गंगा एस्केप चैनल का फैसला बदलने की तैयारी

एस्केप चैनल पर पिछली कांग्रेस सरकार में हुए शासनादेश को मौजूदा भाजपा सरकार बदलेगी
हरिद्वार में हर की पैड़ी को एस्केप चैनल बनाने के पिछली कांग्रेस सरकार में हुए शासनादेश को मौजूदा भाजपा सरकार बदलने जा रही है। …

देहरादून, । हरिद्वार में हर की पैड़ी को एस्केप चैनल बनाने के पिछली कांग्रेस सरकार में हुए शासनादेश को मौजूदा भाजपा सरकार बदलने जा रही है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि इसकी घोषणा की जा चुकी है। इसे जल्द वापस लिया जाएगा।
हरिद्वार में हर की पैड़ी पर बह रही गंगा की धारा को कांग्रेस सरकार के समय एस्केप चैनल घोषित किया गया था। यानी इसे गंगा का मुख्य भाग नहीं माना गया। इस पर संत समाज में काफी आक्रोश था। इस मसले पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा तक खटखटाने की बात कही थी। यह आदेश कांग्रेस की हरीश रावत सरकार के समय में हुआ था। बीते रोज पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हर की पैड़ी में बह रही गंगा की धारा को एस्केप चैनल घोषित करने के अपने निर्णय पर अफसोस जताया था। उन्होंने कहा कि यह उनकी भूल थी। कुछ घरों को बचाने के लिए यह कदम उठाया गया था। कांग्रेस की सरकार आने पर इस गलती को सुधारा जाएगा।
बुधवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान इस संबंध में पूछे गए सवाल पर कहा कि यह अच्छी बात है कि हरीश रावत पश्चाताप कर रहे हैं। मां गंगा उन्हें माफ करे। एस्केप चैनल के संबंध में सरकार घोषणा कर चुकी है। सरकारी प्रवक्ता मदन कौशिक ने कहा कि सरकार इस आदेश को वापस लेगी। वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने कहा कि हर की पैड़ी में आ रही धारा को एक झटके में नहर कह देना पिछली सरकार का एक बहुत बड़ा रहस्य था। जिसके पीछे तो वह जाना नहीं चाहेंगे लेकिन जो गलती हरीश रावत ने की है उसको भाजपा सुधारेगी। मां गंगा पतित पावनी है।

हरीश रावत
हरिद्वार में गंगा स्कैप चैनल के मामले में प्रदेश सरकार अब पूर्व की हरीश रावत की सरकार का फैसला पलटने की तैयारी में है। पूर्व सीएम हरीश रावत मंगलवार को हरिद्वार में संतों के बीच में पहुंचे थे।
उन्होंने अखाड़ा परिषद के संतों से मुलाकात करके कहा था कि 2016 में उनकी सरकार ने गंगा की धारा के किनारे करीब 400 निर्माण बचाने के लिए ही धारा को स्कैप चैनल घोषित किया था। इसका मतलब है कि यह धारा एक नहर है जो गंगा में अतिरिक्त पानी की निकासी के काम आती है।एनजीटी का आदेश था कि गंगा की धारा के 200 मीटर दायरे से निर्माण हटाया जाए। हरीश रावत ने इसे भावनात्मक भूल बताया था और कहा था कि वर्तमान सरकार इस फैसले को पलटे।
सरकार धारा के किनारे के निर्माण को हटाने के लिए तैयार
मुसीबत ये है कि इस फैसले को पलटने का मतलब है कि सरकार धारा के किनारे के निर्माण को हटाने के लिए तैयार है। सूत्रों के मुताबिक सरकार ने संतों की बात को तवज्जो दी है और हरीश रावत सरकार के समय हुए शासनादेश के रद्द करने की तैयारी में है। जल्द ही इसे लेकर सरकार फैसला कर सकती है।

एक और भी रास्ता,गंगा सभा व संतों से बात

प्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री के मुताबिक इस विवाद से बचने का एक तरीका और भी है। सरकार हर की पैड़ी पर धारा को गंगा घोषित करे। इससे संतों की बात भी रह जाएगी और कई निर्माण भी टूटने से बच जाएंगे। निर्माण की जद में कई आश्रम, धर्मशालाएं, होटल भी आदि आ रहे हैं।

सरकार को उलझाया

हरीश रावत ने अपनी एक पोस्ट में कुछ दिन पहले लिखा था कि कोरोना काल मेें राजनीति न की जाए। उन्होंने कहा था कि वे राजनीति पर उतर आए तो फिर देख लेना कि अंजाम क्या होगा। रावत ने इस चेतावनी को गंगा धारा के विवाद में साबित किया। रावत संतों के बीच पहुंचे, माफी मांगी और कुशलता से गेंद सरकार के पाले में डाल दी। अब सरकार को एक अन्य वर्ग को नाराज करने का खतरा उठाना होगा।

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