पहली बार: वैज्ञानिकों ने बना दी सिंधु घाटी सभ्यता निवासियों के चेहरे की आकृति


पहली बार सिंधु घाटी सभ्यता के निवासियों के चेहरे की आकृति तैयार।
यह केस स्टडी डब्ल्यू एल जी और वसंत शिंदे के नेतृत्व में की गई। नैशनल ज्योग्रफिक सोसाइटी ने इस प्रॉजेक्ट के लिए आंशिक आर्थिक सहायता दी थी। यह केस स्टडी विश्वविख्यात पत्रिका एनाटॉमिकल साइंस इंटरनैशनल में प्रकाशित हुई है।
पहली बार सिंधु घाटी सभ्यता के निवासियों के चेहरे की आकृति तैयार।

हाइलाइट्स
सिंधु घाटी सभ्यता के निवासियों के चेहरे की आकृति बनाने में मिली कामयाबी
हरियाणा के राखीगढ़ी कब्रिस्तान से मिली दो खोपड़ियों से बनाई चेहरे की हू-ब-हू आकृति
द.अफ्रीका, यूके और भारत के सात संस्थानों के 15 विशेषज्ञ वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों की टीम ने किया करिश्मा
राखीगढ़ी हरियाणा में है जो सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे बड़ा पुरातत्विक स्थल है

नई दिल्ली(आरती सिंह)वैज्ञानिकों ने 4,500 वर्ष पुराने राखीगढ़ी कब्रिस्तान में मिले 37 में से 2 लोगों की खोपड़ी का पुननिर्माण कर सिंधु घाटी सभ्यता के निवासियों के चेहरे की हू-ब-हू आकृति बना दी। वैज्ञानिकों ने यह करिश्मा पहली बार किया है। दक्षिण अफ्रीका, यूके और भारत के सात अलग-अलग संस्थानों के विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ 15 वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों की टीम ने राखीगढ़ी से मिले दो खोपड़ियों का असली चेहरा बनाने के लिए उनके कंप्यूटेड टोमोग्रफी (सीटी) डेटा के जरिए क्रैनियोफेशियल रीकंस्ट्रक्शन (सीएफआर) का इस्तेमाल किया।
यह केस स्टडी डब्ल्यू एल जी और वसंत शिंदे के नेतृत्व में की गई। नैशनल ज्योग्रफिक सोसाइटी ने इस प्रॉजेक्ट के लिए आंशिक आर्थिक सहायता दी थी। यह केस स्टडी विश्वविख्यात पत्रिका एनाटॉमिकल साइंस इंटरनैशनल में प्रकाशित हुई है।
राखीगढ़ी पुरातात्विक खोज परियोजना के नेतृत्वकर्ता वसंत शिंदे ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, ‘स्टडी रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि अब तक हमें इसका कोई अंदाजा नहीं था कि सिंधु घाटी सभ्यता के लोग दिखते कैसे थे, लेकिन अब उनके चेहरे की आकृतियों का कुछ-कुछ अनुमान लग गया है।’ राखीगढ़ी हरियाणा में है जो सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे बड़ा पुरातत्विक स्थल है।
बाईं और राखीगढ़ी कब्रिस्तान से प्राप्त खोपड़ियां और उनके दाईं ओर विकसित होती आकृति।
सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों की शारीरिक आकृति का ढांचा तैयार कर पाना अब तक कठिन था क्योंकि सभ्यता के कब्रिस्तानों एवं कब्रों की अब तक पर्याप्त खोज नहीं हुई थी और मानव कंकालों से प्राप्त मानव वैज्ञानिक आंकड़े (ऐंथ्रोपॉलोजिकल डेटा) सभ्यता के निवासियों की शारीरिक आकृति के पुनर्निर्माण के लिहाज से पर्याप्त नहीं थे। साथ ही, मोहनजोदड़ो से मिली प्रधान पुरोहित (प्रिस्ट किंग) की एक प्रसिद्ध मूर्ति के अलावा सिंधु घाटी सभ्यता की एक भी उच्चस्तरीय या विकसित कलाकृति नहीं मिली जिससे तत्कालीन निवासियों की शारीरिक आकृति तैयार की जा सके।

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