राजधानी में जहरीली शराब से छह की गई जान,सात अस्पताल में, कोतवाल समेत छह अफसर निलंबित

जहरीली शराब पीने से छह लोगों की मौत, कई अस्पताल में भर्ती; कोतवाल, धारा पुलिस चौकी इंचार्ज समेत तीन अफसर निलंबित
देहरादून के नेशविला रोड स्थित पथरिया पीर में जहरीली शराब पीने से छह लोगों की मौत और करीब सात लोगों के बीमार होने का मामला सामने आया है।…

देहरादून, । देहरादून में जहरीली शराब पीने से छह लोगों की मौत हो गई। वहीं, कुछ लोगों को बेहोशी की हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद से ही लोगों में आक्रोश बना हुआ है। वहीं, इस मामले में शासन ने आयुक्त आबकारी सुशील कुमार से रिपोर्ट तलब की है। प्रमुख सचिव आबकारी आनंद वर्द्धन ने कहा कि मामले की जानकारी ली जा रही है, जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

राजधानी देहरादून के नेशविला रोड स्थित पथरिया पीर में जहरीली शराब पीने से छह लोगों की मौत और करीब सात लोगों के बीमार होने का मामला सामने आया है। सभी बीमार लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के बाद से ही क्षेत्र के लोगों और मृतकों के परिजनों में आक्रोश बना हुआ है।

गुस्साए परिजनों ने भारी तादाद में इकट्ठा होकर मसूरी विधायक गणेश जोशी के आवास घेराव किया और मौके पर जमकर हंगामा काटा। उनका कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध शराब बेचने की शिकायत की जा रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
मौके पर जमा भीड़
शहर में बिंदाल नदी से लगे पथरिया इलाके में जहरीली शराब पीने से 48 घंटे के भीतर सेवानिवृत्त फौजी समेत छह लोगों की मौत हो गई। वहीं, तीन लोगों की हालात अब भी गंभीर बनी हुई है। छह लोगों की मौत के बाद इलाकों में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने शराब बेचने वालों के घरों पर जमकर हंगामा किया।
इसी दौरान प्रदर्शनकारियों की पुलिस से तीखे झड़पें और हाथापाई भी हुई। प्रशासन ने एहतियातन जिले भर में देसी शराब के ठेकों को बंद करा दिया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अरूण मोहन जोशी के कोतवाल और धारा चौकी प्रभारी के निलंबित करने के बाद देर रात दो आबकारी निरीक्षक और एक उपनिरीक्षक को निलंबित कर दिया गया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मामले को बेहद गंभीर बताते हुए न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं।
इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून द्वारा निरीक्षक शिशुपाल सिंह नेगी, प्रभारी निरीक्षक कोतवाली नगर और उप निरीक्षक कुलवंत सिंह, चौकी प्रभारी धारा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
दरअसल पथरिया पीर भाग दो मुहल्ले में कई ऐसे ठिकाने हैं, जहां अवैध रूप से शराब बेचने का गोरखधंधा चल रहा था। मौत के मुंह में गए सभी लोगों ने एक ही अवैध ठिकाने से शराब खरीदी थी। बृहस्पतिवार को सबसे पहले राजेंद्र (30) की मौत हुई थी। राजेंद्र ने शराब का सेवन किया था। इसके बाद लल्ला (32) और सेवानिवृत्त फौजी शरण (58) की मौत हुई थी। तीनों को दून अस्पताल ले जाया गया, जहां पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
इन्हें वायरल की शिकायत होने के कारण परिजनों को लगा कि बीमारी के चलते उनकी मौत हुई है। इसीलिए तीनों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। मामले की जानकारी मिलने के बाद विधायक गणेश जोशी ने पीड़ित परिवारों से मिलकर आर्थिक मदद की थी।
शुक्रवार को भी मौत का सिलसिला नहीं थमा। अचानक तबीयत बिगड़ने पर आकाश (24), सुरेन्द्र (34) और इंदर (45) को हालत बिगड़ने पर दून अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पर एक-एक कर उनकी मौत हो गई। तब जाकर हल्ला मचा कि इन सभी लोगों की मौत जहरीली शराब के सेवन से हुई है। इसे लेकर इलाके के लोगों का आक्रोश फूट पड़ा।
लोगों ने पुलिस पर शराब बेचने वालों के साथ सांठगांठ का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। आक्रोशित महिलाओं ने शराब बेचने वालों के घरों में घुसने का प्रयास किया। इस दौरान लोगों और पुलिस के बीच झड़प और हाथापाई भी हुई। मौके पर पहुंचे भाजपा विधायक गणेश जोशी ने सीओ सिटी शेखर सुयाल के साथ लोगों को समझा-बुझाकर शांत किया। हालांकि, देर रात तक महिलाओं का हंगामा जारी था।
हरिद्वार जनपद में भी जहरीली शराब से 42 लोगों की मौत हुई थी
बृहस्पतिवार को तीन लोगों की मौत हुई थी, जिसकी कोई जानकारी पुलिस को नहीं दी गई। परिजनों ने उनका अंतिम संस्कार कर दिया। रोजमर्रा शराब पीने वालों की शुक्रवार को तबीयत बिगड़ी तो उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पर उपचार के दौरान तीन की मौत हो गई। पोस्टमार्टम होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि मौत का क्या कारण है। फिलहाल पुलिस शराब बेचने वालों की धरपकड़ का प्रयास कर रही है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
-अरुण मोहन जोशी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक।
पहले भी हो चुकी हैं कई मौतें

बता दें कि इसी साल फरवरी के महीने में हरिद्वार जिले के बाल्लुपुर गांव से हुई जहरीली शराब की बिक्री ने पूरे क्षेत्र में कहर बरपाया था। इस जहरीली शराब की वजह से उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में 47 और उत्तरप्रदेश को मिलाकर करीब डेढ़ सौ लोगों की जान गई थी। इस हादसे से भी सबक नहीं लिया गया और क्षेत्र में आज भी अवैध शराब का गोरखधंधा जोरों पर है।

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