जहरीली शराब प्रकरण: पुलिस पकड़ में एक आरोपित, सामने आया भाजपा नेता का नाम

पुलिस ने पंचायतनामे के बाद शवों को पोस्टमार्टम को भेजा
जहरीली शराब के सेवन से हुई छह लोगों की मौत के मामले में आरोपित गौरव को आज पुलिस ने खुड़बुड़ा से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी गौरव ने पूछताछ में बताया कि वह ठेके के अलावा भाजपा करनपुर मंडल के उपाध्यक्ष अजय सोनकर उर्फ घोंचू और राजा नेगी से शराब खरीदकर होम डिलीवरी करता था। वह 85 रुपए में शराब खरीदकर 100 रुपए में बेचता है। राजा नेगी शराब तस्करी के आरोप में जेल भी जा चुका है। आरोपित के आपराधिक इतिहास की जानकारी ली जा रही है।
वहीं जहरीली शराब पीने से एक और युवक की तबियत बिगड़ गई है।अंशु नाम का युवक पथरिया पीर का ही रहने वाला है। उसे कल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। जिसके बाद वह आज सुबह घर आ गया था। लेकिन दोपहर बाद उसकी तबियत फिर खराब हो गई और उसे अस्पताल ले जाया गया। वहीं आज सुबह मृतकों के परिजनों के शव रखकर प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि मृतक के परिजनों को मुआवजा दिया जाए। इसके बाद ही अंतिम संस्कार करेंगे। इस मामले में आज एनएसयूआई के कार्यकर्तों ने देहरादून डीएम ऑफिस में प्रदर्शन किया और ज्ञापन सौंपा। उधर पुलिस ने रात भर शराब पीकर बीमार हुए कई अस्पतालों में भर्ती करीब सात लोगों को एम्स ऋषिकेश और मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया।
जहरीली शराब के सेवन से हुई छह लोगों की मौत के मामले में पुलिस ने शुक्रवार को मरने वाले तीनों शवों को कब्जे में ले लिया। आज मेडिकल बोर्ड से शवों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा, तब जाकर मौत की वजह सामने आ पाएगी। पुलिस ने देर रात शराब पीकर मरने वाले इंदर, सुरेन्द्र और आकाश के शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। पोस्टमार्टम के बाद ही मौत की वजह साफ हो पाएगी। दरअसल, बृहस्पतिवार को तीनों लोगों की मौत के बाद परिजनों ने अंतिम संस्कार कर दिया था।
एसएसपी अरुण मोहन जोशी के मुताबिक शराब पीकर मरने वालों का पोस्टमार्टम मेडिकल बोर्ड से कराया जाएगा, ताकि शक की कोई गुजाइंश ना रहे। अब तक की जांच में गौरव आदि के कनाट पैलेस के देसी ठेके से शराब खरीदकर बेचने की बात सामने हो रही है। यह कहना अभी मुश्किल है कि गौरव ठेेके से ली गई शराब में किसी तरह की मिलावट करता था या नहीं। यह सब जांच में ही सामने हो पाएगा।

दोषियाें को बख्शा नहीं जाएगा
शराब के सेवन से छह लोगों की मौत बेहद गंभीर मामला है। इस मामले में जो भी अधिकारी और कर्मचारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एसएसपी को पूरे मामले की तह तक जाकर कार्रवाई करने को कहा गया है।
– अशोक कुमार, पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था

पथरिया पीर में मातम का माहौल, नहीं जले घरों में चूल्हे
पथरिया पीर में 48 घंटे में छह लोगों की मौत से मातम का माहौल होने के कारण पूरी गली में चूल्हे नहीं जले है। मरने वालों के घरों पर लोगों का जमघट लगा है, जो शराब बेचने वालों को कोस रहे हैं। परिवार के मुखिया के जाने के कारण कई घरों में तो रोजी-रोटी का संकट गहरा गया है। इंदर का इकलौता बेटा अनाथ हो गया है। मां पहले ही उसे छोड़कर जा चुकी है।
मौत के मुंह में गए तमाम लोग शराब की लत का शिकार थे। रिटायर्ड फौजी शरण को छोड़कर मरने वाले लोग प्राइवेट जॉब अथवा दहाड़ी मजदूरी करते थे। सुरेन्द्र चौहान पुताई का काम कर अपने परिवार का पालन पोषण करता था। इंदर एक होटल में बर्तन सफाई करता था। उसकी पत्नी पहले ही चल बसी थी।
इंदर अपने इकलौते बेटे को बिलखता छोड़ गया है। आकाश की तो हाल में ही शादी हुई थी, लेकिन शराब की लत उसकी जिंदगी पर भारी पड़ गई। राजेन्द्र भी प्राइवेट जॉब कर परिवार चला रहा था। उसके चार बच्चे बताए गए है। लल्ला भी शादी शुदा था। इनकी मौत परिवार पर कहर बनकर टूटी है। इनके घरों में कोहराम मचा है।
प्रदर्शनकारियों ने आरोपी की बहन को छुड़ाया, सीओ ने जड़ा थप्पड़
शराब बेचने के आरोपी के घर हंगामे के बीच पुलिस ने उसकी मां और बहन को हिरासत में लिया। पुलिस जैसे ही आगे बढ़ी तो कुछ महिलाओं और पुरुषों ने आरोपी की बहन को ले जाने पर हंगामा कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था भाई के कृत्य की सजा बहन को क्यों दी जाए? इस पर कुछ लोगों ने युवती को जबरन पुलिस से छुड़ा लिया। इससे नाराज सीओ सदर ने एक युवक को थप्पड़ जड़ दिया, तब जाकर लोग पीछे हटे। उसके बाद पुलिस बहन को छोड़कर आरोपित की मां को साथ ले गई।
पथरिया पीर इलाके में अवैध रूप से शराब बेचने वालों के खिलाफ आसपास के लोगों में गुस्सा है। शुक्रवार को छह लोगों की मौत से गुस्साए लोगों ने शराब बेचने के आरोपित गौरव के घर में घुसने का प्रयास किया। इसी दौरान गौरव की मां और प्रदर्शन में शामिल कुछ महिलाओं में नोक-झाेंक हो गई। प्रदर्शनकारी जबरन उनके घर में घुसने लगे। लेकिन, पहले से जांच के लिए मौके पर पहुंची पुलिस उनके आगे खड़ी हो गई। बाद में महिला पुलिस को बुलाकर आरोपित की मां-बहन को अभिरक्षा में लेकर पुलिस चल दी।
घर की तलाशी में नहीं मिली शराब
रास्ते में कुछ प्रदर्शनकारी महिलाओं और पुरुषों ने पुलिस को रोक लिया। मांग की आरोपित गौरव के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। लेकिन, इसमें बहन का कोई दोष नहीं है। उसकी शादी होने वाली है। उसे छोड़ दिया जाए। काफी देर तक इसी बात को लेकर प्रदर्शनकारियों और पुलिस में नोक-झाेंक होती रही। आखिर महिलाएं युवती को पुलिसकर्मियों से जबरन छुड़ा ले आई। इससे नाराज सीओ सदर लोकजीत सिंह ने अभद्रता पर एक युवक को थप्पड़ जड़ दिया, उसके बाद प्रदर्शनकारी तितर-बितर हो गए।
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि गौरव घर से शराब बेचता था। ऐसे में उसके घर में शराब का स्टॉक हो सकता है। पुलिस ने दो बार घर की तलाशी ली, लेकिन कुछ नहीं मिला। शांत करने को पुलिस प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों को साथ ले गई थी। लोगों का आरोप था कि इस इलाके में चार लोग शराब लेकर बेचते है। अधिकांश लोग उनसे शराब लेते हैं। महिलाओं ने अन्य आरोपियों के घरों पर भी हंगामा किया। पुलिस सक्रियता के चलते आरोपित किसी तरह की तोड़फोड़ नहीं कर पाए।
शराब से मौतों पर कांग्रेस ने मांगा मुख्यमंत्री से इस्तीफा
जहरीली शराब से मौतों के मामले में कांग्रेस ने त्रिवेंद्र सरकार पर जोरदार हमले किए हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने रुड़की के बाद दून में जहरीली शराब से मौतों को गंभीर बताते हुए मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांगा है। उन्होंने कहा है कि त्रिवेंद्र सरकार हर मोर्चे पर फेल है। डेंगू से तमाम लोगों की मौत के बाद अब जहरीली शराब के कहर से साबित है कि सरकार नाम की कोई चीज नहीं रह गई है।
प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने एक बयान में कहा है कि रुड़की की घटना से सरकार ने कोई सबक नहीं लिया है। उन्होंने कहा है कि रुड़की के मामले में शराब यूपी से आने की बात कहकर लीपापोती की गई, लेकिन राजधानी में मौत होने के बाद सरकार के पास कहने के लिए क्या है? उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण के साथ ही शर्मनाक भी बताया है। उन्होंने कहा है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण इसलिए है क्योंकि आबकारी महकमा खुद मुख्यमंत्री संभाल रहे हैं। इससे पहले स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए भी वे फेल हो चुके हैं। इन स्थितियों में उन्हें अपने पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है।
दूसरी तरफ, एक बयान में कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने कहा है कि प्रदेश में जहरीली शराब से लोगों की मौत की वारदात की पुनरावृत्ति चिंतनीय है। ये राजनीति का विषय नहीं है लेकिन पूरे उत्तराखंड में खुले आम अवैध शराब की बिक्री और तस्करी हो रही है। उन्होंने कहा है कि रूड़की के बाद अब देहरादून में हुई जहरीली शराब की घटना ने डबल इंजन सरकार के दावों की पोल खोल दी है।

मौत के गुनाहगारों के कौन थे पनाहगार? दून शहर के बीचोंबीच सालों से फलफूल रहे कच्ची व अवैध शराब के काले धंधे पर कई सालों से पुलिस-प्रशासन आंख मूंदकर बैठे हुए थे। पथरिया पीर, चुक्खुवाला समेत इंद्रा कालोनी में शराब के इस काले धंधे की सूचना पुलिस, प्रशासन, आबकारी सभी को थी। महापौर एवं क्षेत्रीय विधायक के घर के पास बिक रही अवैध शराब को लेकर लोग कई दफा मुखर भी हुए और पुलिस कप्तान आफिस से लेकर तमाम मंचों पर शिकायतें भी कीं, लेकिन तस्करों एवं सरकारी तंत्र के ‘गठजोड़’ की नींद नहीं टूटी। शायद तमाम ‘जिम्मेदारों’ को मौत का इन्तजार था। बता दें कि बीते रोज देहरादून में जहरीली शराब पीने से छह की मौत हो गई, जबकि तीन बीमार हैं। उनका इलाज चल रहा है। हालत बिगड़ने पर तीनों बीमारो को देर रात ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया गया।
मामले में सबसे बड़े जिम्मेदार पुलिस व आबकारी विभाग ही हैं। विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि इस इलाके में अवैध शराब की बिक्री को लेकर आबकारी विभाग के एक अधिकारी ने कई दफा शिकायतें भी की व कार्रवाई को दबाव बनाया, मगर विभाग ने कोई कदम नहीं उठाए। यही हालात पुलिस के भी रहे। क्षेत्रीय लोगों की शिकायतों को पुलिस ने गंभीरता से नहीं लिया। पुलिस की इस लापरवाही ने एकसाथ छह परिवारों को उजाड़ दिया। यदि आला अधिकारी समय से चेत जाते तो शायद शहर के बीचोंबीच बसे पथरिया पीर जैसे इलाके में शराब से हुई इन मौतों को रोका जा सकता था।
बाइक पर आते हैं सिपाही और पैसे ले जाते हैं
हंगामे के दौरान क्षेत्रीय लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस के दो सिपाही पलसर बाइक पर आते थे और शराब बेचने वालों से पैसे लेकर चले जाते थे। एक नाबालिग बच्चे ने पुलिस और शराब तस्करों के इस गठजोड़ का पूरा खुलासा किया। बच्चे के मुताबिक शराब तस्कर शराब की डिलीवरी के लिए क्षेत्र के बच्चों को अपने जाल में फंसाना चाहते थे और उन्हें पैसे भी ऑफर करते थे। यह बात भी पुलिस को बताई पर रोजाना बाइक पर आने वाले पुलिसकर्मियों ने उनकी एक न सुनी। तस्करों से पैसे लेने के बाद पुलिसकर्मी क्षेत्रीय लोगों पर रौब गांठकर निकल जाते थे।
मुख्यमंत्री के पास महकमा, फिर भी ये हाल
आबकारी मंत्रालय खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के पास है। इसके बावजूद एक साल में प्रदेश में रुड़की, टिहरी और देहरादून में जहरीली शराब से मौत के तीन बड़े मामले सामने आ चुके हैं। फरवरी में रुड़की और इसके समीप के इलाके में जहरीली शराब के चलते 147 लोगों की मौत हो गई थी व मार्च में टिहरी में दो लोगों की मौत। इनकी जांच ठंडे बस्ते में ही थी कि अब देहरादून में छह लोगों की मौत हो गई व तीन मौत से जूझ रहे। हर बार उच्च स्तरीय जांच के दावे किए गए मगर नतीजा सिफर ही रहा। रुड़की कांड में जिन अधिकारियों को जांच के आधार पर सस्पेंड किया गया था, उन्हें चंद दिन बाद ही बहाल भी कर दिया गया और टिहरी कांड में भी ऐसा ही हुआ। अब दून में हुए मामले पर भी मजिस्ट्रेटी जांच व कार्रवाई के दावे किए जा रहे, मगर पिछले अनुभवों को देखकर कहना मुश्किल है कि जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई होगी।
सुलगते सवाल
राजधानी में किसकी शह पर चल रहा था अवैध धंधा?
शिकायत के बाद भी पुलिस ने क्यों नहीं की कार्रवाई?
आबकारी विभाग ने क्यों इन मामलों पर कभी नहीं लिया संज्ञान?
पथरिया पीर कांड के बाद आबकारी विभाग ने शराब दुकानें बंद तो कराई मगर सील क्यों नहीं की?
आबकारी विभाग दुकानों से नकली माल हटाने की छूट दी थी क्या?
अवैध शराब के मामले में छोटे-मोटे तस्करों पर ही क्यों होती है कार्रवाई?
धड़ल्ले से तस्करी कर लाई जा रही पंजाब व हिमाचल की शराब आबकारी व पुलिस को क्यों नहीं आती नजर?
खुलेआम घूम रहे शराब तस्करों पर क्यों नरम रहती है पुलिस?
बोले वि‍धायक
विलाप करते परिजन
गणेश जोशी (मसूरी विधायक) का कहना है कि मुझे गुरुवार रात क्षेत्रीय लोगों ने तीन लोगों की मौत की सूचना दी थी। शुक्रवार सुबह मैं इन तीनों के अंतिम संस्कार में भी गया और आर्थिक मदद भी की। मुझे यह बताया गया था कि मौत डेंगू के कारण हुई है। इसके बाद मैं मसूरी चला गया। दोपहर में मेरे पास फिर फोन आया कि तीन और लोगों की मौत हो गई है और मौत जहरीली शराब से हुई है। मैं तुरंत वापस आया और प्रकरण की जानकारी ली। क्षेत्र में जहरीली व अवैध शराब की बिक्री की शिकायत पर मैनें लगभग एक महीने पहले एसएसपी को कार्रवाई के लिए कहा था। मामले में धारा चौकी पुलिस की भूमिका पर मुझे भी संदेह था, लिहाजा मैनें उच्चाधिकारी को जांच में लगाने का आग्रह किया। एसएसपी ने जांच सीओ को सौंपी थी और वे कई दफा आए भी। इस बीच यह घटना हो गई। दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पुलिस और आबकारी विभाग के चार अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है।
बोले डीएम
सी. रविशंकर (जिलाधिकारी) का कहना है कि घटना में मजिस्ट्रेटी जांच बैठा दी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया है। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

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