चीन मामले में सोनिया और सीपीआई को छोड़ सब दल सरकार के साथ

चीन से झड़प पर प्रधानमंत्री / ऑल पार्टी मीटिंग में मोदी बोले- हमने सेना को पूरी छूट दी है, हमारी कोई चौकी किसी के कब्जे में नहीं; देश की एक इंच जमीन पर भी कोई नजर नहीं डाल सकता
सोनिया ने पूछा- क्या सरकार को चीनी घुसपैठ की सैटेलाइट इमेज नहीं मिली थी? क्या इंटेलिजेंस रिपोर्ट नहीं आई थी?
नीतीश ने कहा- देश जानता है कि चीन ने 1962 में क्या किया था, यह वक्त सभी दलों के एकजुट रहने का है
ममता ने कहा- हम मजबूती से सरकार के साथ हैं, भारत जीतेगा और चीन हारेगा, हमें मिलकर काम करना होगा
नई दिल्ली. गलवान में भारतीय सैनिकों की शहादत और चीनी सैनिकों के हमले पर बुलाई गई ऑल पार्टी मीटिंग में सरकार को ज्यादातर दलों का साथ मिला। इस मीटिंग में 20 दलों को बुलाया गया। इनमें से 13 दलों ने खुलकर सरकार का साथ दिया और कहा कि इस वक्त में हम सभी एक हैं। इनमें तृणमूल,जदयू,बीजद जैसे दल शामिल थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमने अपनी सेनाओं को कदम उठाने की पूरी छूट दे रखी है। हमारी एक इंच जमीन पर भी कोई नजर नहीं डाल सकता है।
शिवसेना चीफ और महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा कि हमारी सरकार में ताकत है कि वह आंखें निकालकर हाथ में दे दे। केवल कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मोदी सरकार से सवाल किए।

राजनीतिक दलों को मोदी के 10 संदेश
1. हमारी सीमा में किसी ने घुसपैठ नहीं की और ना ही चीन ने हमारी किसी पोस्ट पर कब्जा किया। हमारे 20 जवान शहीद हुए, लेकिन जिन्होंने भारत माता को चुनौती दी थी, उन्हें वे सबक सिखाकर गए हैं। उनके शौर्य को पूरा देश याद रखेगा। उनके बलिदान से सभी आहत हैं। यह भावना इस बैठक में भी जाहिर हुई है।
2. जवान तैनात करने हैं, एक्शन लेना है। हमारे देश की रक्षा के लिए सशस्त्र सेनाओं को जल, थल, नभ से जवाब देना है, जो कुछ भी करना है, वो करेंगी।
3. हमारी सेना देश की रक्षा के लिए कसर नहीं छोड़ रही है। आज हमारे पास वह ताकत है कि कोई हमारी एक इंच जमीन पर भी नजर नहीं डाल सकता। भारतीय सशस्त्र सेनाओं के पास आज वह क्षमता है कि वह कई मोर्चों पर एक साथ लड़ सकती हैं।
4. हमने जहां एक तरफ सेना को अपने स्तर पर उचित कदम उठाने की छूट दी है, वहीं दूसरी तरफ डिप्लोमैटिक जरियों से भी चीन को अपनी बात दो टूक स्पष्ट कर दी है। भारत शांति और दोस्ती चाहता है, लेकिन अपनी संप्रभुता की रक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है। आप सबने इसी भाव को प्रकट किया है।
5. बीते 5 साल में देश ने अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए सीमाई इलाकों में इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने पर जोर दिया। फाइटर प्लेन, आधुनिक हेलिकॉप्टर, मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर भी हमने जोर दिया है।
6. नए इन्फ्रास्ट्रक्चर की वजह से खासकर एलएसी में हमारी निगरानी की क्षमता बढ़ गई है। पेट्रोलिंग की वजह से सतर्कता बढ़ी है। एलएसी पर हो रही गतिविधियों के बारे में भी पता चला है। जिन इलाकों में पहले नजर नहीं रहती थी, वह पर भी हमारे जवान निगरानी और एक्शन ले पा रहे हैं।
7. अब तक जिनको कोई पूछता नहीं था, कोई रोकता नहीं था। अब हमारे जवान डगर-डगर पर उन्हें रोकते और टोकते हैं। हमारे जवान कठिन परिस्थितियों में तैनात रहते हैं और इन्फ्रास्ट्रक्चर की मदद से उन्हें साजो-सामान पहुंचाने में आसानी होती है।
8. देश और देशवासियों का हित हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। कनेक्टिविटी, काउंटर टेररिज्म हो, भारत ने कभी किसी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं किया। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जो जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण है, उसे इसी तरह तेज गति से किया जाता रहेगा।
9. सभी को, सभी राजनीतिक दलों को आश्वस्त करता हूं कि हमारी सेनाएं सीमाओं की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम हैं। हमने उन्हें कार्रवाई की पूरी छूट दी हुई है।
10. आपके सुझाव हमारे लिए फायदेमंद होंगे। आप सभी आगे आए। इससे सेना का मनोबल बढ़ेगा, देश का मनोबल बढ़ेगा और दुनिया को जो संदेश जाना चाहिए, वह पहुंचेगा।

सोनिया के तीन सवाल
1. इस बैठक को काफी पहले होना चाहिए था। इस मंच पर भी काफी कुछ अंधेरे में ही है। मोदी सरकार बताए कि चीन के सैनिकों ने घुसपैठ कब की? सरकार को इस बारे में कब पता चला?
2. क्या सरकार के पास सैटेलाइट इमेज नहीं थी? इन असामान्य गतिविधियों के बारे में कोई इंटेलीजेंस रिपोर्ट नहीं मिली थी?
3. माउंटेन स्ट्राइक कोर की मौजूदा स्थिति क्या है? देश यह भरोसा चाहता है कि सीमा पर पहले जैसे हालात स्थापित हो जाएंगे। विपक्षी पार्टियों को इस बारे में लगातार जानकारी दी जाए।

इन दलों ने सरकार का साथ दिया, कहा- चीनियों को नहीं घुसने देंगे
1. तृणमूल अध्यक्ष ममता बनर्जी ने कहा कि सर्वदलीय बैठक देश के लिए अच्छा संदेश है। इससे यह जाहिर होता है कि हम अपने जवानों के साथ हैं और एक हैं। तृणमूल मजबूती से सरकार के साथ खड़ी है। टेलीकॉम, शरेलवे और एविएशन में चीन को दखल नहीं देने देंगे। हमें कुछ समस्याएं आएंगी, पर हम चीनियों को नहीं घुसने देंगे।
ममता ने कहा- चीन में कोई लोकतंत्र नहीं है। वे वह कर सकते हैं,जैसा महसूस करते हैं। दूसरी तरफ हम सबको साथ मिलकर काम करना है। भारत जीतेगा,चीन हारेगा। एकता से बात करें,एकता की बात करें,एकता से ही काम करें।
2. जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने कहा कि पूरे देश में चीन के खिलाफ गुस्सा है। हमारे बीच कोई मतभेद नहीं होना चाहिए। हम साथ हैं। राजनीतिक दलों को कोई मतभेद नहीं दिखाना चाहिए, जिसका दूसरे देश फायदा उठा सकें। भारत के प्रति चीन का नजरिया जाहिर है। भारत चीन को सम्मान देना चाहता है, लेकिन उसने 1962 में क्या किया।
नीतीश ने कहा- भारतीय बाजार में चीनी सामान की बाढ़ बहुत बड़ी समस्या है। हमें एक साथ रहना है और केंद्र को सपोर्ट करना है।
3. शिवसेना अध्यक्ष और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने चीनी सैनिकों के हमले पर तल्ख बयान दिया। ऑल पार्टी मीटिंग में उन्होंने कहा कि भारत शांति चाहता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम कमजोर हैं। चीन का चरित्र ही धोखा देना रहा है। भारत मजबूत है, मजबूर नहीं। हमारी सरकार के पास ताकत है कि वह आंखें निकाल कर हाथ में दे देगी।
4. समाजवादी पार्टी के नेता राम गोपाल यादव ने कहा कि पाकिस्तान और चीन की नीयत सही नहीं है। भारत चीन का डंपिंग ग्राउंड नहीं है। चीन के सामानों पर भारत को 300% कस्टम ड्यूटी लगा देनी चाहिए।
5. सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के चीफ और सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने कहा- हमें प्रधानमंत्री में पूरा भरोसा है। इससे पहले भी जब राष्ट्रीय सुरक्षा के मसले उठे तो प्रधानमंत्री ने ऐतिहासिक फैसले लिए हैं।
6. टीआरएस चीफ और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने कहा- कश्मीर में विकास के प्रधानमंत्री के एजेंडे से चीन भी खफा है। आत्मनिर्भर भारत का नारा भी चीन को परेशान कर रहा है।
7. डीएमके नेता एमके स्टालिन ने कहा- जब भी देशभक्ति की बात आती है तो हम सभी एक हैं। प्रधानमंत्री ने चीन के मुद्दे पर हाल में जो बयान दिया है, हम उसका स्वागत करते हैं।
8. एनपीपी के कोनराड संगमा ने कहा कि सीमा पर इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने का काम नहीं रुकना चाहिए। म्यांमार और बांग्लादेश में चीन की गतिविधियां परेशान करने वाली हैं। उत्तर-पूर्व के इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने का जो काम प्रधानमंत्री कर रहे हैं, वो रुकना नहीं चाहिए।
9. बीजद के नेता पिनाकी मिश्रा ने कहा- चीन ने इतिहास को दोहराया है। एक बार फिर उसने अंधेरे में कायरतापूर्वक हमारे सैनिकों पर हमला किया है। उन सैनिकों पर हमला किया, जो शांति का संदेश लेकर गए थे।
10. वाईएसआर कांग्रेस के चीफ और आंध्र प्रदेश के सीएम जगन मोहन रेड्डी ने कहा- प्रधानमंत्री ने भारत का कदम पूरी दुनिया में बढ़ाया है। उन्होंने पूरी दुिनया में अहम कूटनीतिक संधियां की हैं। प्रधानमंत्रीजी आप हमारी ताकत हैं। भारत से कई लोग जल भी रहे हैं। चीन भारत को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है।
अन्नाद्रमुक, अकाली दल और माकपा ने भी सरकार का समर्थन किया है।
राकांपा ने कहा-यह मसला संवेदनशील,इसका सम्मान करें
राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि हमें इस संवेदनशील मुद्दे का सम्मान करना चाहिए। सैनिक हथियार ले गए थे या फिर नहीं,यह फैसला अंतरराष्ट्रीय समझौतों के तहत किया गया है।
सीपीआई के डी राजा ने कहा- हमें अमेरिका की उन कोशिशों का विरोध करना चाहिए,जिनके जरिए वो हमें अपने साथ मिलाना चाहता है।
चीन मामले पर हुई इस सर्वदलीय बैठक में राजद और आप को नहीं बुलाया गया था।

चार क्राइटेरिया के आधार पर पार्टियों को इनविटेशन
न्यूज एजेंसी एएनआई के सूत्रों के मुताबिक, 4 क्राइटेरिया के आधार पर ऑल पार्टी मीटिंग के लिए इनविटेशन दिए गए थे।
पहला- सभी नेशनल पार्टी।
दूसरा- जिन पार्टियों के लोकसभा में 5 सांसद हैं।
तीसरा- नॉर्थ-ईस्ट की प्रमुख पार्टियां।
चौथा- जिन पार्टियों के नेता केंद्रीय कैबिनेट में शामिल हैं। इसके आधार पर 20 पार्टी आज की मीटिंग में शामिल हुई हैं।

पिछली 2 ऑल पार्टी मीटिंग में राजनाथ सिंह ने अध्यक्षता की थी
देश की सीमाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर 6 साल में यह तीसरी ऑल पार्टी मीटिंग होगी। पिछले साल पुलवामा में आतंकी हमले के बाद 16 फरवरी 2019 को सभी पार्टियों की मीटिंग हुई थी। इससे पहले पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद 29 सितंबर 2016 को हुई थी। इन दोनों मीटिंग की अध्यक्षता उस वक्त के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने की थी।

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