विदेशी राजनयिकों का प्रतिनिधिमंडल कश्मीर में, लोगों ने कहा- पाक पर दखल न देने का बने दबाव

प्रतिनिधिमंडल में अमेरिका,बांग्लादेश,वियतनाम,नार्वे,साउथ कोरिया,अर्जेंटिना,मालदीव समेत कुल 17 देशों के उच्चायुक्त और राजदूत .प्रतिनिधिमंडल ने दौरे के पहले दिन श्रीनगर में कश्मीर के आम जन और विभिन्न कश्मीरी नेताओं से मुलाकात की।विदेशी राजनयिकों के कश्मीर दौरे में लैटिन अमेरिका और अफ्रीका के प्रतिनिधि शामिल,केंद्र सरकार ने विदेशी प्रतिनिधिमंडल को जम्मू-कश्मीर दौरे के लिए आमंत्रित किया था,पिछले साल अक्टूबर में भी यूरोपीय यूनियन का 25 सदस्यीय दल कश्मीर गया था
नई दिल्ली/श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर से 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 हटाने के बाद पहली बार आज हालात का जायजा लेने भारत में तैनात विदेशी उच्चायुक्तों और राजदूतों का एक प्रतिनिधिमंडल श्रीनगर पहुंचा. इससे पहले यूरोपियन यूनियन के एक सांसदों का दस्ता भी कश्मीर का दौरा कर चुका है.
कश्मीर पहुंचे इस प्रतिनिधिमंडल ने श्रीनगर में कश्मीर की आम जनता से मुलाकात की. जिसमें आम लोगों ने पाकिस्तान पर कश्मीर में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाते हुए मांग की कि इन सभी देशों को पाकिस्तान पर कश्मीर में दखल नहीं देने का दबाव डालना चाहिए. लोगों ने पाकिस्तान के कश्मीर में भारत द्वारा किए गए अत्याचार के आरोपों को भी सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि कश्मीर का एक इंच भी पाकिस्तान को नहीं दिया जाएगा.
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक आम लोगों ने विदेशी राजनयिकों के सामने हालांकि ये जरूर माना कि कुछ दिक्कतें अभी भी हैं, जिन्हें सरकार से दूर किया जाना चाहिए. मगर इस बात की भी सराहना की कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद से अब तक भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की गोली से किसी एक व्यक्ति की भी जान नहीं गई.
गौरतलब है कि ये प्रतिनिधिमंडल कश्मीर के दो दिनों के दौरे पर है और इसमें अमेरिका,बांग्लादेश,वियतनाम, नार्वे,साउथ कोरिया,अर्जेंटिना, मालदीव समेत कुल 17 देशों के उच्चायुक्त और राजदूत शामिल हैं. इससे पहले यूरोपियन यूनियन से आए सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल पहले ही कश्मीर का दौरा कर वहां के तेजी से सुधरते हालातों का जायजा ले चुका है.
सेना के शीर्ष कमांडरों ने दी सुरक्षा स्थिति की जानकारी,विभिन्न राजनेताओं से भी मुलाकात
पिछले साल अगस्त में सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए हटा दिया था। -फाइल फोटो
जम्मू कश्मीर के मौजूदा हालात का जायजा लेने के लिए आज 16 विदेश राजनयिकों का दल 2 दिनों के दौरे पर श्रीनगर पहुंचा। सभी 16 प्रतिनिधियों को पहले दिन श्रीनगर में 15 कॉर्प्स मुख्यालय ले जाया गया। वहां उन्हें सेना के शीर्ष कमांडरों ने एलओसी और कश्मीर घाटी में सुरक्षा स्थिति की जानकारी दी। इसके बाद वे सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों और कुछ पत्रकारों से भी मिले। सभी प्रतिनिधिमंडल जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक नेताओं से भी मिले, इनमें गुलाम हसन मीर, अल्ताफ बुखारी, शोएब इकबाल लोन, हिलाल अहमद शाह, नूर मोहम्मद शेख, अब्दुल मजहर पद्दर,अब्दुल रहीम राथर और रफी अहमद मीर शामिल हैं। अब यह प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को जम्मू में सिविल सोसाइटी संगठनों के सदस्यों से मिलेंगे।
प्रतिनिधिमंडल में अमेरिकी राजदूत कैनेथ जस्टर समेत डेलिगेशन में बांग्लादेश, वियतनाम, नॉर्वे, मालदीव, दक्षिण कोरिया, मोरक्को और नाइजीरिया के राजनयिक भी शामिल हैं। सरकार ने यूरोपियन यूनियन (ईयू) के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया था, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। उनका कहना था कि वह ‘गाइडेड टूर’ के पक्ष में नहीं हैं और बाद में वहां जाएंगे। पिछले साल 5 अगस्त को सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए हटा दिया था।
ईयू के राजनयिक 3 पूर्व मुख्यमंत्रियों से भी मुलाकात करना चाहते थे
अफसरों ने बताया कि दिल्ली में मौजूद 16 विदेशी राजनयिकों का दल कश्मीर में स्थिति सामान्य करने के लिए सरकार से उठाए जा रहे कदमों का जायजा लेगा। यूरोपियन यूनियन के राजनयिक किसी गाइडेड टूर का हिस्सा नहीं बनना चाहते। वे स्वेच्छा से चुने हुए लोगों से मिलना चाहते हैं। साथ ही वे राज्य के 3 पूर्व मुख्यमंत्रियों फारूक-उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती से भी मुलाकात करना चाहते हैं। ये सभी 5 अगस्त से राज्य का विशेष दर्जा खत्म होने के बाद से ही हिरासत में हैं।
सरकार का यह कदम उस लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कश्मीर से अनुच्छेद 370 के हटने के बाद पाकिस्तान ने गलत प्रोपेगेंडा चला रखा है। भारत ने पिछले साल 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा हटा लिया था जिसके बाद पाकिस्तान कई विदेशी मंचों पर इस मुद्दे को उछाला था। हालांकि वह इसमें सफल नहीं हुआ। पाकिस्तान ने भारत से सभी प्रकार के राजनयिक संबंध खत्म करने का फैसला लिया था।

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