जेएनयू हिंसा / नकाबपोशों ने बेहोश होने तक पीटा-आइशी का आरोप, चोट लगी या पेंट लगाया, जांच हो:दिलीप घोष

जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी ने कहा कि वे एक नकाबपोश हमलावर को पहचानती हैं।
पुलिस ने कहा- हिंसा के वीडियो की जांच के दौरान नकाबपोशों की पहचान हुई, जल्द ही उन्हें सामने लाएंगे
आइशी ने जान से मारने की कोशिश का केस दर्ज करवाया, कहा- एक नकाबपोश को मैं पहचानती भी हूं
बंगाल भाजपा नेता दिलीप घोष ने कहा- जेएनयू में हिंसा आइशी और वाम छात्र संगठनों के इशारे पर की गई
नई दिल्ली. पुलिस ने बुधवार को कहा कि जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में 5 जनवरी को हिंसा करने वाले कुछ नकाबपोशों की पहचान कर ली गई है। पुलिस इनकी पहचान जल्द ही उजागर करेगी। उधर, हिंसा में घायल हुई छात्र संघ अध्यक्ष आइशी घोष ने पुलिस में शिकायत की है कि उन्हें जान से मारने की कोशिश की गई। बंगाल भाजपा प्रमुख दिलीप घोष ने आइशी के आरोपों पर कहा- चोट लगी थी या आइशी ने पेंट लगाया था, इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जेएनयू में हिंसा आइशी घोष और वामपंथी छात्र संघ के इशारे पर हुई थी।
नए सेमेस्टर के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के आखिरी दिन रविवार को कैम्पस में प्रदर्शन हो रहा था। इस दौरान छात्रों का एक गुट प्रक्रिया का समर्थन कर रहा था और दूसरा विरोध कर रहा था। शाम को कैम्पस में करीब 50 नकाबपोशों ने मारपीट और तोड़फोड़ की। 20 छात्रों के अलावा कुछ शिक्षक भी घायल हुए। अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
भीड़ ने धमकाने और प्रताड़ित करने की कोशिश की- आइशी
आइशी घोष ने अपनी शिकायत में कहा- पिछले रविवार भीड़ ने मुझे प्रताड़ित करने, धमकाने और मेरी हत्या करने की कोशिश की। नकाबपोशों ने मुझे एक कार के पीछे घसीटकर तब तक पीटा, जब तक मैं बेहोश नहीं हो गई। एक नकाबपोश को मैं पहचानती भी हूं। इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जल्द गिरफ्तारी की जाए।
हालांकि, जेएनयू मामले में दर्ज दूसरी एफआईआर में आइशी समेत 20 लोगों पर मारपीट, धमकाने और तोड़फोड़ का आरोप लगाया गया है। एफआईआर में लिखा गया कि 4 जनवरी को इन लोगों ने कम्युनिकेशन एंड सर्विस डिपार्टमेंट के स्टाफ, वहां तैनात महिला गार्ड से मारपीट की और उन्हें अंजाम भुगतने की धमकी दी थी।
कैम्पस अस्थायी तौर पर बंद करने की मांग नहीं की- कुलपति
जेनएयू के कुलपति एम जगदीश कुमार ने मानव संसाधान विकास (एचआरडी) मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की। कुमार ने कहा कि जेएनयू प्रशासन ने कैम्पस को अस्थायी तौर पर बंद करने की मांग सरकार से नहीं की है। एचआरडी मंत्रालय को ऐसा कोई सुझाव नहीं भेजा गया। प्रबंधन लगातार यूनिवर्सिटी की गतिविधियां सामान्य करने का प्रयास कर रहा है। जेएनयू हिंसा पर वीसी ने छात्रों से कहा था कि बीती बातें भुलाकर आगे बढ़ें। इस बयान के बाद ही उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाए जा रहे थे।

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