निवेश / सोने की कीमत में 16 साल में छह गुना वृद्धि, सेंसेक्स ने दिया 8 गुना रिटर्न

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2004 में सोने की कीमत 5850 रु. प्रति 10 ग्राम थी, अब 39000 रुपए के करीब,परंपरागत निवेशक सोने को सुरक्षित माध्यम मानते हैं, इसमें महंगाई को मात देने की क्षमता
नई दिल्ली. इस बार धनतेरस 25 अक्टूबर को पड़ रही है। यह ऐसा शुभ पर्व है जब लाखों भारतीय सोना या तो व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए या फिर निवेश के लिहाज से खरीदते हैं। पिछले 16 साल की बात करें तो सोने की कीमतों में छह गुना से अधिक बढ़ोतरी हुई है।
2004 में सोने की कीमत 5,850 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। अब यह बढ़कर 39,000 रुपए के आसपास है। इस तरह देखें तो यदि किसी व्यक्ति ने 2004 में 1.5 लाख रुपए सोने में निवेश किए होंगे तो उस समय उसने 256.4 ग्राम सोना खरीदा होगा। आज इस 256.4 ग्राम सोने को बेचने पर 10 लाख रुपए से अधिक मिल सकते हैं। पिछले महीने सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम 40,000 रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी।
निवेश के अन्य विकल्प की बात करें तो इसी अवधि में सेंसेक्स ने 7.92 गुना रिटर्न दिया है। परंपरागत निवेशक सोने की तरफ अधिक आकर्षित होते हैं क्योंकि उन्हें अन्य विकल्पों के मुकाबले सोने में सुरक्षा, लिक्विडिटी के साथ-साथ बेहतर रिटर्न मिलने का भरोसा अधिक होता है। पिछले 16 साल का अनुभव देखें तो रिटर्न के मामले में सोने का प्रदर्शन बेहतर रहा है।
सोने में एक समय अंतराल के बाद महंगाई को मात देने की क्षमता होती है। इसकी कीमत में महंगाई की दर के अनुसार ही इजाफा होता है। दूसरा लोग अपने इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो में शेयरों में किए निवेश को संतुलित करने के लिए भी सोने में निवेश करने को बेहतर समझते हैं। इसकी वजह यह है कि जब शेयर बाजारों का प्रदर्शन खराब रहता है उस समय सोना बेहतर प्रदर्शन करता है।
कैसे करें सोने में निवेश?
कोई भी व्यक्ति सोने को फिजिकल फॉर्म में या फिर गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड फंड के रूप में खरीद सकता है। इसके अलावा वह घर में बिना उपयोग के रखे सोने को सरकार की गोल्ड मोनिटाइजेशन स्कीम में जमा कर सकता है। यह सोने की एफडी कराने जैसा है। इस स्कीम के तहत व्यक्ति को जमा कराए गए सोने पर ब्याज के रूप में आमदनी होती है।
गोल्ड मोनिटाइजेशन स्कीम
गोल्ड मोनिटाइजेशन स्कीम वर्ष 2015 में शुरू की गई थी। उस समय देश में लोगों के घरों में 20,000 टन से ज्यादा बिना उपयोग के रखा होने का अनुमान था। नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य ऐसे सोने को मोनिटाइज कर इकोनॉमी में लाना था, ताकि सोने की मांग पूरी हो सके, इसके लिए आयात पर निर्भरता कम हो।
गोल्ड मोनिटाइजेशन की मियाद क्या है?
सोना बचत खाते का न्यूनतम लॉक-इन पीरियड 1 साल है।

आप नीचे दिए गए विकल्पों में से चुनाव कर सकते हैं
इस धनतेरस सरकार की गोल्‍ड मोनेटाइजेशन स्‍कीम में करें सोने का निवेश, सुरक्षा के साथ-साथ मिलेगा ब्‍याज
इस धनतेरस सरकार की गोल्‍ड मोनेटाइजेशन स्‍कीम में करें सोने का निवेश, सुरक्षा के साथ-साथ मिलेग। धनतेरस का त्‍योहार करीब है। इस दिन सोने-चांदी जैसे महत्‍वपूर्ण धातुओं की खरीदारी करने की प्रथा है। अगर आपके पास पहले से ही सोना है या धनतेरस पर उसकी खरीदारी कर एक्‍सट्रा ब्‍याज कमाना चाहते हैं तो सरकार की गोल्‍ड मोनेटाइजेशन स्‍कीम (Gold Monetisation Scheme) एक शानदार ऑप्‍शन है। गोल्‍ड मोनेटाइजेशन स्‍कीम के दो फायदे हैं- एक तो आपको अपने सोने को सुरक्षित रखने के लिए लॉकर की सुविधा नहीं लेनी पड़ती और दूसरा, इस स्‍कीम में पैसे लगाने पर आपको ब्‍याज भी मिलता है।
सोने के दाम बढ़ने के फायदे के साथ मिलेगा ब्‍याज
गोल्‍ड मोनेटाइजेशन स्‍कीम में जब आप अपना सोना जमा करवाते हैं तो आपको सोने के मूल्‍य में बढ़ोतरी के फायदे के साथ-साथ 2.5 फीसद तक का ब्‍याज भी मिलता है। इस स्‍कीम का लाभ यहीं समाप्‍त नहीं होता है। आप सोने से अर्जित ब्‍याज पर टैक्‍स भी बचा सकते हैं क्‍योंकि गोल्‍ड मोनेटाइजेशन स्‍कीम से प्राप्‍त ब्‍याज और कैपिटल गेन पर टैक्‍स नहीं लगता है।
2015 में शुरू हुई थी गोल्‍ड मोनेटाइजेशन स्‍कीम
मोदी सरकार ने 2015 में गोल्‍ड मोनेटाइजेशन स्‍कीम की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्‍य था कि भारतीय परिवारों के पास पड़े सोने को इकट्ठा किया जाए और इसका कोई प्रोडक्टिव इस्‍तेमाल किया जाए। इस प्रकार सोना जुटाने से सोने के आयात के साथ-साथ देश के चालू खाते घाटे को कम करने में भी मदद मिलेगी।
गोल्‍ड मोनेटाइजेशन स्‍कीम में कितना सोना कर सकते हैं जमा?
सरकार की गोल्‍ड मोनेटाइजेशन स्‍कीम में आप कम से कम 30 ग्राम सोना जमा करवा सकते हैं जो गोल्‍ड बार, गोल्‍ड क्‍वाइन या आभूषण के रूप में होना चाहिए। अगर आभूषण में रत्‍न या दूसरे धातु जड़े हुए हैं तो उसके भार को अलग माना जाएगा। इस स्‍कीम में अधिकतम सोना जमा करवाने की कोई सीमा नहीं है।
सरकार की तरफ से बैंक सोने को जमा के तौर पर करते हैं स्‍वीकार
गोल्‍ड मोनेटाइजेशन स्‍कीम के तहत सरकार की तरफ से बैंक सोने को जमा के तौर पर स्‍वीकार करते हैं। आप अपना सोना सरकार द्वारा प्रमाणित केंद्र – कलेक्‍शन एंड प्‍योरिटी टेस्टिंग सेंटर (CPTC) में जमा करवा सकते हैं। CPTC सोने की सोने की शुद्धता की जांच करता है और आपको एक सर्टिफिकेट देता है जिसमें आपके द्वारा जमा किए गए सोने की मात्रा की जानकारी भी होती है। इस सर्टिफिकेट के आधार पर आप बैंक में सोना जमा करवा सकते हैं।
गोल्‍ड मोनेटाइजेशन स्‍कीम पर कितना मिलता है ब्‍याज?
शॉर्ट टर्म गोल्‍ड डिपॉजिट की अवधि एक से तीन साल होती है और इस पर मिलने वाला ब्‍याज बैंकों द्वारा तय किया जाता है। उदाहरण के लिए एसबीआई एक साल के लिए 0.50 फीसद और 2-3 साल के लिए 0.60 फीसद का ब्‍याज देती है। 5 से सात साल की अवधि के लिए गोल्‍ड डिपॉजिट स्‍कीम पर 2.25 फीसद का ब्‍याज मिलता है। वहीं, लॉन्‍ग टर्म गोल्‍ड डिपॉजिट- जिसकी अवधि 12 से 15 साल है- पर आपको 2.5 फीसद का ब्‍याज मिलता है।
गोल्‍ड मोनेटाइजेशन स्‍कीम से निकासी
गोल्‍ड मोनेटाइजेशन स्‍कीम की मैच्‍योरिटी पर आपके पास नकद या गोल्‍ड लेने का विकल्‍प होता है। हालांकि, आप निकासी के समय गोल्‍ड लेंगे या नकद, इसकी जानकारी डिपॉजिट करवाते समय ही देनी होगी। गोल्‍ड जमा करवाते समय ही आपको अवधि भी चुननी होगी। जमा की अवधि जितनी अधिक होगी आपको ब्‍याज भी उतना ही ज्‍यादा मिलेगा।
छोटी अवधि: 1 साल से 3 साल
मध्यम अवधि: 5 साल से 7 साल
लंबी अवधि: 12 साल से 15 साल

मिनिमम डिपॉजिट की लिमिट क्या है?
आप सिर्फ 30 ग्राम सोना जमा करके खाता खोल सकते हैं। डिपॉजिट की कोई अधिकतम सीमा नहीं है।

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