रियल एस्टेट सेक्टर में घोटाले से पूर्व मुख्यमंत्री नहीं जाते थे नोएडा-योगी

रियल एस्टेट रेग्यूलेटरी अथारिटी के राष्ट्रीय अधिवेशन में मुख्यमंत्री योगी
मुख्यमंत्री योगी बोले-रियल स्टेट सेक्टर में घोटाले की वजह से पूर्व मुख्यमंत्री नोएडा नहीं जाते थे!
लखनऊ में रियल एस्टेट रेग्यूलेटरी अथारिटी (Real Estate Regulatory Authority) के राष्ट्रीय अधिवेशन (National Convention) में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों के नोएडा (Noida) न जाने पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री योगी (CM YOGI)ने कहा कि उनसे पहले कोई भी मुख्यमंत्री ग्रेटर नोएडा या नोएडा नही जाता था क्योंकि यह मिथ फैलाया गया कि जो मुख्यमंत्री नोएडा या ग्रेटर नोएडा गया उसकी कुर्सी चली जाएगी. उन्होंने कहा कि यहां बड़ा घोटाला था इसलिए ये मिथ फैलाया गया.
लखनऊ. राजधानी लखनऊ में रियल एस्टेट रेग्यूलेटरी अथारिटी (Real Estate Regulatory Authority) के राष्ट्रीय अधिवेशन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने पूर्व मुख्यमंत्रियों के नोएडा व ग्रेटर नोएडा ना जाने की वजह रियल स्टेट सेक्टर की अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को बताया. इस दौरान उन्होंने प्रदेश के बायर्स और बिल्डर्स दोनों को रियल स्टेट के क्षेत्र में इंवेस्टमेंट को सुरक्षित बनाने और सभी समस्यायों के हल के लिए रेरा की उपयोगिता के बारे में भी बताया.उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कहा कि रेरा से घर खरीदने वालों के साथ सरकार व्यापारियों के हितों की भी रक्षा करेगी। इस मामले में वो जल्द ही बड़ी घोषणा करेंगे। रियल एस्टेट रेग्यूलेटरी अथारिटी के राष्ट्रीय अधिवेशन का योगी आदित्यनाथ ने दीप जलाकर का शुभारंभ किया। उनके साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी थे। मुख्यमंत्री ने उद्घाटन समारोह में खुलकर रेरा की वकालत की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अधिवेशन में रेरा को लेकर बहुत सारी बातें की जा चुकी हैं। इसको घर खरीदने वालों के सभी हितों को सुरक्षित करने के साथ 2016 में रियल एस्टेट कारोबारी के हितों के लिए लागू किया गया।
यह था मिथ !
सोमवार को राष्ट्रीय अधिवेशन में बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिल्डर्स को ये आश्वस्त किया कि प्रदेश में किसी बिल्डर को कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी इसके साथ ही मकान खरीदने वाले बायर्स भी इस बात के लिए आश्वस्त रहें कि उनके साथ कोई धोखा नहीं होने दिया जाएगा. मुख्यमंत्री के पूर्व मुख्यमंत्रियों के नोएडा न जाने पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने 19 मार्च 2017 को शपथ ली थी और उस वक्त कोई भी मुख्यमंत्री ग्रेटर नोएडा या नोएडा नही जाता था क्योंकि यह मिथ फैलाया गया कि जो मुख्यमंत्री नोएडा या ग्रेटर नोएडा गया उसकी कुर्सी चली जाएगी. उन्होंने कहा ग्रेटर नोएडा या नोएडा में बड़ा घोटाला था इसलिए ही ये मिथ फैलाया गया.
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि राज्य सरकार रियल एस्टेट मामले में चुपचाप तमाशा नहीं देख सकती. पिछले दस से 15 सालों में रियल इस्टेट वालों से घर खरीदने वाले परेशान थे. उनके पैसे की बंदरबांट हुई. पूरे पैसे देने के बाद भी उन्हें घर पर कब्जा नहीं दिया गया. इसलिए प्रदेश में रेरा की सख्त दरकार थी. इस समारोह के दौरान विशिष्ट अतिथि के रूप में केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास राज्यमंत्री हरदीप सिंह पुरी भी मौजूद थे.
रेरा का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को,25 शहरों में ऑनलाइन बिल्डिंग एप्रूवल शुरू : हरदीप सिंह पुरी
केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास राज्यमंत्री ने रेरा को प्रदेश में लाने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिली प्रेरणा को देते हुए रेरा की खुलकर वकालत की ! उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अधिवेशन में रेरा को लेकर बहुत सारी बातें की जा चुकी हैं. इसको घर खरीदने वालों (बायर्स) के सभी हितों को सुरक्षित करने के साथ 2016 में रियल एस्टेट कारोबारी के हितों के लिए लागू किया गया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से यह शुरू हुआ है. यह रोजगार सृजन के लिए बड़ा क्षेत्र है. रेरा ने घर खरीदने वालों के हितों के भरोसे के लिए बड़ा काम किया है.
केंद्रीय मंत्री आवास शहरी नियोजन हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि हम मॉडर्न ट्रंडेंसी एक्ट लाएंगे। हाउसिंग सेक्टर को ये मदद करेगा। एनसीआर में तीन बड़े प्रोजेक्ट हैं। जो कोर्ट से फैसला आएगा वह हम पालन करेंगे। जो कोर्ट में नहीं हैं उनके लिए रोडमैप है। हम रीयल एस्टेट का ईकॉमर्स पोर्टल लाएंगे। मकर संक्रन्ति तक इसको ले आएंगे। लखनऊ मेट्रो के उद्घाटन में योगी ने मुझे बुलाया था। 2017 अप्रैल से अब तक 192 किमी मेट्रो उत्तर प्रदेश में अनुमोदित है। 15 से 17 नवंंबर तक लखनऊ में इंटरनेशनल कांफ्रेंस अरबन मोबिलिटी पर लखनऊ में होगी। 25 शहरों में ऑनलाइन बिल्डिंग एप्रूवल शुरू हुआ है। देश के 1800 शहरों में ऑनलाइन बिल्डिंग एप्रूवल हुआ है। पहले हमारा नम्बर 187 था अब 25 वां नम्बर होगा। 18 से 20 हजार करोड़ का काम उत्तर प्रदेश में हो रहा है। एक प्री रेरा पोजिशन थी। तब ब्लैक मनी थी । लोग बोरे रुपयों के बिल्डर को देते थे। खुला भ्र्ष्टाचार था। रुपया डाइवर्ट किया गया। 70 साल तक रेग्युलेटर ही नहीं था। मोदी दो साल में रेरा ले आये। लोगों को गन्दी आदत पड़ी थी। लोगों ने हाईकोर्ट में रेरा के खिलाफ अपीलें की गई थी। मगर हम जीते।
रियल एस्टेट से जुड़ा देश की जीडीपी का आठ फीसद : दुर्गाशंकर मिश्र
सचिव आवास शहरी विकास मंत्रालय भारत सरकार, दुर्गाशंकर मिश्र ने कहा कि रियल एस्टेट बहुत महत्वपूर्ण विषय है। हमारे देश की जीडीपी का आठ फीसद इससे जुड़ा है। चार करोड़ रोजगार हैं। 7 बिलियन डॉलर का विदेशी निवेश होता है। शहरी इलाके में 2030 आबादी 50 करोड़ हो जायेगी। 2050 तक हमारी शहरी आबादी 80 करोड़ हो जाएगी। रेरा से पहले नियंत्रण नहीं था। दो साल पूरे हो रहे हैं। नये भारत का निर्माण इसी पारदर्शिता से होगा। पहले रीयल एस्टेट की छवि अच्छी नहीं थी। 46 हजार कम्पनी रेरा में रजिस्टर्ड है। पूरे 30 हजार केस डिस्पोज हुए उसमें सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में 13 हजार केस हल किये गए हैं। सभी रेरा के अध्यक्ष काेे आल इंडिया फोरम बना दिया गया है। सभी निर्णय भी एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाये जा रहे हैं। 1.1 करोड़ की डिमांड हुई, जिसमें 93 लाख स्वीकार की। 55 लाख बनना शुरू हुए 30 लाख डिलीवर किये जा चुके हैं। उत्तर प्रदेश में 14.50 लाख मकान स्वीकर किये हैं।
2022 तक सबको घर देने में रेरा की सबसे ज्यादा भूमिका : शाह
क्रेडाई के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेक्से शाह ने कहा कि उत्तर प्रदेश हम गुजरातियों को अपना लेता है। मैं इस धरती को नमन करता हूँ जहां भारत की आत्मा बस्ती है। रेरा एक निर्णायक कदम है। रेरा ने रीयल एस्टेट को नया आयाम दिया है। मैं क्रेडाई के 15 हजार सदस्यों ने रेरा को मन से स्वीकार किया। 2030 तक रीयल एस्टेट का हिस्सा देश मे एक ट्रिलियन यूएस डॉलर होगा। कृषि के बाद देश मे सबसे ज्यादा रोजगार रेरा से ही है। 2022 तक सबको घर देने में रेरा की सबसे ज्यादा भूमिका है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में कंपनी में खींचा जा रहा है। 1151 में कम्पनी लॉ ट्रिब्यूनल में आए जिनमें से 65 फीसद रीयल एस्टेट के हैं। रेरा को सारे अधिकार हैं। कानून में संशोधन की आवश्यकता हैं रेरा में सुने जाने के बाद ही अन्य फोरम में समस्या सुनी जाए। आर्थिक मंदी का भी असर है। रीयल एस्टेट पर संकट है। ये एक पेंचीदा कारोबार है। 100 एनओसी लेनी होती है। कभी कभी गलती होती है। वह अपराध नहीं होती है।
जीवन का महत्वपूर्ण उद्देश्य एक घर बनाना :आरके तिवारी
मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश आरके तिवारी ने कहा कि प्रदेश के लिए सौभाग्य है कि रेरा का पहला कॉन्क्लेव यूपी में हो रहा है। रीयल एस्टेट महत्वपूर्ण विषय है। हमारी भारतीय सोच में जीवन का महत्वपूर्ण उद्देश्य एक घर बनाना भी है। जब घर बनानें में कठिनाई होती है तो वह कष्टकारी होता है। मुझे खुशी है कि विगत ढाई साल में रीयल एस्टेट के लिए बड़े निर्णय लिए हैं। पीएम आवास योजना में उत्तर प्रदेश ने सबसे अधिक 25 लाख आवास निर्माण करवाया है। यूपी रेरा भी कई मामलों में नम्बर एक रहा है। रीयल एस्टेट में बिल्डिंग अप्रूवल के लिए समयबद्ध तरीके से अनुमोदन मिलेगा। अगर अनुमोदन नहीं हुआ तो स्वतः अनुमोदन होगा। लैंडपूलिंग 25 या उससे अधिक में कास्तकारों की भूमि चिनिहत की गई। जमीन की कमी पूरी नहीं होने दी जायेगी। ढाई साल में 83 हजार होम बायर्स को उनके फ्लैट उपलब्ध कराए गए हैं। पूर्वांचल और बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस वे बनाया जाएगा। प्रदेश सरकार का संकल्प है कि रीयल एस्टेट का विकास तभी सम्भव है जब निर्णय लेने में एक दिन की भी देरी न हो।
रुका निर्माण सबसे बड़ा संकट : प्रवीण जैन
ट्यूलिप ग्रुप के सीएमडी प्रवीण जैन ने कहा कि इस कान्क्लेव में हम इंड्रस्ट्री पार्टनर हैं। अगले साल 2040 में 71 लाख करोड़ का कारोबार होगा। कान्क्लेव में काफी चीजे सामने आएंगी। रुका निर्माण सबसे बड़ा संकट है। पुराने प्रोजेक्ट में छह लाख घर फंसे हैं। उन घरों को पूरा करने के लिए रेरा को और मजबूत बनाया जाए। पुराने घरों को तीन साल में पूरा कर रहे हैं। नरेडको का उत्तर प्रदेश चेप्टर हम शुरू कर रहे हैं।
रेरा का प्रभाव और बढ़ेगा : अभय उपाध्याय
चेयरमैन कलेक्टिव पीपल्स फोरम अभय उपाध्याय ने कहा कि इस कॉन्क्लेव में रेरा का प्रभाव और बढ़ेगा। हम होम बायर्स की बात करते हैं। हम अब तक ये बात करते थे कि कितना रजिस्ट्रेशन हुए। मगर अब हम इस पर देखें कि कितने समय मे रेरा प्रोजेक्ट पूरे हुए। कितने लोगों को मकान मिले कितने को रिफण्ड मिले। जब एक प्रोजेक्ट पूरा होता है तब सुविधा कम मिलती है। कार्पेट एरिया कम होता है और शुल्क बढ़ा दिया गया है। इसकी जांच रेरा को करनी होगी। ऐसा करने से होम बायर्स का भरोसा बढ़ेगा। पारदर्शिता बढ़ाई जानी चाहिए। रेरा के केस की लाइव फीड उपलब्ध हो। रिकार्डिंग भी मौजूद रहे। इससे भरोसा बढाना है। आर्डर रिजर्व हो जाता है बहुत समय रखा जाता है। 30 दिन से अधिक आर्डर रिजर्व न रखी जाए। डेली दंड लगाया जाए। जारी लंबित प्रोजेक्ट को एक टाइम फ़्रेम बनाए। ताकि जो लोग फंसे हैं उनको राहत मिल जाए।
रेरा अधिवेश में घर खरीदने वालों की परेशानियां और उनके निदान के साथ बिल्डरों को चुनौतियां और भविष्य में तरक्की के रास्ते विषय पर चर्चा होगी। उत्तर प्रदेश रीयल एस्टेट रेग्यूलेटरी अथारिटी पूरे दिन इन्हीं विषयों पर देश के प्रख्यात विद्वानों के बीच चर्चाएं कराएगी। घर खरीदने-बेचने की प्रक्रिया से जुड़े देश के करीब 60 विशेषज्ञ चार सत्रों में ये यहां अपनी बातें रखेंगे।
वहीं कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश रेरा के कानूनी सलाहकार वेंकट राव कहतें हैं कि रेरा बिल्डर और बायर दोनों के लिए एक मजबूत कड़ी साबित हो रहा है. अब लोग अपनी परेशानी को लेकर रेरा में सीधे वाद दायर कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि दिल्ली से सटे एनसीआर में बड़े पैमाने पर बायर्स के साथ धोखा-धड़ी की शिकायतें सामने आईं जिनका निस्तारण रेरा ने बखूबी किया है.उत्तर प्रदेश रेरा के अध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि अभी भी रियल इस्टेट में नकदी की काफी कमी है।
कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए बिल्डर्स का कहना है कि इस तरह के कॉन्कलेव होते रहने चाहिए जिससे बिल्डर्स का भी भरोसा बढ़ता है और रेरा के कारण अब निर्माण से जुड़े तमाम काम सिंगल विंडो में हो जाते हैं. अब प्रोजेक्ट डिलीवरी में देरी हो या फिर तय निर्माण के प्लान में तब्दीली,अतिरिक्त फीस की वसूली हो या पार्किंग स्पेस, स्टोरेज स्पेस या एलीवेटर जैसी सुविधाओं के न मिलने की समस्या. अगर आप भी बायर हैं और आप भी ऐसा कोई इश्यू फेस कर रहे हैं तो आप रेरा के तहत अपनी शिकायत सीधे दर्ज करा सकते हैं.
ऐसे दर्ज कराएं अपनी शिकायत
होम बायर्स अपनी शिकायत को ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं कई राज्यों में ऑनलाइन आवेदन करने का विकल्प मौजूद है. उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में बायर को डायरेक्टली शिकायत दर्ज कराने की सुविधा मौजूद है. एक बायर के तौर पर आपको अपना नाम, पता, फोन नंबर जैसी निजी जानकारी समेत प्रोजेक्ट डिटेल देनी होंगी.
प्रोजेक्ट डिटेल में प्रमोटर का नाम, कुल जमा की गई राशि, फ्लैट की कीमत और डेवलपर द्वारा दी गई कोई रसीद या डॉक्यूमेंट शामिल होगा. इसके साथ आपको एजेंट या डेवलपर के साथ चल रहे मुद्दे का सार भी बताना होगा. साथ ही यह भी बताना होगा कि आप इस समस्या के समाधान के तौर पर क्या चाहते हैं
अगर आपने इस मुद्दे को लेकर पहले कोई केस फाइल किया है तो आपको उसकी डिटेल भी देनी होगी.
यह सारी डिटेल देने के बाद आपको निर्धारित फीस भरनी होगी. यह फीस अलग-अलग राज्यों के लिए अलग हो सकती है. महाराष्ट्र में यह फीस 5 हजार रुपए है जबकि कर्नाटक में 1 हजार रुपए. गौरतलब है कि 27 जुलाई 2019 तक रेरा ने देशभर में 20,454 मामलों का निपटारा किया है.

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