाया तो प्रधानमंत्री मोदी तुरंत राजी हो गए, भाज के लिए राजनीतिक वजहों से भी है परफेक्ट
भाजपा को उम्मीद, उसके मिशन 2021 (तमिलनाडु विधानसभा चुनाव) के लिए मुफीद है तमिलनाडु में मोदी-शी समिट का होना

चेन्नै(जया मेनन) चेन्‍नै एयरपोर्ट पहुंचे चीनी राष्‍ट्रपति का ढोल नगाड़ों और भरतनाट्यम से भव्‍य स्‍वागत किया गया। शी जिनपिंग ने भी इन कलाकारों का अभिवादन किया। शी जिन‍पिंग इसके बाद अपने होटल चले गए हैं। तमिलनाडु की AIADMK सरकार ने राजधानी चेन्नै और ममल्लापुरम (महाबलीपुरम) को खूबसूरती से सजाया है। जगह-जगह सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। इसकी वजह है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच दूसरी अनौपचारिक शिखर बैठक। खास बात यह है कि वेन्यू के लिए ममल्लापुरम का नाम चीन ने सुझाया था, जिस पर भारत तुरंत सहमत हो गया। ममल्लापुरम से चीन का ऐतिहासिक लिंक तो है ही, लेकिन राजनीतिक वजहों से भी यह प्रधानमंत्री मोदी के लिए परफेक्ट है।
भारत में चीन के पूर्व राजदूत झाओहुई ने सुझाया था नाम
पूरे मामले से वाकिफ एक सूत्र ने बताया कि 2 महीने पहले जब मोदी-शी शिखर बैठक के वेन्यू के लिए चीन में चर्चा हुई तो भारत में चीन के पूर्व राजदूत और मौजूदा उप विदेश मंत्री लु झाओहुई ने ममल्लापुरम को चुना। झाओहुई चीन के विद्वान शु फंचेंग के शिष्य रहे हैं और वह ममल्लापुरम के ऐतिहासिक महत्व से अच्छी तरह वाकिफ थे। उन्हें चीन के साथ इस प्राचीन नगर के ऐतिहासिक रिश्तों के बारे में जानकारी थी। उस बैठक में झाओहुई के अलावा भारत में चीन के मौजूदा राजदूत सुन वेइडोंग भी शामिल हुए थे। सूत्र ने बताया कि जब चीन ने दूसरे अनौपचारिक शिखर बैठक के वेन्यू के लिए अपनी पसंद का इजहार किया तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तुरंत हामी भर दी।
18वीं सदी में पल्लव राजा और चीन के शासक के बीच हुआ था सुरक्षा समझौता
चेन्नै के नजदीक समुद्र किनार बसे इस ऐतिहासिक नगर का चीन के साथ काफी पुराना रिश्ता है। 18वीं सदी में यही पर तत्कालीन पल्लव राजा और चीन के शासक के बीच सुरक्षा समझौता हुआ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ममल्लापुरम राजनीतिक लिहाज से और भी अहम है क्योंकि यह तमिलनाडु में भाजपा की योजनाओं के लिए फिट बैठता है।
राजनीतिक तौर पर प्रधानमंत्री मोदी के लिए भी परफेक्ट है ममल्लापुरम
ममल्लापुरम के चीन के साथ ऐतिहासिक लिंक से इतर, तमिलनाडु भाजपा की प्राथमिकता सूची में शामिल है क्योंकि हालिया चुनाव में दक्षिण के इस सूबे में मोदी मैजिक काम नहीं कर सका था। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव पी. मुरलीधर राव के मुताबिक समिट के लिए तमिलनाडु का चुनाव भाजपा के लिए भी बेहद मुफीद है। वह कहते हैं, ‘ भाजपा के बारे में धारणा है कि यह एक हिंदी पार्टी है। मोदी के तमिलनाडु दौरे में इजाफा से यह समझ बढ़ेगी कि सूबा हमारे लिए राजनीतिक तौर पर बहुत महत्वपूर्ण है।’
गो बैक मोदी’ का ‘वेलकम मोदी’ में बदलना गेमचेंजर
तमिलनाडु भाजपा के नेता भी बहुत जोश में और आशावादी दिख रहे हैं। भाजपा के राज्य सचिव प्रोफेसर आर. श्रीनिवासन कहते हैं, ‘अब तक यहां विपक्ष का ‘गो बैक मोदी’ नारा चलता रहा है। लेकिन अब डीएमके चीफ एम. के. स्टालिन समिट के लिए मल्लापुरम को चुनने के लिए मोदीजी को धन्यवाद दे रहे हैं। अब यह नारा बदल गया है। वे ‘वेलकम मोदी’ बोल रहे हैं। यह गेमचेंजर है।’ बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी जब-जब तमिलनाडु दौरे पर पहुंचे हैं तब विपक्षी पार्टियां खासकर डीएमके ट्विटर पर ‘गो बैक मोदी’ हैशटैग को ट्रेंड कराती रही हैं।
मोदी-शी समिट से पहले तमिलनाडु में जगह-जगह से भाजपा नेता चेन्नै पहुंच रहे हैं। भाजपा इस उम्मीद में है कि तमिलनाडु में मोदी-शी समिट से उसके मिशन 2021 (तमिलनाडु विधानसभा चुनाव) और 2024 (लोकसभा चुनाव) के लिए सकारात्मक माहौल बनाने में मदद मिलेगी।
दक्षिण भारतीय व्‍यंजनों का आनंद लेंगे चीनी राष्‍ट्रपति
अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान चीनी राष्‍ट्रपति दक्षिण भारतीय व्‍यंजनों का जमकर लुत्‍फ उठाएंगे। पीएम मोदी ने शी के स्‍वागत में आज शाम विशेष डिनर का आयोजन किया है। डिनर के दौरान सभी तरह के दक्षिण भारतीय व्‍यंजन परोसे जाएंगे। इसमें तक्‍कली रसम से लेकर अराचविट्टा सांभर, कदाली कुरुमा से लेकर कावनरसी हलवा शामिल होगा। चेत्तिनाद से लेकर कराईकुडी तक सभी तरह के क्षेत्रीय व्‍यंजन डिनर के दौरान पेश किए जाएंगे।
ममल्लापुरम में तीन स्मारकों का भ्रमण करेंगे चिनफिंग
ममल्लापुरम में चीनी राष्ट्रपति तीन स्मारकों का दौरा करेंगे। इसमें अर्जुन की तपस्यास्थली, पंच रथ और शोर मंदिर शामिल हैं। शोर मंदिर में सांस्कृतिक नृत्य देखने के बाद वह प्रधानमंत्री मोदी के साथ डिनर करेंगे। यह सांस्कृतिक नृत्य भारत के प्रसिद्ध सांस्कृतिक नृत्य समूह कलाक्षेत्र द्वारा पेश किया जाएघा जिसे मशहूर क्लासिकल डांसर और ऐक्टिविस्ट रुक्मणि देवी ने 1936 में गठित किया था।
18 फलों-सब्जियों से बनाया तोरणद्वार
चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के स्वागत के लिए ममल्लापुरम में भी भव्य तैयारी की गई है। तोरणद्वार को सजाने के लिए अलग-अलग विभागों के तकरीबन 200 कर्मचारियों ने 10 घंटे तक मशक्कत की। भव्य द्वार की सजावट के लिए 18 प्रकार की सब्जियों और फल का इस्तेमाल किया गया है। खास बात यह है कि इन फलों और सब्जियों को राज्य के अलग-अलग हिस्सों से यहां लाया गया है।
शोर मंदिर के पास केले के पेड़ से सजावट
डिपार्टमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर के अडिशनल डायरेक्टर तमिलवेंदन का कहना है कि ज्यादातर सब्जियां ऑर्गैनिक हैं और इन्हें सीधे खेतों से यहां पहुंचाया गया है। इसके साथ-साथ मशहूर शोर मंदिर के पास प्रधानमंत्री मोदी और चिनफिंग के शानदार स्वागत के लिए पारंपरिक रूप से केले के पेड़ लगाए गए हैं। सजावट में लाल और सफेद रंग के गुलाब का भी इस्तेमाल हुआ है। शी के नौका विहार की भी योजना है।

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