प्रेम प्रसंग में बाधक बनने पर की गयी थी भाजपा नेता चाौ. यशपाल सिंह की हत्या

सहारनपुर 07 नवंबर । देवबंद के भाजपा नेता चाौधरी यशपाल सिंह की हत्या प्रेम प्रसंग में बाधक बनने पर की गयी थी जिसमें उनकी भतीजी भी शामिल रही थी। पुलिस ने भतीजी और उसके प्रेमी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर हत्याकांड का खुलासा कर दिया है।
देवबंद के ग्राम मिरगपुर निवासी भाजपा नेता चाौधरी यशपाल सिंह की विगत 8 अक्टूबर की दोपहर उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी, जब वो काम से कही जा रहे थे। इस मामले में मृतक के पुत्र अमित ने गांव के ही सात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था जिन्हें पुलिस ने जेल भेज दिया था।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार प्रभु ने पत्रकार वार्ता में हत्याकांड का खुलासा करते हुए बताया कि अलग-अलग टीमें गठित कर घटना की पुनः जांच कराई गई तो मामला कुछ और निकला।
इसके बाद बुधवार को ही देवबंद पुलिस और क्राइम ब्रांच टीम ने घटना को अंजाम देने वाले वास्तविक अभियुक्तों को बिना नम्बर की स्कूटी से नागल से देवबंद जाते समय गिरफ्तार कर लिया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार प्रभु ने गिरफ्तार अभियुक्तों के नाम अंकुर (पुत्र रविन्द्र चाौधरी ग्राम मिरगपुर), मनीष राठौर (पुत्र सुरेश सैनी ग्राम सैदपुरा, सरसावा), कुमारी. शिवानी (पुत्री शिव कुमार ग्राम मिरगपुर) बताये।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार प्रभु के मुताबिक पूछताछ में अंकुर ने बताया कि उसके और मृतक की भतीजी शिवानी के बीच काफी समय से प्रेम प्रसंग चला आ रहा था और वर्ष 2012 में दोनों घर से फरार हो गये थे। इन्हें बाद में तलाश लिया गया था।
तब यशपाल सिंह और अंकुर में मारपीट भी हुई थी। अंकुर को डर था कि यशपाल सिंह उसकी हत्या करा सकता है।
8 अक्टूबर को शिवानी ने ही अपने ताऊ यशपाल के घर से निकलकर कही जाने की सूचना दी थी।
इसके बाद अंकुर ने अपने दोस्त मनीष के साथ ग्राम मानकी के समीप यशपाल की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
यशपाल सिंह हत्याकांड में पुलिस ने गांव के जिन 6 लोगों विक्रम, उसके पुत्र अर्जुन, नीटू, बिजेन्द्र (पुत्र खिला), उसके पुत्र दीपक तथा विनोद (पुत्र कालू) को जेल भेजा। वे पूरी तरह निर्दोष हैं।

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इस बाबत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार प्रभु ने कहा कि उक्त लोगों को इसलिए ही जेल भेजा गया कि यदि पुलिस नामजदगी के बावजूद उन्हें क्लीनचिट दे देती तो उनमें से गांव में किसी की हत्या हो सकती थी, क्येांकि मृतक चाौधरी यशपाल सिंह का पक्ष उस समय बेहद गुस्से में था।

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