जेएनयू हमले में नकाबपोश हमलावर जल्द होगे बेनकाब: जावड़ेकर

नयी दिल्ली, सात जनवरी ! केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने मंगलवार को कहा कि जेएनयू हमले में शामिल ‘‘नकाबपोश’’ हमलावरों को जल्द ही बेनकाब किया जाएगा क्योंकि गृह मंत्रालय ने इस घटना की जांच के आदेश दिए हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने एक कार्यक्रम के मौके पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जेएनयू और देश के अन्य हिस्सों में हिंसा भड़काने के लिए जानबूझकर गलतफहमियां फैलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा, ‘‘गृह मंत्री ने जांच के आदेश दिए हैं और मुझे लगता है कि जेएनयू हमले में शामिल नकाबपोश लोग जल्द ही बेनकाब हो जाएंगे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा, जेएनयू और देश के अन्य हिस्सों में हिंसा भड़काने के लिए जानबूझकर गलतफहमी पैदा की जा रही है, जिसे भी उजागर किया जाएगा।’’ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को संयुक्त आयुक्त स्तर के एक अधिकारी से जांच कराने का आदेश दिया और जल्द से जल्द इसकी रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
सबूत जुटाने के लिए एफएसएल की कई टीमें जेएनयू पहुंची
जेएनयू परिसर में हुए हमले के सिलसिले में सबूत जुटाने के लिए फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की कई टीमें मंगलवार को वहां पहुंची। सूत्रों ने यह जानकारी दी। गौरतलब है कि रविवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय परिसर में हुए हमले में जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष सहित 34 लोग घायल हो गये थे। सूत्रों ने बताया कि एफएसएल की भौतिकी, रसायन और जीवविज्ञान विभागों की टीमें विश्वविद्यालय में हैं। जेएनयू परिसर में हुए हमले के सिलसिले में सबूत जुटाने के लिए फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की कई टीमें मंगलवार को वहां पहुंची। सूत्रों ने यह जानकारी दी। गौरतलब है कि रविवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय परिसर में हुए हमले में जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष सहित 34 लोग घायल हो गये थे। सूत्रों ने बताया कि एफएसएल की भौतिकी, रसायन और जीवविज्ञान विभागों की टीमें विश्वविद्यालय में हैं। भौतिकी टीम विश्वविद्यालय परिसर में नकाबपोश लोगों द्वारा छात्रों और अध्यापकों पर हमले में इस्तेमाल किए गए सरिया (रॉड) और पत्थरों जैसे सबूतों को एकत्र करेगी, जबकि रसायन टीम वहां मौजूद रसायनों के नमूने जुटाएगी। जीव विज्ञान टीम अन्य साक्ष्यों सहित डीएनए नमूने एकत्र करेगी। एफएसएल से फोटो विशेषज्ञों की एक टीम भी परिसर में मौजूद है। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने एफएसएल से सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण करने के लिए एक कंप्यूटर फॉरेंसिक टीम भेजने का अनुरोध किया है और इसके बुधवार को परिसर में पहुंचने की संभावना है। रविवार को नकाबपोश लोगों की एक भीड़ ने यहां दक्षिण दिल्ली स्थित जेएनयू परिसर में घुस कर तीन छात्रावासों में विद्यार्थियों को निशाना बनाया था। डंडों, सरिया और पत्थरों से हमला किया था। छात्रावास में विद्यार्थियों पर हमला किया गया था और खिड़कियां, फर्नीचर तथा निजी सामान तोड़ दिये थे। उन्होंने एक महिला छात्रावास में भी हमला किया था। हमले की इस घटना के बाद परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। विश्वविद्यालय के विभिन्न द्वारों पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात हैं। हमले के सिलसिले में अज्ञात लोगों के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की गई है और अपराध शाखा इस घटना की जांच कर रही है। अपराध शाखा ने सीसीटीवी फुटेज सहित साक्ष्य जुटाने के लिए स्थानीय पुलिस टीम के साथ सोमवार को परिसर का दौरा किया। पुलिस के मुताबिक एजेंसी घटना की सभी सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया पर अपलोड किए गए तथा व्हाट्सएप पर साझा किए गए वीडियो क्लिप को खंगाल रही है।
हिंसा फैलाने वालों की पहचान में पुलिस को हो रही दिक्कत,नहीं मिल रहे कैंपस के CCTV फुटेज-सूत्र


सूत्रों के मुताबिक जेएनयू कैंपस के सर्वर को पहले से ही डैमेज कर दिया गया था. ऐसे में पुलिस को पूरे कैंपस के सीसीटीवी फुटेज नहीं मिल रहे हैं. क्राइम ब्रांच अब वायरल वीडियो की मदद से रही है.
जेएनयू मामले में दिल्ली पुलिस को हिंसा फैलाने वाले लोगों की पहचान करने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. सूत्रों ने ये जानकारी दी. जेएनयू कैंपस के सर्वर को पहले ही डैमेज कर दिया गया था, जिसकी वजह से पूरे कैंपस के सीसीटीवी की फुटेज पुलिस को नहीं मिल पा रहे हैं. क्राइम ब्रांच अब तमाम वायरल वीडियो की मदद से और अन्य तकनीक की मदद से पहचान करने की कोशिश कर रही है. क्राइम ब्रांच को लग रहा है कि इस पूरी हिंसा को एक सोची समझी साजिश के तहत अंजाम दिया गया है.
सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने व्हाट्सएप स्क्रीनशॉट को लेकर भी जांच की है और कुछ फोन नंबरों की पहचान की है. इनमें से ज्यादातर फोन नंबर अभी स्विच ऑफ हैं. लेकिन हिंसा के समय उनके लोकेशन का पता सीडीआर के जरिए पता किया जाएगा.
वहीं जेएनयू पहुंची दिल्ली की ज्वाइंट सीपी शालिनी सिंह ने कहा कि हमारी जांच शुरू हो गई है. हमने यहां पर एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक, हॉस्पिटल और बाकी सब सभी जगह विजिट किया है. साबरमती हॉस्टल भी गए हैं और टी प्वाइंट भी गए हैं. बच्चों से बातचीत की है और अब आगे की कार्रवाई चलेगी. जिनके खिलाफ एफआईआर हुई है, उसकी जांच क्राइम ब्रांच कर रहा है. हमारी फैक्ट फाइंडिंग टीम है, हम उसकी जांच कर रहे हैं.
जेएनयू के वीसी का बयान
उधर आज जेएनयू के वाइस चांसलर एम जगदीश कुमार का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि रविवार 5 जनवरी को जो घटना हुई वह दुर्भाग्यपूर्ण है. हमारा कैंपस बहस और बातचीत के जरिए किसी भी मुद्दे का हल निकलाने के लिए जाना जाता है. हिंसा हल नहीं है. हम लोग यूनिवर्सिटी में सामान्य हालत बहाल करने के लिए हर कोशिश करेंगे. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को फिर से शुरू कर दिया गया है. छात्र अब विंटर सेशन के लिए रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. उन्होंने कहा, ”आइए हम एक नई शुरुआत करें और अतीत को पीछे छोड़ दें.” वहीं जेएनयू के पूर्व छात्रों ने जेएनयू में हुई हिंसा की निंदा की है और कहा है कि हम छात्रों के साथ हैं.

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