आई आई टी रुड़की और एनआईएच रुड़की कर रहे वाटर कॉन्क्लेव 2020 का आयोजन

आई आई टी रुड़की और एन आई एच रुड़की के तत्वाधान में हो रहा वाटर कॉन्क्लेव 2020 का आयोजन 

रुड़की 25 फरवरी   : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) और राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की  (एनआईएच रुड़की) संयुक्त रूप से 26 फरवरी से 28 फरवरी 2020 के दौरान आईआईटी  रुड़की में रुड़की वाटर कॉन्क्लेव (आरडब्ल्यूसी) का आयोजन कर रहे हैं। आरडब्ल्यूसी-2020 इस द्वी-वार्षिक आयोजन का पहला संस्करण होगा। आरडब्ल्यूसी-2020 के प्रथम संस्करण का फोकस “हाइड्रोलॉजिकल एस्पेक्ट्स ऑफ क्लाइमेट चेंज” पर होगा।

श्री उपेंद्र प्रसाद सिंहसचिवजलशक्ति मंत्रालयजल संसाधननदी विकास और गंगा रेजुवनेशनभारत सरकार ने कॉन्क्लेव के उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने की सहमति व्यक्त की है। महानिदेशकएनएमसीजीऔर अध्यक्ष सीडब्ल्यूसी सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति भी कॉन्क्लेव में अपनी गरिमामय उपस्थिति दर्ज कराएंगे।

इस कार्यक्रम के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, स्पेन, जर्मनी, जापान, नीदरलैंड, यूके, ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, इटली के अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ और आईआईएससी, आईआईटी, जेएनयू और इसरो जैसे शीर्ष राष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञ अपने ज्ञान और अनुभवों को साझा करेंगे। तेईस विदेशी तथा भारत के ग्यारह विशेषज्ञ मुख्य चर्चा में भाग लेंगे। 3-दिवसीय इस कॉन्क्लेव के दौरान विचार-विमर्श में कई महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया जाएगा।

रुड़की को जल क्षेत्र में शोध के लिए जाना जाता है। आईआईटी रुड़की और एनआईएच रुड़की भारत और विदेशों के विभिन्न समूहों के साथ नेटवर्क तैयार कर इन शोध कार्यों के बेहतर उपयोग की योजना बना रहे हैं।

आरडब्ल्यूसी का एक खास आकर्षण नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत राष्ट्रीय मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) के विभिन्न कार्यों पर आयोजित एक प्रदर्शनी होगा। इस दौरान श्री राजीव रंजनमहानिदेशकएनएमसीजीभारत सरकार नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत किए गए कार्यों और अन्य योजनाओं पर को लेकर कार्यक्रम को संबोधित करेंगे।

आरडब्ल्यूसी के आयोजन स्थल पर एनएमसीजी आरडब्ल्यूसी  के तुरंत बाद अर्थात 29 फरवरी और 1 मार्च2020 को स्कूली छात्रों के लिए दो दिनों के एक बहुत बड़े प्रदर्शनी का आयोजन करेगा। स्कूल के छात्रों के लिए आयोजित की जाने वाली यह प्रदर्शनी भविष्य के इंजीनियरों और प्रबंधकों को भारत सरकार के नमामि गंगे कार्यक्रम के प्रति ज्ञान और समझ को बढ़ाएगी।

मीडिया से बातचित के दौरान एनआईएच रुड़की के निदेशक डॉ. शरद के. जैन ने कहा, “वैश्विक स्तर परजलवायु परिवर्तन को एक बहुत बड़ी चुनौती के रूप में लिया जाता है क्योंकि इसका मानव जाति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। आज हम जल संसाधनों पर जलवायु परिवर्तन के संभावित प्रभाव पर बात करने के लिए एकत्र हुए हैं।

मीडिया को जानकारी देते हुए, आईआईटी रुड़की के निदेशकअजीत के. चतुर्वेदी ने कहा कि संस्थान एन आई एच की साझेदारी में रुड़की वाटर कॉन्क्लेव 2020 के आयोजन से काफी खुश है। उन्होंने आगे बताया कि इस 3-दिवसीय कार्यक्रम के दौरानदेश और दुनिया में बड़े पैमाने पर होने वाली कुछ प्रमुख समस्याओं की पहचान की जाएगी और जलवायु परिवर्तन के कारण जल संसाधन के सामने आने वाली चुनौतियों पर बहस और संभावित समाधान पर भी चर्चा की जाएगी।

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